रावल समरसिंह के बाद उसका पà¥à¤¤à¥à¤° रतà¥à¤¨à¤¸à¤¿à¤‚ह चितà¥à¤¤à¥Œà¤¡à¤¼ की गदà¥à¤¦à¥€ पर बैठा । पदà¥à¤®à¤¿à¤¨à¥€ रतà¥à¤¨à¤¸à¤¿à¤‚ह की मà¥à¤–à¥à¤¯ रानी थी। पदà¥à¤®à¤¿à¤¨à¥€ अपूरà¥à¤µ सà¥à¤¨à¥à¤¦à¤° थी। उसकी सà¥à¤¨à¥à¤¦à¤°à¤¤à¤¾ की खà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¤¿ दूर-दूर तक फैल चà¥à¤•ी थी। अलाउदà¥à¤¦à¥€à¤¨ पदà¥à¤®à¤¿à¤¨à¥€ जैसी अनिदà¥à¤¯ सà¥à¤¨à¥à¤¦à¤°à¥€ को पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ करने के लिठलालायित हो उठा । चितà¥à¤¤à¥Œà¤¡à¤¼ पर आकà¥à¤°à¤®à¤£ कर दà¥à¤°à¥à¤— को घेर लिया । लमà¥à¤¬à¥‡ समय तक घेरा डाले रहने के बाद à¤à¥€ दà¥à¤°à¥à¤— पर आधिपतà¥à¤¯ जमाने में वह सफल नहीं हो सका। अलाउदà¥à¤¦à¥€à¤¨ खिलजी ने देखा राजपूत सैनिकों के अदमà¥à¤¯ साहस और वीरता के आगे उसका बस नहीं चल सकता अतः उसने कूटनीति से काम लेने की सोची ।
रतà¥à¤¨à¤¸à¤¿à¤‚ह को उसने दूत के साथ यह संदेश कहलाया कि “à¤à¤• बार यदि उसे रानी पदà¥à¤®à¤¿à¤¨à¥€ को दिखा दें तो मैं घेरा समापà¥à¤¤ कर वापिस दिलà¥à¤²à¥€ लौट जाऊंगा ।” दूत का यह संदेश सà¥à¤¨à¤•र रतà¥à¤¨à¤¸à¤¿à¤‚ह आग-बबूला हो गया और अलाउदà¥à¤¦à¥€à¤¨ का मà¥à¤‚हतोड़ जवाब देने को उदà¥à¤¯à¤¤ हà¥à¤† । रानी पदà¥à¤®à¤¿à¤¨à¥€ ने इस अवसर पर दूरदरà¥à¤¶à¤¿à¤¤à¤¾ का परिचय देते हà¥à¤ अपने पति रतà¥à¤¨à¤¸à¤¿à¤‚ह को समà¤à¤¾à¤¯à¤¾ कि “मेरे कारण वà¥à¤¯à¤°à¥à¤¥ ही मेवाड़ी वीरों का रकà¥à¤¤ बहाना बà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿à¤®à¤¾à¤¨à¥€ नहीं है।” राजपूत नारी को अपनी ही नहीं पूरे चितà¥à¤¤à¥Œà¤¡à¤¼ राजà¥à¤¯ की चिनà¥à¤¤à¤¾ थी। वह नहीं चाहती थी कि उसके कारण चितà¥à¤¤à¥Œà¤¡à¤¼ तबाह हो जाय। उसने मधà¥à¤¯ मारà¥à¤— निकाल कर कि अलाउदà¥à¤¦à¥€à¤¨ चाहे तो आइने में रानी का मà¥à¤– देख सकता है, समसà¥à¤¯à¤¾ को सà¥à¤²à¤à¤¾à¤¨à¥‡ का पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ किया।
अलाउदà¥à¤¦à¥€à¤¨ को तो दिलà¥à¤²à¥€ लौटने का बहाना चाहिठथा। घेरा डालने से विजय हासिल नहीं हà¥à¤ˆ और अब यदि वह घेरा उठाता तो उसकी à¤à¤• तरह से पराजय ही होती और वह नहीं चाहता था कि उसके सैनिकों में यह बात फैले अतः आइने में मà¥à¤– देखने का पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¤¾à¤µ सà¥à¤µà¥€à¤•ार कर लिया। चितà¥à¤¤à¥Œà¤¡à¤¼ के राजमहल में अलाउदà¥à¤¦à¥€à¤¨ का सà¥à¤µà¤¾à¤—त-सतà¥à¤•ार अतिथि की तरह किया गया और दरà¥à¤ªà¤£ में पदà¥à¤®à¤¿à¤¨à¥€ के मà¥à¤–ारविनà¥à¤¦ का दरà¥à¤¶à¤¨ कर आशà¥à¤šà¤°à¥à¤¯ चकित रह गया । कà¥à¤Ÿà¤¿à¤² हृदय ने मन-ही-मन चाल चली और जब रतà¥à¤¨à¤¸à¤¿à¤‚ह किले से बाहर उसे पहà¥à¤‚चाने गया तो अलाउदà¥à¤¦à¥€à¤¨ ने अपने सैनिकों को संकेत किया और तà¥à¤°à¤¨à¥à¤¤ रतà¥à¤¨à¤¸à¤¿à¤‚ह को गिरफà¥à¤¤à¤¾à¤° कर लिया गया।
