हिंदू धरà¥à¤® में गंगा नदी को केवल जलधारा नहीं, बलà¥à¤•ि देवी सà¥à¤µà¤°à¥‚प ‘मां गंगा’ के रूप में पूजा जाता है। मानà¥à¤¯à¤¤à¤¾ है कि गंगा के पवितà¥à¤° जल में सà¥à¤¨à¤¾à¤¨ करने से जीवन की कठिनाइयाठदूर होती हैं, पाप नषà¥à¤Ÿ होते हैं और आतà¥à¤®à¤¾ को आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• शांति मिलती है। इसलिठगंगा को “मोकà¥à¤·à¤¦à¤¾à¤¯à¤¿à¤¨à¥€â€ और “जीवनदायिनी” कहा गया है।
गंगा à¤à¤¾à¤°à¤¤, नेपाल और बांगà¥à¤²à¤¾à¤¦à¥‡à¤¶ से होकर लगà¤à¤— 2525 किलोमीटर की लंबी यातà¥à¤°à¤¾ करती है। यह केवल सà¥à¤µà¤šà¥à¤› और शà¥à¤¦à¥à¤§ जल का पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤• नहीं है, बलà¥à¤•ि à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ संसà¥à¤•ृति और आसà¥à¤¥à¤¾ का आधार à¤à¥€ है। वेदों और पà¥à¤°à¤¾à¤£à¥‹à¤‚ में गंगा माता का बार-बार उलà¥à¤²à¥‡à¤– मिलता है। विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ है कि गंगा सà¥à¤¨à¤¾à¤¨ से न केवल इस जनà¥à¤® के, बलà¥à¤•ि पूरà¥à¤µ जनà¥à¤®à¥‹à¤‚ के पाप à¤à¥€ नषà¥à¤Ÿ हो जाते हैं।
गंगा नदी के किनारे बसे नगरों के लिठयह जलापूरà¥à¤¤à¤¿ का मà¥à¤–à¥à¤¯ सà¥à¤°à¥‹à¤¤ है। कृषि, परà¥à¤¯à¤Ÿà¤¨ और जीवनोपयोगी कारà¥à¤¯à¥‹à¤‚ के लिठगंगा का योगदान अमूलà¥à¤¯ है। वैजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¿à¤• शोध बताते हैं कि गंगा जल में à¤à¤¸à¥‡ गà¥à¤£ पाठजाते हैं, जो हानिकारक जीवाणà¥à¤“ं को नषà¥à¤Ÿ कर देते हैं। यही कारण है कि इसे सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ की दृषà¥à¤Ÿà¤¿ से à¤à¥€ अमृत तà¥à¤²à¥à¤¯ माना गया है।
गंगा नदी को à¤à¤¾à¤—ीरथी कहा जाता है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ समय के राजा à¤à¤—ीरथ ने अपने पूरà¥à¤µà¤œà¥‹à¤‚ की मà¥à¤•à¥à¤¤à¤¿ के लिठकठोर तपसà¥à¤¯à¤¾ की थी, जिससे पà¥à¤°à¤¸à¤¨à¥à¤¨ होकर गंगा देवी सà¥à¤µà¤°à¥à¤— से पृथà¥à¤µà¥€ पर अवतरित हà¥à¤ˆà¤‚। राजा à¤à¤—ीरथ की दृढ़ इचà¥à¤›à¤¾à¤¶à¤•à¥à¤¤à¤¿ और अनवरत तप के फलसà¥à¤µà¤°à¥‚प ही गंगा मां का पृथà¥à¤µà¥€ पर आगमन संà¤à¤µ हो सका, और उनके पीछे बहने वाली धारा को “à¤à¤¾à¤—ीरथी” नाम दिया गया।
इस कथा के अनà¥à¤¸à¤¾à¤°, बà¥à¤°à¤¹à¥à¤®à¤¾ जी और à¤à¤—वान शिव की कृपा से गंगा का वेग पृथà¥à¤µà¥€ पर नियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ किया गया, जिससे उसका जल धरती पर बह पाया। राजा à¤à¤—ीरथ के पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸à¥‹à¤‚ की सà¥à¤®à¥ƒà¤¤à¤¿ में गंगा जी की हिमालयी धारा को “à¤à¤¾à¤—ीरथी” कहा जाता है, जो देवपà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤— में अलकनंदा से मिलकर आगे गंगा नदी के रूप में पà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¹à¤¿à¤¤ होती है।
