कà¥à¤› दिनों से देखा जा रहा है की देश में धरà¥à¤® के आधार पर बड़ी चरà¥à¤šà¤¾ चल रही है l चाहे कशà¥à¤®à¥€à¤° के मà¥à¤¦à¥à¤¦à¥‡ पर हो या फिर बाबरी मसà¥à¤œà¤¿à¤¦ से राम मंदिर तक के सफर की चाहे मथà¥à¤°à¤¾ की शाही ईदगाह का मà¥à¤¦à¥à¤¦à¤¾ हो या काशी विशà¥à¤µà¤¨à¤¾à¤¥ और कथित जà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤µà¤¾à¤ªà¥€ मसà¥à¤œà¤¿à¤¦ सà¤à¥€ मà¥à¤¦à¥à¤¦à¥‡ धरà¥à¤® की à¤à¤• अलग ही दिशा तय करने और देश को à¤à¤• अलग दिशा में ले जा रहे है।
अब सवाल ये उठता है की आखिर सही किसे कहा जाये ? तो देश के सà¤à¥€ नेता, सà¤à¥€ मौलाना, सà¤à¥€ साधॠसंत और सà¤à¥€ नागरिक अपनी अपनी बात रख रहे है। दफà¥à¤¤à¤° हो या चाय की दà¥à¤•ान, गली मोहलà¥à¤²à¤¾ हो या नेताओं की राजनितिक सà¤à¤¾à¤à¤‚ सà¤à¥€ जगह लोग अपनी अपनी जानकारी के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° बात कर रहे है। लेकिन आम जनता आखिर किसे सही माने किसे गलत, ये सवाल बड़ा है। आज हम इनà¥à¤¹à¥€ कà¥à¤› मà¥à¤¦à¥à¤¦à¥‹à¤‚ में से à¤à¤• पर रौशनी डालने की कोशिश करेंगे।
कथित जà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤µà¤¾à¤ªà¥€ मसà¥à¤œà¤¿à¤¦ मà¥à¤¦à¥à¤¦à¤¾
हाल ही में à¤à¤• मà¥à¤¦à¥à¤¦à¤¾ जो चरà¥à¤šà¤¾ में जोरों पर है, वह है जà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤µà¤¾à¤ªà¥€ मसà¥à¤œà¤¿à¤¦ जो की काशी विशà¥à¤µà¤¨à¤¾à¤¥ मंदिर से सटा हà¥à¤† या ये कहा जो सकता है की मंदिर की सीमा में ही सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ है। सैंकड़ो सालों से मà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤® समाज वह इबादत करता आ रहा है। इस मसà¥à¤œà¤¿à¤¦ पर हिनà¥à¤¦à¥‚ समाज ने ये दावा किया है की ये मंदिर को तोड़कर मसà¥à¤œà¤¿à¤¦ का रूप दिया गया है तथा इस जगह को मंदिर मानकर हिनà¥à¤¦à¥‚ समठको सौंपा जाना चाहिà¤à¥¤ इसके लिठहिनà¥à¤¦à¥‚ समाज ने सालों से अदालत में याचिकाà¤à¤‚ लगाई पर कà¤à¥€ इस मà¥à¤¦à¥à¤¦à¥‡ पर कोई खास पà¥à¤°à¤—ति नहीं हà¥à¤ˆ कà¥à¤¯à¥‹à¤•ि देश में सदा मà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤® समाज के पकà¥à¤· में कड़ी कांगà¥à¤°à¥‡à¤¸ सरकार का राज रहा। यही कारन है देश में कà¤à¥€ à¤à¥€ जनता को à¤à¤¸à¥‡ मामलों की सही जानकारी नहीं मिल पाई। कांगà¥à¤°à¥‡à¤¸ ने सदैव देश को गलत इतिहास को पढ़ने समà¤à¤¨à¥‡ पर मजबूर किया।
आज मोदी – योगी की सरकार आने से ये मà¥à¤®à¤•िन हो पाया की देश की जनता को इतिहास के उन काले पनà¥à¤¨à¥‹ को पढ़ने और समà¤à¤¨à¥‡ का अवसर मिला है और अपने ऊपर हà¥à¤ अतà¥à¤¯à¤¾à¤šà¤¾à¤°à¥‹à¤‚ के खिलाफ उठखड़े होने और अपने अधिकारों के लिठआवाज उठाने का मौका मिला है।
