छतà¥à¤°à¤•à¥à¤‚वरी किशनगढ़ (रूपनगर) के महाराजा सरदार सिंह की पà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ थी। उनका विवाह राधोगढ़ के महाराजा बहादà¥à¤° सिंह खीची के साथ हà¥à¤†à¥¤ कावà¥à¤¯à¤—à¥à¤£ समà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨à¤¾ छतà¥à¤°à¤•à¥à¤‚वरी ने अपना परिचय सà¥à¤µà¤¯à¤‚ अपने कावà¥à¤¯ में दिया है जिसमें अपने को नागरीदास की पौतà¥à¤°à¥€ और सरदार सिंह की पà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ बताया है –
रूपनगर नृप राजसी, जिन सà¥à¤¤ नागरिदास
तिन पà¥à¤¤à¥à¤° जॠसरदारसी, हों तनया मैं तास।
छतà¥à¤° कà¥à¤‚वरी मम नाम है, कहिवे को जग मांहि
पà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ सरन दासतà¥à¤µ ते, हौं हित चूर सदाहिं।
राजपूत नारियाठकेवल शौरà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨ और सà¥à¤µà¤¾à¤à¤¿à¤®à¤¾à¤¨ रकà¥à¤·à¤¾ में ही नहीं लगी रही। शील और पतिवà¥à¤°à¤¤ धरà¥à¤® का पालन करना ही मातà¥à¤° उनका कारà¥à¤¯ नहीं रहा। परà¥à¤¦à¥‡ के à¤à¥€à¤¤à¤° मोम की गà¥à¤¡à¤¼à¤¿à¤¯à¤¾ बनकर ही नहीं बैठी रही। समय और यà¥à¤— की माà¤à¤— के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने सदा अपने आदरà¥à¤¶à¥‹à¤‚ का तो पालन किया ही, साथ ही कई पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤à¤¾ समà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ नारियों ने विविध कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤ में à¤à¥€ पà¥à¤°à¤¶à¤‚सनीय उपलबà¥à¤§à¤¿à¤¯à¤¾à¤ हासिल की। à¤à¤•à¥à¤¤à¤¿ जगत और कावà¥à¤¯ रचना में à¤à¥€ उनकी महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ à¤à¥‚मिका रही है जिनकी à¤à¤•à¥à¤¤à¤¿ रस में सराबोर हà¥à¤¯à¥€ कावà¥à¤¯ रचनाà¤à¤ सहृदय पाठकों को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ किये बिना नहीं रहती। à¤à¤¸à¥€ ही सरस à¤à¤¾à¤µà¤§à¤¾à¤°à¤¾ का सृजन करने वाली छतà¥à¤°à¤•à¥à¤‚वरी थी। उनका लिखा हà¥à¤† ‘पà¥à¤°à¥‡à¤® विनोद’ नामक गà¥à¤°à¤‚थ मिलता है। इसकी कà¥à¤› पंकà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤ दà¥à¤°à¤·à¥à¤Ÿà¤µà¥à¤¯ है –
शà¥à¤¯à¤¾à¤® सखी हंसी कà¥à¤‚वरि दिस, बोली मधà¥à¤°à¥‡ बैन।
सà¥à¤®à¤¨ लेन चलिठअबै, यह बिरिया सà¥à¤– दैन।
यह बिरिया सà¥à¤– दैन जान मà¥à¤¸à¤•ाय चली जब।
नवल सखी करि कà¥à¤‚वरि, संग सहचरि विथà¥à¤°à¥€ सब।
पà¥à¤°à¥‡à¤® à¤à¤°à¥€ सब सà¥à¤®à¤¨ चà¥à¤¨à¤¤ जित तित सांà¤à¥€ हित।
ये दà¥à¤¹à¥à¤‚ बेबस अंग फिरत निज गति मति मिशà¥à¤°à¤¿à¤¤à¥¤à¥¤
डा.विकà¥à¤°à¤®à¤¸à¤¿à¤‚ह राठौड़,गà¥à¤¨à¥à¤¦à¥‹à¤œ
राजसà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥€ शोध संसà¥à¤¥à¤¾à¤¨, चोपासनी, जोधपà¥à¤°
यदि आप à¤à¤¸à¥€ गà¥à¤£à¥€ व पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤à¤¾ समà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ कनà¥à¤¯à¤¾ के लिठसà¥à¤¯à¥‹à¤—à¥à¤¯ वर की तलाश में है तो आज ही राजशाही विवाह – Rajput Matrimonial Website पर अपना पंजीयन निशà¥à¤²à¥à¤• करवायें।
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Through Our Society, I strive to cover every aspect of India’s identity-be it social, cultural, political, or historical-leaving no stone unturned. I firmly believe in the power of blogging to inspire and create impact, and with this belief, I introduced the unique concept of Our Society to help people discover and experience the magnificent heritage and essence of India.
विदà¥à¤¯à¥à¤²à¥à¤²à¤¤à¤¾ चितà¥à¤¤à¥Œà¤¡à¤¼ के à¤à¤• वीर राजपूत सैनिक की कनà¥à¤¯à¤¾ थी। चितà¥à¤¤à¥Œà¤¡à¤¼ के ही समरसिंह नामक…
सारनà¥à¤§à¤¾ ओरछा (बà¥à¤¨à¥à¤¦à¥‡à¤² खणà¥à¤¡) नरेश चमà¥à¤ªà¤¤à¤°à¤¾à¤¯ की पतà¥à¤¨à¥€ थी। सारनà¥à¤§à¤¾ बड़ी सà¥à¤µà¤¾à¤à¤¿à¤®à¤¾à¤¨à¥€, उदार, शरणागतवतà¥à¤¸à¤² व…
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