गंगा नदी का उदà¥à¤—म उतà¥à¤¤à¤°à¤¾à¤–ंड के गढ़वाल कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ गंगोतà¥à¤°à¥€ हिमनद (गोमà¥à¤–) से होता है। यह अतà¥à¤¯à¤‚त पवितà¥à¤° सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ है, जहाठमां गंगा को समरà¥à¤ªà¤¿à¤¤ पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ मंदिर सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¿à¤¤ है। गंगोतà¥à¤°à¥€ को तीरà¥à¤¥ सà¥à¤¥à¤² के रूप में विशेष शà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾ पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ है।
गंगा के उदà¥à¤—म की कथा हमारे पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ पà¥à¤°à¤¾à¤£à¥‹à¤‚ और धरà¥à¤®à¤—à¥à¤°à¤‚थों में विसà¥à¤¤à¤¾à¤° से वरà¥à¤£à¤¿à¤¤ है। इनà¥à¤¹à¥€à¤‚ कथाओं के कारण गंगोतà¥à¤°à¥€ और गोमà¥à¤– का कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° धारà¥à¤®à¤¿à¤• आसà¥à¤¥à¤¾ का पà¥à¤°à¤®à¥à¤– केंदà¥à¤° माना जाता है। यह सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पà¥à¤°à¤•ृति की अदà¥à¤à¥à¤¤ सà¥à¤‚दरता, à¤à¤•à¥à¤¤à¤¿ और अधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤® का संगम है।
इस कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में छह बड़ी धाराà¤à¤ और उनकी पाà¤à¤š सहायक धाराà¤à¤ मिलकर गंगा का सà¥à¤µà¤°à¥‚प बनाती हैं। इन धाराओं का न केवल à¤à¥Œà¤—ोलिक, बलà¥à¤•ि सांसà¥à¤•ृतिक महतà¥à¤µ à¤à¥€ अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• है। आगे चलकर गंगा यमà¥à¤¨à¤¾, कोसी, गंडक और घाघरा जैसी पà¥à¤°à¤®à¥à¤– नदियों से मिलकर और à¤à¥€ विराट रूप धारण करती है।
“पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤—” शबà¥à¤¦ का तातà¥à¤ªà¤°à¥à¤¯ पवितà¥à¤° नदियों के संगम से है, और उतà¥à¤¤à¤°à¤¾à¤–ंड में सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ पाà¤à¤š पà¥à¤°à¤®à¥à¤– पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤— हिंदू धरà¥à¤® में अतà¥à¤¯à¤‚त शà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾ के साथ पूजित होते हैं। इन पांचों सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥‹à¤‚ पर अलकनंदा नदी विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ सहायक नदियों से मिलती है, जिससे इनके धारà¥à¤®à¤¿à¤• और आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• महतà¥à¤µ को और अधिक गहराई मिलती है।
पंच पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤— की यातà¥à¤°à¤¾ तीरà¥à¤¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के लिठà¤à¤• विशेष आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• अनà¥à¤à¤µ मानी जाती है, जिसमें पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤— में सà¥à¤¨à¤¾à¤¨ और धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ कर मोकà¥à¤· की कामना की जाती है।