आज देश की अदालतों ने à¤à¥€ हिनà¥à¤¦à¥‚ समाज के दरà¥à¤¦ को समà¤à¤¨à¥‡ की कोशिश की तथा पहले बाबरी मसà¥à¤œà¤¿à¤¦ के सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर राम मंदिर बनाने का फैसला हो या अब जà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤µà¤¾à¤ªà¥€ मामले में सरà¥à¤µà¥‡ का फैसला हो। जबसे जà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤µà¤¾à¤ªà¥€ मसà¥à¤œà¤¿à¤¦ में सरà¥à¤µà¥‡ का फैसला अदालत ने लिया देश में मà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤® समाज के ठेकेदारों या ये कहलें मà¥à¤—लिया खून में à¤à¤• अलग ही उबाल देखने को मिला। सवाल ये है की अगर मसà¥à¤œà¤¿à¤¦ है तो सरà¥à¤µà¥‡ करने में कà¥à¤¯à¤¾ परेशानी हो सकती है? आखिर मसà¥à¤œà¤¿à¤¦ में सरà¥à¤µà¥‡ किया जायेगा तो इसà¥à¤²à¤¾à¤® से जà¥à¤¡à¤¼à¥‡ निशान और वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ मिलेगी, इसà¥à¤²à¤¾à¤®à¥€ धरà¥à¤® से जà¥à¤¡à¥€ à¤à¤µà¤¨ शैली मिलेगी। जब यही सब मिलना है तो फिर सरà¥à¤µà¥‡ के खिलाफ मà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤® समाज की ये खलबली समठसे परे है।
पर असल में ये खलबली इसलिठहै कà¥à¤¯à¥‹à¤•ि सरà¥à¤µà¥‡ हो गया है और जो चीजें मसà¥à¤œà¤¿à¤¦ परिसर से निकल कर आई है , जो फोटोज में और वीडियो में आया है वह शायद मà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤® समाज के लिठचोर की दाढ़ी में तिनके वाली सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ पैदा कर रहा है। चाहे मसà¥à¤œà¤¿à¤¦ के वजूखाने में निकले शिवलिंग की सचà¥à¤šà¤¾à¤ˆ हो ये मसà¥à¤œà¤¿à¤¦ के गà¥à¤®à¥à¤¬à¤œ के निचे आज à¤à¥€ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ मंदिर के गà¥à¤®à¥à¤¬à¤œ की आकृति का होना हो, या फिर जगह जगह सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¤à¤¿à¤•, कमल, तà¥à¤°à¤¿à¤¶à¥‚ल या संसà¥à¤•ृत में लिखे शà¥à¤²à¥‹à¤‚को का मसà¥à¤œà¤¿à¤¦ की दीवारों पर आज à¤à¥€ होना हो। मà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤® समाज इन सà¤à¥€ बातों को देशवासियों के सामने आ जाने के डर से घबराया हà¥à¤† है। मà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤® समाज ये नहीं चाहता की सरà¥à¤µà¥‡ की रिपोरà¥à¤Ÿ को बहार आने दिया जाये। इसी बात को लेकर राजनितिक रोटी सेक रहे पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨ परसà¥à¤¤ औवेसी हो या पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨ की जिहादी मानसिकता फैला रहे मौलाना हो वà¥à¤¯à¤¾à¤•à¥à¤² हो कर देश में अनरà¥à¤—ल बयानबाजी कर मà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤® समाज को à¤à¤¡à¤¼à¤•ा कर देश में आग लगाने का काम कर रहे है। उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ डर है जिन मà¥à¤—़लों के किये अपराधों को ये लोग आज तक छिपा रहे थे वह देश की जनता के सामने आ जाने से न सिरà¥à¤« हिनà¥à¤¦à¥‚ समाज जाग जायेगा अपितॠजिन मà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤®à¥‹à¤‚ को ये लोग आज तक ये बेवकूफ बनाते आये है वह à¤à¥€ इनसे विमà¥à¤•à¥à¤¤ हो जायेंगे।
जà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤µà¤¾à¤ªà¥€ का कà¥à¤¯à¤¾ अरà¥à¤¥ है? जà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤µà¤¾à¤ªà¥€ की वà¥à¤¯à¤¾à¤–à¥à¤¯à¤¾ कहां मिलती है ?
