à¤à¤• ओर जहाठदेश की जनता काà¤à¤—à¥à¤°à¥‡à¤¸ की तानाशाही से तà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤ है और आस लगा कर आने वाले चà¥à¤¨à¤¾à¤µ का बेसबà¥à¤°à¥€ से इंतज़ार कर रही है, काà¤à¤—ेस के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ शोषित हो अब जिस राजनीतिक पारà¥à¤Ÿà¥€ को आने वाले पांच साल अपना रकà¥à¤·à¤• मान रही है, वही à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ जनता पारà¥à¤Ÿà¥€ सà¥à¤µà¤¯à¤‚ काà¤à¤—ेस को फिर से आने वाले चà¥à¤¨à¤¾à¤µà¥‹à¤‚ में सतà¥à¤¤à¤¾ सà¥à¤– à¤à¥‹à¤—ने का आमंतà¥à¤°à¤£ देती नजर आ रही है। महंगाई, à¤à¥à¤°à¤·à¥à¤Ÿà¤¾à¤šà¤¾à¤°, बलातà¥à¤•ार, लूट, हतà¥à¤¯à¤¾à¤“ं से परेशान होकर à¤à¤¾à¤œà¤ªà¤¾ पर à¤à¤°à¥‹à¤¸à¤¾ कर रही जनता इस बात से शायद अनजान है की जिन नेताओं के हाथों में आज पारà¥à¤Ÿà¥€ की बागडोर है वही नेता अपने मतलब के लिठपारà¥à¤Ÿà¥€ के मान-समà¥à¤®à¤¾à¤¨ को, देश की à¤à¤• अरब से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ जनता के विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ को दांव पर लगाये बैठे है।
à¤à¤¸à¤¾ नहीं कि सà¤à¥€ नेता à¤à¤• सामान सोच लेकर चल रहे है, लेकिन पारà¥à¤Ÿà¥€ के कà¥à¤› बड़े कद वाले नेता अपनी मरà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ और रà¥à¤¤à¤¬à¥‡ को à¤à¥‚लकर देश के साथ à¤à¤• à¤à¤¸à¤¾ घिनोना मजाक करने में लगे है जिसे आम जनता समठही नहीं पा रही है, या फिर जो कà¥à¤› लोग समठà¤à¥€ रहे है वे उन नेताओं के कद से डरे बैठे है या फिर कà¥à¤› अपना उलà¥à¤²à¥‚ à¤à¥€ सीधा करने में लगे है।
पिछले à¤à¤• साल में पà¥à¤°à¤§à¤¾à¤¨à¤®à¤‚तà¥à¤°à¥€ मनमोहन सिंह से तà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤ जनता ने अपने à¤à¤¾à¤µà¥€ पà¥à¤°à¤§à¤¾à¤¨à¤®à¤‚तà¥à¤°à¥€ के रूप में गà¥à¤œà¤°à¤¾à¤¤ के मà¥à¤–à¥à¤¯à¤®à¤¤à¥à¤°à¥€ को सà¥à¤µà¤¯à¤‚ ही पà¥à¤°à¥‹à¤œà¥‡à¤•à¥à¤Ÿ किया है। और देश को यह खà¥à¤²à¤•र बताया जा रहा है की जनता किसे देश के पà¥à¤°à¤§à¤¾à¤¨à¤®à¤‚तà¥à¤°à¥€ के रूप में देखना चाहती है। à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ जनता पारà¥à¤Ÿà¥€ का हर छोटे से लेकर बड़ा नेता हो या कारà¥à¤¯à¤•रà¥à¤¤à¤¾ इस बात को बहà¥à¤¤ अचà¥à¤›à¥€ तरह से जानता है कि देश की जनता अगले चà¥à¤¨à¤¾à¤µà¥‹à¤‚ में नरेनà¥à¤¦à¥à¤° मोदी को ही देश का पà¥à¤°à¤§à¤¾à¤¨à¤®à¤‚तà¥à¤°à¥€ देखना चाहती है। लेकिन पारà¥à¤Ÿà¥€ के कà¥à¤› आला नेता इस बात से चिनà¥à¤¤à¤¿à¤¤ ही नहीं है बलà¥à¤•ि खà¥à¤²à¤•र जनता की राय का विरोध करते नजर आ रहे है। इसके पीछे जो सबसे बड़ा कारण है वह है सालों से अनà¥à¤¦à¤° दबी पड़ी लालसा ।
सà¤à¥€ जानते है कि à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ जनता पारà¥à¤Ÿà¥€ के शीरà¥à¤· पदों पर बैठे नेता अपनी जिनà¥à¤¦à¤—ी के à¤à¤• बड़े हिसà¥à¤¸à¥‡ को à¤à¤¾à¤œà¤ªà¤¾ के करà¥à¤®à¤ कारà¥à¤¯à¤•रà¥à¤¤à¤¾ के रूप में खपा चà¥à¤•े है और अब वह समय है जहाठवे कà¥à¤› पारतोषिक की इचà¥à¤›à¤¾ रखते है । खासकर वे नेता जो अपनी जिनà¥à¤¦à¤—ी के आखिरी पड़ाव पर है। à¤à¤¸à¥‡ ही नेताओं में से à¤à¤• है लाल कृषà¥à¤£ अडवानी जिनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने ने