गंगा और उसकी सहायक नदियों के ये संगम सà¥à¤¥à¤² दिवà¥à¤¯à¤¤à¤¾ के केंदà¥à¤° हैं, जहां माना जाता है कि सà¥à¤¨à¤¾à¤¨ करने से पापों का नाश होता है, और आतà¥à¤®à¤¾ शà¥à¤¦à¥à¤§ होकर मोकà¥à¤· के निकट पहà¥à¤à¤šà¤¤à¥€ है।
हिंदू कथा के अनà¥à¤¸à¤¾à¤°, देवी गंगा जब पृथà¥à¤µà¥€ पर आईं तो उनकी शकà¥à¤¤à¤¿ इतनी पà¥à¤°à¤¬à¤² थी कि à¤à¤—वान शिव ने उसे अपनी जटाओं में समाहित किया और धीरे-धीरे पृथà¥à¤µà¥€ पर वितरित किया। पà¥à¤°à¤¾à¤£à¥‹à¤‚ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤°, देवपà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤— तक ये धाराà¤à¤ मारà¥à¤— में अलग-अलग जगहों पर मिलती रहीं, और अंततः देवपà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤— में à¤à¤¾à¤—ीरथी व अलकनंदा का संगम होने के बाद इसे “गंगा” कहा गया। देवपà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤— को पंच पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤—ों का अंतिम और अतà¥à¤¯à¤‚त महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ संगम सà¥à¤¥à¤² माना जाता है।
बदà¥à¤°à¥€à¤¨à¤¾à¤¥ यातà¥à¤°à¤¾ मारà¥à¤— पर सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ पंच पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤—ों से कई पौराणिक कथाà¤à¤ और धारà¥à¤®à¤¿à¤• कथानक à¤à¥€ जà¥à¤¡à¤¼à¥‡ हà¥à¤ हैं, जिससे इनका महतà¥à¤µ और बढ़ जाता है।
नीचे उतà¥à¤¤à¤°à¤¾à¤–ंड के पंच पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤—ों का कà¥à¤°à¤®à¤µà¤¾à¤° विवरण है:
विषà¥à¤£à¥à¤ªà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤—: यहाठधौलीगंगा अलकनंदा में मिलती है।
नंदपà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤—: इस सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर नंदाकिनी और अलकनंदा का संगम सà¥à¤¥à¤² है।
करà¥à¤£à¤ªà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤—: इस सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर पिंडर और अलकनंदा का मिलन होता है।
रà¥à¤¦à¥à¤°à¤ªà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤—: यहाठमंदाकिनी और अलकनंदा का संगम है।
देवपà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤—: à¤à¤¾à¤—ीरथी और अलकनंदा का मिलन यहाठहोता है, जिससे पवितà¥à¤° गंगा नदी की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ मानी जाती है।
हर पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤— अपने आप में आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• शकà¥à¤¤à¤¿ और पौराणिक कथाओं से समृदà¥à¤§ है, जो गंगा यातà¥à¤°à¤¾ को दिवà¥à¤¯à¤¤à¤¾ और शà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾ से à¤à¤° देता है।
हिंदू धरà¥à¤®à¤—à¥à¤°à¤‚थों में मां गंगा के उदà¥à¤—म से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ अनेक कथाà¤à¤ मिलती हैं। इनमें से à¤à¤• पà¥à¤°à¤®à¥à¤– कथा राजा बलि और à¤à¤—वान विषà¥à¤£à¥ के वामन अवतार से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ है।