इन सवालों के जवाब जानने के लिठअगर इसके à¤à¤¤à¤¿à¤¹à¤¾à¤¸à¤¿à¤• पकà¥à¤· को हम देखें तो सà¥à¤•ंद पà¥à¤°à¤¾à¤£ के काशी खंड में पूरà¥à¤µà¤¾à¤°à¥à¤§ में कथानक राजा मालकेतू और उनकी रानी कलावती का आता है। इस कथानक के माधà¥à¤¯à¤® से यह बताया गया है कि जà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤µà¤¾à¤ªà¥€ शिव का पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¤•à¥à¤· रूप होता है, यह जà¥à¤žà¤¾à¤¨ को पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करने वाला सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ है। पà¥à¤°à¤¾à¤£à¥‹à¤‚ में शिव के जिन 8 रूपों की चरà¥à¤šà¤¾ की गई है, जà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤µà¤¾à¤ªà¥€ à¤à¥€ उनके सà¥à¤µà¤°à¥‚प के रूप में आता है।जà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤µà¤¾à¤ªà¥€ का सà¥à¤µà¤°à¥‚प जल का रूप होता है, जिसे जà¥à¤žà¤¾à¤¨ वरà¥à¤§à¤¨ करने वाला सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ कहा गया है।
जà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤µà¤¾à¤ªà¥€ à¤à¤—वान शिव का जल सà¥à¤µà¤°à¥‚प:
जब राजा माल केतू और कलावती यहां आते थे, तो à¤à¤—वान शिव सà¥à¤µà¤¯à¤‚ उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ उपदेश देते थे। जà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤µà¤¾à¤ªà¥€ की पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨à¤¤à¤¾ अरà¥à¤²à¥€ मीडियम पीरियड तक जाती है। कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि सà¥à¤•ंद पà¥à¤°à¤¾à¤£ की रचना लगà¤à¤— आठवीं शताबà¥à¤¦à¥€ मानी जाती है। जà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤µà¤¾à¤ªà¥€ के इतिहास के बारे में बताया गया है कि जà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤µà¤¾à¤ªà¥€ शिव का जल सà¥à¤µà¤°à¥‚प है। वह जà¥à¤žà¤¾à¤¨ को वरà¥à¤§à¤¨ करने वाली जगह है। जहां पर शिव ने सà¥à¤µà¤¯à¤‚ राजा माल केतॠऔर उनकी रानी कलावती को उपदेश दिया था। सà¥à¤•ंद पà¥à¤°à¤¾à¤£ की बात की जाठतो अविमà¥à¤•à¥à¤¤à¥‡à¤¶à¥à¤µà¤° के आधार पर यह कहा जा सकता है कि काशी में वह गà¥à¤ªà¥à¤¤à¤•ाल से शैव संपà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¯ की पूजा होती है। तà¤à¥€ मंदिर का à¤à¥€ निरà¥à¤®à¤¾à¤£ किया गया था।
जà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤µà¤¾à¤ªà¥€ का मतलब जà¥à¤žà¤¾à¤¨ का कà¥à¤‚ड:
जà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤µà¤¾à¤ªà¥€ मतलब जà¥à¤žà¤¾à¤¨ का कà¥à¤‚ड होता है। इस कà¥à¤‚ड को बनाने का शà¥à¤°à¥‡à¤¯ सीधे à¤à¤—वान शिव को जाता है। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने ही अपने तà¥à¤°à¤¿à¤¶à¥‚ल के माधà¥à¤¯à¤® से उसे जमीन से सà¥à¤ªà¤°à¥à¤¶ कराकर वहां पर पानी निरà¥à¤§à¤¾à¤°à¤¿à¤¤ किया था। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने यहां पर अविमà¥à¤•à¥à¤¤à¥‡à¤¶à¥à¤µà¤° को सà¥à¤¨à¤¾à¤¨ करवाया था, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कहा था कि अविमà¥à¤•à¥à¤¤à¥‡à¤¶à¥à¤µà¤° उनका अंश है,वह उनके साथ लंबे समय तक रहेगा। जà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤µà¤¾à¤ªà¥€ का उलà¥à¤²à¥‡à¤– जल पà¥à¤°à¤¾à¤£à¥‹à¤‚ में जà¥à¤žà¤¾à¤¨à¥‹à¤¦à¤¯ तीरà¥à¤¥ के रूप में है. पà¥à¤°à¤¾à¤£à¥‹à¤‚ में à¤à¤¸à¤¾ कहा गया है कि जो मरणासनà¥à¤¨ पà¥à¤°à¤¾à¤£à¥€ है वापी के पास बैठकर समीप बैठकर अपनी गोद में उसके सिर को रखकर तारक मंतà¥à¤° का जाप कराता है, जिससे उसका पà¥à¤¨à¤°à¥à¤œà¤¨à¥à¤® न हो. कहा जाता है कि है काशी जनà¥à¤® लेने वाला मà¥à¤•à¥à¤¤ हो जाता है.
जà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤µà¤¾à¤ªà¥€ काशी के 9 वापी में से à¤à¤•:
सà¥à¤•ंद पà¥à¤°à¤¾à¤£ के काशी खंड में अटà¥à¤ ासी हृदà¥à¤¯ 62 कà¥à¤‚डो का सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ उलà¥à¤²à¥‡à¤– है। शिव पà¥à¤°à¤¾à¤£ के अधà¥à¤¯à¤¾à¤¯ 21 पृषà¥à¤ संखà¥à¤¯à¤¾ 1093 में साफ लिखा है कि à¤à¤—वान शिव अपने शिवलिंग से यह कह रहे हैं कि मेरे अंश वाले जà¥à¤¯à¥‹à¤¤à¤¿à¤°à¥à¤²à¤¿à¤‚ग अविमà¥à¤•à¥à¤¤à¥‡à¤¶à¥à¤µà¤° तà¥à¤® किसी à¤à¥€ मूलà¥à¤¯ पर काशी को मत छोड़ना। डॉ पà¥à¤°à¤µà¥€à¤£ à¤à¤¾à¤°à¤¦à¥à¤µà¤¾à¤œ ने बताया कि काशी में 9 वापी थे। लेकिन लिंग पà¥à¤°à¤¾à¤£ के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤• सिरà¥à¤« 6 वापी का उलà¥à¤²à¥‡à¤– मिलता है। जिसमें से à¤à¤• काशीपà¥à¤°à¤¾ में मौजूद था.जेषà¥à¤ ा वापी अब लà¥à¤ªà¥à¤¤ हो गया है। इसके अलावा दूसरा वापी ककोरà¥à¤Ÿ वापी जो कि महाà¤à¤¾à¤·à¥à¤¯ की संरचना करने वाले पातंजलि जी के निवास सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर है, जिसे नाग कà¥à¤‚आ कहा जाता है।
आखिर जà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤µà¤¾à¤ªà¥€ मंदिर से मसà¥à¤œà¤¿à¤¦ कैसे बनी?