अपनी जिनà¥à¤¦à¤—ी à¤à¤¾à¤œà¤ªà¤¾ के साथ लगा दी। पहले अटल बिहारी वाजपयी के होने से अडवानी जी को पà¥à¤°à¤§à¤¾à¤¨à¤®à¤‚तà¥à¤°à¥€ की कà¥à¤°à¥à¤¸à¥€ से वंचित रहना पडा, लेकिन अब जब उनका पà¥à¤°à¤§à¤¾à¤¨à¤®à¤‚तà¥à¤°à¥€ बनने का रासà¥à¤¤à¤¾ साफ़ था अचानक देश की जनता ने पलटी खाई और नरेनà¥à¤¦à¥à¤° मोदी का नाम देश के सामने रख दिया । देश की जनता ने ही नरेनà¥à¤¦à¥à¤° मोदी को पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤°à¤¿à¤¤ à¤à¥€ किया और पसंद à¤à¥€ ।
लालकृषà¥à¤£ अडवानी जी के लिठयह बडी विकट सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¥€ थी जहाठउनके जिनà¥à¤¦à¤—ी के à¤à¤• बहà¥à¤¤ बड़े सपने का अंत होता दिखाई दे रहा था। à¤à¤¸à¥‡ समय में यदि अपने करीबी साथ न दे à¤à¤¸à¤¾ कैसे हो सकता है और वह à¤à¥€ तब जब अडवानी जी के साथ करीबी के à¤à¥€ सपने चूर होते दिखाई दे रहे हो। अडवानी  जी की करीबी मानी जाने वाली पारà¥à¤Ÿà¥€ की शीरà¥à¤· महिला नेता जो कि उनके सपने से बखà¥à¤¬à¥€ वाखिफ़ है यह कैसे सहन कर सकती थी। शà¥à¤°à¥€à¤®à¤¤à¥€ सà¥à¤·à¤®à¤¾ सà¥à¤µà¤°à¤¾à¤œ ने बार-बार पà¥à¤°à¥‡à¤¸ कानà¥à¤«à¥à¤°à¥‡à¤‚स में यह कहा कि पà¥à¤°à¤§à¤¾à¤¨à¤®à¤‚तà¥à¤°à¥€ पद के लिठअà¤à¥€ पारà¥à¤Ÿà¥€ सà¥à¤¤à¤° पर कोई फैसला नहीं किया गया है। साथ ही अडवानी जी ने à¤à¥€ खà¥à¤²à¤•र अपनी बात न रख पाने की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में à¤à¤• खतरनाक रासà¥à¤¤à¤¾ पकड़ लिया और लगातार नरेनà¥à¤¦à¥à¤° मोदी के सामने शिवराज सिंह चौहान को खà¥à¤²à¥‡ मंच पर लाने की कोशिश कर रहे है, वे लगातार शिवराज सिंह चौहान को मोदी से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ काबिल साबित करने में लगे है ।
कà¥à¤¯à¤¾ अडवानी की यह कारगà¥à¤œà¤¾à¤°à¥€ पारà¥à¤Ÿà¥€ के नेताओं में फूट डालने की कोशिश नहीं है? अडवानी इस पà¥à¤°à¤•ार कà¥à¤¯à¤¾ साबित करना चाहते है, कà¥à¤¯à¤¾ पारà¥à¤Ÿà¥€ और उनकी राय देश की जनता की राय से à¤à¥€ बड़ी हो गई है या इस तरह वे काà¤à¤—à¥à¤°à¥‡à¤¸ को सतà¥à¤¤à¤¾ का गिफà¥à¤Ÿ देना चाहते है जिससे नरेनà¥à¤¦à¥à¤° मोदी का पà¥à¤°à¤§à¤¾à¤¨à¤®à¤¤à¥à¤°à¥€ बनने का रासà¥à¤¤à¤¾ अपने आप ही बंद हो जायेगा और देश की जनता का सपना à¤à¥€ टूट जायेगा। कà¥à¤¯à¤¾ अपने सपने टूटने का इतना बड़ा बदला पूरे देश के साथ सही है? आखिर जनता की मांग पर नरेनà¥à¤¦à¥à¤° मोदी को पà¥à¤°à¤§à¤¾à¤¨à¤®à¤‚तà¥à¤°à¥€ बनाने में कà¥à¤¯à¤¾ परेशानी है, जबकि इस कदम से à¤à¤¾à¤œà¤ªà¤¾ के चà¥à¤¨à¤¾à¤µà¥‹à¤‚ में à¤à¤• बड़ी जीत के रासà¥à¤¤à¥‡ अपने आप खà¥à¤² जायेंगे, यहाठतक कि काà¤à¤—ेस à¤à¥€ जिस नरेनà¥à¤¦à¥à¤° मोदी से डरी बैठी है और राहà¥à¤² गांधी तक को बेकफà¥à¤Ÿ पर लाने पर मजबूर हो चà¥à¤•ी है। फिर कà¥à¤› à¤à¤¾à¤œà¤ªà¤¾ नेताओं को कà¥à¤¯à¤¾ परेशानी हो सकती है? कहीं इसके पीछे à¤à¥€ कà¥à¤°à¤¿à¤•ेट की तरह कोई फिकà¥à¤¸à¤¿à¤‚ग तो नहीं?
ये सब अब जनता के हाथ में है किसे सतà¥à¤¤à¤¾ में लाना है किसे नहीं। वैसे किसी इंसान को बार बार समà¤à¤¾à¤¨à¤¾ जरà¥à¤°à¥€ नहीं देश की जनता किसी जानवर की तरह तो है नहीं की बार बार लाठी खाने के बाद à¤à¥€ उसी खेत में फिर से लाठी खाने घà¥à¤¸ जायेंगे ।
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