कथा के अनà¥à¤¸à¤¾à¤°, असà¥à¤°à¤°à¤¾à¤œ बलि ने अपने पराकà¥à¤°à¤® और तपसà¥à¤¯à¤¾ से à¤à¤—वान विषà¥à¤£à¥ को पà¥à¤°à¤¸à¤¨à¥à¤¨ किया और पृथà¥à¤µà¥€ लोक पर अपना अधिकार जमा लिया। धीरे-धीरे वह सà¥à¤µà¤¯à¤‚ को à¤à¤—वान समà¤à¤¨à¥‡ लगा और अहंकार में चूर होकर देवराज इंदà¥à¤° को यà¥à¤¦à¥à¤§ के लिठललकार बैठा। जब सà¥à¤µà¤°à¥à¤— पर संकट मंडराने लगा, तो इंदà¥à¤° ने à¤à¤—वान विषà¥à¤£à¥ से रकà¥à¤·à¤¾ की पà¥à¤°à¤¾à¤°à¥à¤¥à¤¨à¤¾ की।
तà¤à¥€ à¤à¤—वान विषà¥à¤£à¥ ने वामन अवतार धारण किया। उस समय राजा बलि अपने राजà¥à¤¯ की सà¥à¤–-समृदà¥à¤§à¤¿ के लिठअशà¥à¤µà¤®à¥‡à¤§ यजà¥à¤ž कर रहा था, जिसमें विशाल बà¥à¤°à¤¾à¤¹à¥à¤®à¤£ à¤à¥‹à¤œ और दान-दकà¥à¤·à¤¿à¤£à¤¾ का आयोजन था। इसी यजà¥à¤ž में à¤à¤—वान विषà¥à¤£à¥ वामन बà¥à¤°à¤¾à¤¹à¥à¤®à¤£ के रूप में पहà¥à¤à¤šà¥‡à¥¤
राजा बलि ने वामन देवता को देखकर उनका समà¥à¤®à¤¾à¤¨ किया और दान मांगने को कहा। वामन à¤à¤—वान ने मà¥à¤¸à¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤•र केवल तीन पग à¤à¥‚मि का दान माà¤à¤—ा। बलि सहज ही तैयार हो गया। तà¤à¥€ à¤à¤—वान वामन ने अपना विराट सà¥à¤µà¤°à¥‚प धारण कर लिया-
अब तीसरे पग के लिठसà¥à¤¥à¤¾à¤¨ न बचा। तब राजा बलि ने विनमà¥à¤° होकर अपना सिर आगे बढ़ा दिया और कहा-“à¤à¤—वान, तीसरा पग आप मेरे शीश पर रख दें।†à¤à¤—वान ने à¤à¤¸à¤¾ ही किया और बलि पाताल लोक में समा गया।
इसी समय जब à¤à¤—वान विषà¥à¤£à¥ ने दूसरा पग आकाश की ओर उठाया था, तब बà¥à¤°à¤¹à¥à¤®à¤¾ जी ने उनके चरण धोà¤à¥¤ उनà¥à¤¹à¥€à¤‚ चरणों से निकले पवितà¥à¤° जल को बà¥à¤°à¤¹à¥à¤®à¤¾ जी ने अपने कमंडल में संजो लिया। यही पवितà¥à¤° जल आगे चलकर मां गंगा के रूप में पà¥à¤°à¤•ट हà¥à¤†à¥¤ बाद में बà¥à¤°à¤¹à¥à¤®à¤¾ जी ने गंगा को परà¥à¤µà¤¤à¤°à¤¾à¤œ हिमालय को पà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ रूप में सौंप दिया।
पौराणिक कथाओं में वरà¥à¤£à¤¨ मिलता है कि पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ काल में राजा सगर नामक पà¥à¤°à¤¤à¤¾à¤ªà¥€ शासक ने अपने सामà¥à¤°à¤¾à¤œà¥à¤¯ का विसà¥à¤¤à¤¾à¤° करने के उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ से अशà¥à¤µà¤®à¥‡à¤§ यजà¥à¤ž का आयोजन किया। इस यजà¥à¤ž के नियम अनà¥à¤¸à¤¾à¤°, यजà¥à¤ž का घोड़ा जिस à¤à¥€ पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ से गà¥à¤œà¤°à¤¤à¤¾, वह राजà¥à¤¯ उस यजमान का हो जाता। यही कारण था कि जब घोड़े के सà¥à¤µà¤°à¥à¤—लोक में जाने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ हà¥à¤ˆ, तो देवराज इंदà¥à¤° चिंतित हो उठे। उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ à¤à¤¯ हà¥à¤† कि कहीं राजा सगर सà¥à¤µà¤°à¥à¤— पर à¤à¥€ अधिकार न जमा लें।