बनारस अरà¥à¤¥à¤¾à¤¤ काशी मà¥à¤—़ल आकà¥à¤°à¤¾à¤‚ताओं के हमलों के लिठà¤à¤• टारगेट की à¤à¤¾à¤‚ति रहा है। पà¥à¤°à¤¥à¤® मà¥à¤—़ल आकà¥à¤°à¤®à¤£ मà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤® आकà¥à¤°à¤¾à¤‚ता अहमद नियलà¥à¤¤à¤—ीन ने १०३३ में किया था जिसे महमूद गजनी के बेटे मसूद ने à¤à¤¾à¤°à¤¤ का गवरà¥à¤¨à¤° नियà¥à¤•à¥à¤¤ किया था। अहमद नियलà¥à¤¤à¤—ीन की सेना ने आधे दिन में ही पà¥à¤°à¥‡ बनारस को लूट लिया था। इसके बाद à¤à¥€ मà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤® आकà¥à¤°à¤¾à¤‚ताओं की नजर बनारस पर रही। ११९४ में बनारस के राजा जयचंद को शिहाबà¥à¤¦à¥à¤¦à¥€à¤¨ गोरी उरà¥à¤«à¤¼ मोहमà¥à¤®à¤¦ गोरी जो की अफगान सेना का सेनापति था ने चंदवार के यà¥à¤¦à¥à¤§ में हरा दिया। इस के बाद à¤à¥€ मà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤® हमले जारी रहे। मोहमà¥à¤®à¤¦ गोरी के सेनापति कà¥à¤¤à¥à¤¬à¥à¤¦à¥à¤¦à¥€à¤¨ à¤à¤¬à¤• ने ना सिरà¥à¤« बनारस पर हमला किया बलà¥à¤•ि हजारों हिनà¥à¤¦à¥‚ मंदिरों को तोड़ दिया, जिसमे विशà¥à¤µà¥‡à¤¶à¥à¤µà¤° मंदिर à¤à¥€ शामिल था। कà¥à¤¤à¥à¤¬à¥à¤¦à¥à¤¦à¥€à¤¨ à¤à¤¬à¤• ने विशà¥à¤µà¥‡à¤¶à¥à¤µà¤° मंदिर को तोड़कर उसकी जगह रजिया सà¥à¤²à¥à¤¤à¤¾à¤¨à¤¾ नामक मसà¥à¤œà¤¿à¤¦ बनाई। बनारस को लूट कर १४०० ऊंटों पर लूट का माल ले जाया गया।
१५९१ से १५९६ का समय बनारस के लिठकà¥à¤› रहत लाया जिसमे अकबर से शासन में बनारस में कà¥à¤› मंदिरों का निरà¥à¤®à¤¾à¤£ किया गया। उसी समय आमेर के राजा मान सिंह ने विशà¥à¤µà¥‡à¤¶à¥à¤µà¤° मंदिर को समरà¥à¤ªà¤¿à¤¤ à¤à¤• मंदिर का निरà¥à¤®à¤¾à¤£ करवाया जिसे मान मंदिर का नाम दिया गया। यह मंदिर उसी रजिया सà¥à¤²à¥à¤¤à¤¾à¤¨à¤¾ मसà¥à¤œà¤¿à¤¦ के पास बनाया गया। १५८० में राजा टोडरमल ने जगदà¥à¤—à¥à¤°à¥ नारायण à¤à¤Ÿà¥à¤Ÿ के कहने पर विशà¥à¤µà¥‡à¤¶à¥à¤µà¤° मंदिर का फिर से निरà¥à¤®à¤¾à¤£ फिर से करवाया।
फिर आया मà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤® आकà¥à¤°à¤¾à¤‚ता व लà¥à¤Ÿà¥‡à¤°à¥‡ अलà¥à¤²à¤¾à¤‰à¤¦à¥à¤¦à¥€à¤¨ खिलज़ी का राज, उस के समय में वाराणसी के मंदिरों में पूजा पाठकरने वाले हिनà¥à¤¦à¥‚ पà¥à¤œà¤¾à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ पर मà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤® अधिकारीयों का अतà¥à¤¯à¤¾à¤šà¤¾à¤° शà¥à¤°à¥‚ हà¥à¤† उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने पà¥à¤œà¤¾à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ और पंडितों को परेशान करना व मंदिरों से à¤à¤¾à¤—ना शà¥à¤°à¥‚ किया। इस बात की जानकारी हिनà¥à¤¦à¥‚ पà¥à¤œà¤¾à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ ने अलà¥à¤²à¤¾à¤‰à¤¦à¥à¤¦à¥€à¤¨ खिलज़ी तक पहà¥à¤‚चाई जिस के बाद अलà¥à¤²à¤¾à¤‰à¤¦à¥à¤¦à¥€à¤¨ खिलज़ी ने २८ फरवरी १६५९ को à¤à¤• फरमान जारी किया कि हिनà¥à¤¦à¥‚ पà¥à¤°à¤¾à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को परेशान ना किया जाये। इसके साथ ही साथ उसने फरमान में ये à¤à¥€ आदेश दिया कि आगे से कोई नया हिनà¥à¤¦à¥‚ मंदिर नहीं बनाया जाये।