रतà¥à¤¨à¤¸à¤¿à¤‚ह को कैद करने के पशà¥à¤šà¤¾à¤¤à¥ अलाउदà¥à¤¦à¥€à¤¨ ने पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¤¾à¤µ रखा कि यदि पदà¥à¤®à¤¿à¤¨à¥€ को उसे सà¥à¤ªà¥à¤°à¥à¤¦ कर दें तो रतà¥à¤¨à¤¸à¤¿à¤‚ह को कैद मà¥à¤•à¥à¤¤ किया जा सकता है। पदà¥à¤®à¤¿à¤¨à¥€ ने इस समय à¤à¥€ कूट नीति का पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥à¤¤à¥à¤¤à¤° कूटनीति से ही देना समीचीन समà¤à¤¾à¥¤ उसने अलाउदà¥à¤¦à¥€à¤¨ के पास यह संदेश à¤à¥‡à¤œà¤¾ कि – “मैं मेवाड़ की महारानी अपनी सात सौ सहचरियों के साथ आपके समà¥à¤®à¥à¤– उपसà¥à¤¥à¤¿à¤¤ होने से पूरà¥à¤µ अपने पति के दरà¥à¤¶à¤¨ करना चाहती हूं अतः यह शरà¥à¤¤ सà¥à¤µà¥€à¤•ार हो तो मà¥à¤à¥‡ सूचित करें। पदà¥à¤®à¤¿à¤¨à¥€ का à¤à¤¸à¤¾ संदेश पाकर अलाउदà¥à¤¦à¥€à¤¨ दीवाना हो गया, जैसे पदà¥à¤®à¤¿à¤¨à¥€ बस उसे मिल ही गयी, उसने तà¥à¤°à¤¨à¥à¤¤ रानी को कहलवाया “तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥€ हर शरà¥à¤¤ मà¥à¤à¥‡ सà¥à¤µà¥€à¤•ारà¥à¤¯ है।” पदà¥à¤®à¤¿à¤¨à¥€ को पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ करने के लिठअलाउदà¥à¤¦à¥€à¤¨ बेताब हो रहा था ।
इधर पदà¥à¤®à¤¿à¤¨à¥€ ने सात सौ डोलियां तैयार करवाई जिसमें दो अनà¥à¤¦à¤° और दो बाहर राजपूत सैनिक बिठाये गये । सात सौ पालकियों में बयालीस सौ वीर राजपूत सैनिकों के साथ पदà¥à¤®à¤¿à¤¨à¥€ अपने पति से मिलने चली । उसकी डोली के दोनों ओर वीरवर गोरा और बादल घोड़ों पर सवार हो कालजयी पà¥à¤°à¤¹à¤°à¥€ के समान चल रहे थे । यवन सेना और अलाउदà¥à¤¦à¥€à¤¨ उस काफिले को देख रहे थे । सारी पालकिया रà¥à¤•ीं, पदà¥à¤®à¤¿à¤¨à¥€ की पालकी में à¤à¤• लोहार बैठा था अतः पदà¥à¤®à¤¿à¤¨à¥€ का रतà¥à¤¨à¤¸à¤¿à¤‚ह से मिलने का सà¥à¤µà¤¾à¤‚ग रच कर उसे बंधन मà¥à¤•à¥à¤¤ कर कैद से छà¥à¤¡à¤¼à¤¾à¤¯à¤¾ और शेष डोलियों से राजपूत वीर सैनिक वेश में निकल कर यवन सेना पर टूट पड़े । रतà¥à¤¨à¤¸à¤¿à¤‚ह गोरा बादल की चतà¥à¤°à¤¾à¤ˆ से सकà¥à¤¶à¤² दà¥à¤°à¥à¤— में पहà¥à¤‚च गये । अलाउदà¥à¤¦à¥€à¤¨ को परासà¥à¤¤ होना पड़ा ।
अपनी अपमान जनक पराजय का बदला लेने अलाउदà¥à¤¦à¥€à¤¨ कà¥à¤› समय उपरानà¥à¤¤ ही फिर चितà¥à¤¤à¥Œà¤¡à¤¼ पर आकà¥à¤°à¤®à¤£ करता है । राजपूत केसरिया बाना पहिन कर साका करते हैं । रतà¥à¤¨à¤¸à¤¿à¤‚ह यà¥à¤¦à¥à¤§ के मैदान में वीरगति को पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ हà¥à¤¯à¥‡ तब पदà¥à¤®à¤¿à¤¨à¥€ ने राजपूत नारियों की कà¥à¤²-परमà¥à¤ªà¤°à¤¾, मरà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ और अपने सतीतà¥à¤µ की रकà¥à¤·à¤¾ के लिठजौहर यजà¥à¤ž किया । सहसà¥à¤°à¥‹à¤‚ नारियों के साथ पदà¥à¤®à¤¿à¤¨à¥€ अगà¥à¤¨à¤¿ कà¥à¤£à¥à¤¡ में जलकर à¤à¤¸à¥à¤® हो गयी । अपूरà¥à¤µ सà¥à¤¨à¥à¤¦à¤°à¥€ पदà¥à¤®à¤¿à¤¨à¥€, जिसे दिलà¥à¤²à¥€ का बादशाह पाने को लालायित था, अपने कà¥à¤²à¤—ौरव की रकà¥à¤·à¤¾à¤°à¥à¤¥ जलकर सà¥à¤µà¤¾à¤¹à¤¾ हो गयी, जिसकी कीरà¥à¤¤à¤¿-गाथा आज à¤à¥€ अमर है और सदियों तक आने वाली पीढी को गौरवपूरà¥à¤£ आतà¥à¤® बलिदान की पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤£à¤¾ करती रहेगी ।
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