इस चिंता से वà¥à¤¯à¤¾à¤•à¥à¤² होकर इंदà¥à¤° ने घोड़े को चोरी-छिपे उठाया और कपिल मà¥à¤¨à¤¿ के आशà¥à¤°à¤® में बाà¤à¤§ दिया। उस समय कपिल मà¥à¤¨à¤¿ गहन धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ में लीन थे। जब घोड़े के लापता होने का समाचार राजा सगर तक पहà¥à¤à¤šà¤¾ तो उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कà¥à¤°à¥‹à¤§à¤¿à¤¤ होकर अपने साठहजार पà¥à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ को उसकी खोज में à¤à¥‡à¤œà¤¾à¥¤ घोड़े को कपिल मà¥à¤¨à¤¿ के आशà¥à¤°à¤® में देखकर उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने à¤à¥à¤°à¤¾à¤‚ति में आकर मà¥à¤¨à¤¿ को ही चोर समठलिया और उन पर आकà¥à¤°à¤®à¤£ करने लगे।
धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ à¤à¤‚ग होने पर जब कपिल मà¥à¤¨à¤¿ बाहर आठऔर उन पर à¤à¥‚ठा आरोप सà¥à¤¨à¤¾, तो वे कà¥à¤°à¥‹à¤§ से à¤à¤° उठे। उनके शाप से राजा सगर के सà¤à¥€ पà¥à¤¤à¥à¤° वहीं à¤à¤¸à¥à¤® हो गठऔर बिना अंतिम संसà¥à¤•ार के पà¥à¤°à¥‡à¤¤ योनि में à¤à¤Ÿà¤•ने लगे।
बाद में सगर की दूसरी पतà¥à¤¨à¥€ के पà¥à¤¤à¥à¤° अंशà¥à¤®à¤¾à¤¨ घोड़े की खोज में कपिल मà¥à¤¨à¤¿ के आशà¥à¤°à¤® पहà¥à¤à¤šà¥‡à¥¤ अंशà¥à¤®à¤¾à¤¨ अपने à¤à¤¾à¤‡à¤¯à¥‹à¤‚ की à¤à¤¸à¥à¤® को देखकर व उनके पà¥à¤°à¥‡à¤¤ योनि में à¤à¤Ÿà¤•ने की जानकारी पाकर वà¥à¤¯à¤¥à¤¿à¤¤ हà¥à¤à¥¤ उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कपिल मà¥à¤¨à¤¿ को पà¥à¤°à¤¸à¤¨à¥à¤¨ कर अपने à¤à¤¾à¤‡à¤¯à¥‹à¤‚ की आतà¥à¤®à¤¾à¤“ं के मोकà¥à¤· का समाधान पूछा। कपिल मà¥à¤¨à¤¿ ने कहा कि उनके à¤à¤¸à¥à¤® हà¥à¤ पूरà¥à¤µà¤œ तà¤à¥€ मà¥à¤•à¥à¤¤ होंगे, जब सà¥à¤µà¤°à¥à¤— से गंगा पृथà¥à¤µà¥€ पर अवतरित होकर उनकी असà¥à¤¥à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को सà¥à¤ªà¤°à¥à¤¶ करेगी। अंशà¥à¤®à¤¾à¤¨ घोड़ा लेकर लौटे, राजा सगर ने यजà¥à¤ž पूरा किया तथा राज तà¥à¤¯à¤¾à¤— कर सनà¥à¤¯à¤¾à¤¸ गà¥à¤°à¤¹à¤£ कर लिया। उनके बाद उनके पà¥à¤¤à¥à¤° अंशà¥à¤®à¤¾à¤¨ राजा बने, उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने अपने अपने à¤à¤¾à¤‡à¤¯à¥‹à¤‚ को मोकà¥à¤· दिलाने हेतॠकठोर तपसà¥à¤¯à¤¾ की जिससे वह गंगा को धरती पर ला सके। किनà¥à¤¤à¥ राजा अंशà¥à¤®à¤¾à¤¨ गंगा को धरती पर लाने का संकलà¥à¤ª पूरा नहीं कर सके।
इसके बाद अंशà¥à¤®à¤¾à¤¨ के पà¥à¤¤à¥à¤° दिलीप ने जीवन à¤à¤° गंगा के अवतरण के लिठतप किया, लेकिन सफलता उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ à¤à¥€ नहीं मिली। अंततः उनके पà¥à¤¤à¥à¤° à¤à¤—ीरथ ने कठोर तपसà¥à¤¯à¤¾ कर à¤à¤—वान विषà¥à¤£à¥ को पà¥à¤°à¤¸à¤¨à¥à¤¨ किया। à¤à¤—ीरथ ने उनसे पà¥à¤°à¤¾à¤°à¥à¤¥à¤¨à¤¾ की कि गंगा माता पृथà¥à¤µà¥€ पर अवतरित हों, ताकि उनके पूरà¥à¤µà¤œà¥‹à¤‚ की आतà¥à¤®à¤¾ को शांति मिल सके।
गंगा माता ने धरती पर आने की सà¥à¤µà¥€à¤•ृति तो दी, किंतॠयह शरà¥à¤¤ रखी कि वे पà¥à¤°à¤šà¤‚ड वेग से उतरेंगी और अपने पà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¹ में सब कà¥à¤› बहा देंगी। यह सà¥à¤¨à¤•र देवता à¤à¥€ चिंतित हो गà¤à¥¤ तब à¤à¤—वान विषà¥à¤£à¥ ने समाधान के लिठà¤à¤—वान शंकर से पà¥à¤°à¤¾à¤°à¥à¤¥à¤¨à¤¾ की। महादेव ने आशà¥à¤µà¤¾à¤¸à¤¨ दिया कि वे गंगा के वेग को अपनी जटाओं में समाहित कर लेंगे।