अलà¥à¤²à¤¾à¤‰à¤¦à¥à¤¦à¥€à¤¨ की यह महानता वाली नौटंकी जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ ना चल पाई और साल १६५९ के अंत में उसने ६ से à¥à¤µà¥€ शताबà¥à¤¦à¥€ पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥‡ कीरà¥à¤¤à¤¿ विशà¥à¤µà¥‡à¤¶à¥à¤µà¤° मंदिर को तोड़ कर गिरा दिया और उसके मलबे से उसी सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर आलमगीर मसà¥à¤œà¤¿à¤¦ का निरà¥à¤®à¤¾à¤£ करवाया। यह आलमगीर मसà¥à¤œà¤¿à¤¦ रतà¥à¤¨à¥‡à¤¶à¥à¤µà¤° मंदिर के बगल में बनवाई गई जहां आज à¤à¥€ निरà¥à¤®à¤¾à¤£ की तारीख की जगह अरबी à¤à¤¾à¤·à¤¾ में १६५९ अंकित है।
साल १९६९ की ९ अपà¥à¤°à¥ˆà¤² की तारीख, उस दिन अलà¥à¤²à¤¾à¤‰à¤¦à¥à¤¦à¥€à¤¨ खिलज़ी ने फिर से à¤à¤• नया फरमान जारी कर बनारस के फौजदार को यह आदेश दिया की बनारस के सà¤à¥€ मंदिर व शिकà¥à¤·à¤£ संसà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥‹à¤‚ को गिरा दिया जाये। इस फरमान के आदेश का पालन करते हà¥à¤ बनारस के फौजदार ने सैकड़ों मंदिर व शिकà¥à¤·à¤£ संसà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥‹à¤‚ को गिरा दिया जिनमे पà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¦à¥à¤¦ काशी विशà¥à¤µà¤¨à¤¾à¤¥ मंदिर व बिंदà¥à¤®à¤¾à¤§à¤µ मंदिर à¤à¥€ शामिल थे। विशà¥à¤µà¤¨à¤¾à¤¥ मंदिर के सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर à¤à¤• मसà¥à¤œà¤¿à¤¦ बनवाई गई जिसमे दो ऊà¤à¤šà¥€ मीनारें बनवाई गई। इसके उपरांत अलà¥à¤²à¤¾à¤‰à¤¦à¥à¤¦à¥€à¤¨ खिलज़ी ने बनारस के नाम को बदल कर मà¥à¤¹à¤®à¥à¤®à¤¦à¤¾à¤¬à¤¾à¤¦ कर दिया था। बाद में वह के सिकà¥à¤•ों पर à¤à¥€ यही नाम अंकित करवाया गया।
यही विशà¥à¤µà¤¨à¤¾à¤¥ मंदिर के सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर बनी मसà¥à¤œà¤¿à¤¦ जà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤µà¤¾à¤ªà¥€ मसà¥à¤œà¤¿à¤¦ के नाम से जानी जाती है। इस पूरी जानकारी को बनारस के डिसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¿à¤• गजेटियर १९६५ में खà¥à¤¦ कांगà¥à¤°à¥‡à¤¸ सरकार ने पà¥à¤°à¤•ाशित करवाया था जो की सरकारी रूप से à¤à¤• पà¥à¤–à¥à¤¤à¤¾ सबूत है इस पà¥à¤°à¥‡ मामले में हिनà¥à¤¦à¥‚ पकà¥à¤· को सही साबित करने के लिà¤à¥¤
इस पà¥à¤°à¥‡ मà¥à¤¦à¥à¤¦à¥‡ पर अदालत का कà¥à¤¯à¤¾ रà¥à¤– रहता है और सरà¥à¤µà¥‡ रिपोरà¥à¤Ÿ आम आदमी को मिलने के बाद देश में कà¥à¤¯à¤¾ माहौल बनता है ये तो समय ही बताà¤à¤—ा।
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