अंततः गंगा माता सà¥à¤µà¤°à¥à¤— से अवतरित हà¥à¤ˆà¤‚ और à¤à¤—वान शंकर ने उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ अपनी जटाओं में धारण कर धीरे-धीरे पृथà¥à¤µà¥€ पर पà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¹à¤¿à¤¤ किया। तà¤à¥€ से मां गंगा धरती पर बहने लगीं और मोकà¥à¤· तथा पवितà¥à¤°à¤¤à¤¾ का सà¥à¤°à¥‹à¤¤ बन गईं।
मां गंगा का उलà¥à¤²à¥‡à¤– केवल पà¥à¤°à¤¾à¤£à¥‹à¤‚ में ही नहीं, बलà¥à¤•ि अनेक धरà¥à¤®à¤—à¥à¤°à¤‚थों, सà¥à¤¤à¥‹à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ और à¤à¤•à¥à¤¤à¤•वियों की रचनाओं में à¤à¥€ मिलता है। गंगा की पावन धारा को देवताओं, ऋषियों और कवियों ने समान à¤à¤¾à¤µ से मोकà¥à¤·à¤¦à¤¾à¤¯à¤¿à¤¨à¥€ और पापहरिणी कहा है।
à¤à¤• अनà¥à¤¯ कथा के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° जब गंगा ने शिव के समकà¥à¤· जाकर यह आगà¥à¤°à¤¹ किया कि वह उनसे विवाह कर उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ अपनी पतà¥à¤¨à¥€ बना ले, तब माता पारà¥à¤µà¤¤à¥€ ने उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ समà¤à¤¾à¤¨à¥‡ की कोशिश की। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने गंगा को कहा की तà¥à¤® मेरी बहन हो अतः तà¥à¤¨à¥à¤¹à¥‡ इस रिशà¥à¤¤à¥‡ की मरà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ का पालन करना चाहिà¤à¥¤ किनà¥à¤¤à¥ अहंकार में गंगा ने पारà¥à¤µà¤¤à¥€ माता को कहा कि à¤à¤—वन शिव के साथ सदा मैं ही रहती हूà¤à¥¤ à¤à¤—वान शिव की जटा में मैं सदा उनके साथ रहती हूठ, तथा ये जहां à¤à¥€ जाते है मà¥à¤à¥‡ साथ ही रखते है। इसलिठइनà¥à¤¹à¥‡ मà¥à¤à¥‡ पतà¥à¤¨à¥€ रूप में सà¥à¤µà¥€à¤•ार करना चाहिà¤à¥¤ इस बात से पारà¥à¤µà¤¤à¥€ माता कà¥à¤°à¥‹à¤§à¤¿à¤¤ हà¥à¤ˆ तथा उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने गंगा को शà¥à¤°à¤¾à¤ª दिया की सदा तेरी धाराओं में मृत देह बहेगी, गंगा सदा मनà¥à¤·à¥à¤¯ के बà¥à¤°à¥‡ करà¥à¤®à¥‹ के पापों को धोते धोते मैली और काली हो जाà¤à¤—ी।
इस शà¥à¤°à¤¾à¤ª से डर कर गंगा ने à¤à¤—वान शिव व पारà¥à¤µà¤¤à¥€ से अपने किये की माफ़ी मांगी। à¤à¤—वान शिव ने गंगा की कà¥à¤·à¤®à¤¾ याचना से पà¥à¤°à¤¸à¤¨à¥à¤¨ हो कहा, पारà¥à¤µà¤¤à¥€ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ दिया शà¥à¤°à¤¾à¤ª तो फलित होगा तथा सदा गंगा को अपनी धाराओं में मनà¥à¤·à¥à¤¯ के पाप धोने होंगे। परनà¥à¤¤à¥ गंगा नदी में बहाये जाने वाली मृत देह व असà¥à¤¥à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को मोकà¥à¤· का मारà¥à¤— सà¥à¤—म होगा। गंगा पापों से मैली तो होगी किनà¥à¤¤à¥ साधॠ– संतों के सà¥à¤¨à¤¾à¤¨ करने से वह मैल धूल जायेंगे व गंगा सदा सà¥à¤µà¤šà¥à¤› व पवितà¥à¤° बनी रहेगी।
महरà¥à¤·à¤¿ वालà¥à¤®à¥€à¤•ि की रचना गंगाषà¥à¤Ÿà¤• में गंगा जल की पवितà¥à¤°à¤¤à¤¾ और उसके दिवà¥à¤¯ सà¥à¤°à¥‹à¤¤ का वरà¥à¤£à¤¨ इस पà¥à¤°à¤•ार किया गया है-
गांग वारि मनोहारि मà¥à¤°à¤¾à¤°à¤¿-चरणचà¥à¤¯à¥à¤¤à¤®à¥à¥¤
तà¥à¤°à¤¿à¤ªà¥à¤°à¤¾à¤°à¤¿-शिरशà¥à¤šà¤¾à¤°à¤¿ पापहारि पà¥à¤¨à¤¾à¤¤à¥ मामà¥à¥¥
इसी पà¥à¤°à¤•ार आदि शंकराचारà¥à¤¯ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ रचित गंगाषà¥à¤Ÿà¤• में गंगा माता को समसà¥à¤¤ लोकों का उदà¥à¤§à¤¾à¤° करने वाली और à¤à¤—वान शंकर की जटाओं में निवास करने वाली कहा गया है-
देवि सà¥à¤°à¥‡à¤¶à¥à¤µà¤°à¤¿ à¤à¤—वति गंगे तà¥à¤°à¤¿à¤à¥à¤µà¤¨-तारिणि तरलतरंगे।
शङà¥à¤•र-मौलि-विहारिणि विमले मम मतिरासà¥à¤¤à¤¾à¤‚ तव पद-कमले॥
गीतगोविनà¥à¤¦ में दशावतार में जयदेव ने वामन अवतार का वरà¥à¤£à¤¨ करते हà¥à¤ गंगा की उतà¥à¤ªà¤¤à¥à¤¤à¤¿ के बारे में लिखा है –
पदन खनीर जनित जन पावन।
केशव धृत वामन रूप जय जगदीश हरे॥
मनà¥à¤¸à¥à¤®à¥ƒà¤¤à¤¿ (8/92) में गंगा को धरà¥à¤® और सतà¥à¤¯ की साकà¥à¤·à¥€ माना गया है, जहाठकहा गया है –
“माठगंगा माठकà¥à¤°à¥à¤¨à¥ गमः”
à¤à¤•à¥à¤¤ कवि विदà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¤¤à¤¿ ने तो गंगा को माता के रूप में वरà¥à¤£à¤¿à¤¤ करते हà¥à¤ अपने à¤à¤¾à¤µ में गंगा सà¥à¤¨à¤¾à¤¨ के समय अपने चरणों के गंगा के पवितà¥à¤° जल को सà¥à¤ªà¤°à¥à¤¶ करने पर अपराध – बोध में विनमà¥à¤° रूप से यह कहा है कि –
“à¤à¤• अपराध घमब मोर जानी। परमल माठपाठतà¥à¤® पानी।।”
यहाठतक कि तानसेन तथा मà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤® कवी रहीम आदि ने à¤à¥€ गंगा की à¤à¤¾à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ सà¥à¤¤à¥à¤¤à¤¿ की है। रहीम लिखते हैं –
अचà¥à¤¯à¥à¤¤ चरन तरंगिनी, सिव सिर मालति माल।
हरि न बनाओ सà¥à¤°à¤¸à¤°à¥€, कीजौ इंदव-à¤à¤¾à¤²à¥¤à¥¤
वहीं तानसेन कहते हैं –
ईस सीस मध विराजत तà¥à¤°à¤ˆ पावन किà¤,
जीव जनà¥à¤¤à¥ खग मृग सà¥à¤° नर मà¥à¤¨à¤¿ मानी।
तानसेन पà¥à¤°à¤à¥ तेरो असà¥à¤¤à¥à¤¤ करता दाता,
à¤à¤•à¥à¤¤ जनन की मà¥à¤•à¥à¤¤à¤¿ की बरदानी।।
इन सà¤à¥€ पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£à¥‹à¤‚ से सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ है कि गंगा केवल à¤à¤• नदी नहीं, बलà¥à¤•ि धरà¥à¤®, सतà¥à¤¯, आसà¥à¤¥à¤¾ और à¤à¤•à¥à¤¤à¤¿ की सरà¥à¤µà¥‹à¤šà¥à¤š धारा है, जिसका उलà¥à¤²à¥‡à¤– पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ ऋषियों से लेकर à¤à¤•à¥à¤¤à¤•वियों तक ने समान शà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾ के साथ किया है।
इस पà¥à¤°à¤•ार गंगा केवल à¤à¤• नदी नहीं, बलà¥à¤•ि à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ संसà¥à¤•ृति, आसà¥à¤¥à¤¾ और जीवन का आधार है। गंगोतà¥à¤°à¥€ से शà¥à¤°à¥‚ होने वाली यह धारा आज à¤à¥€ करोड़ों लोगों के लिठपà¥à¤°à¥‡à¤°à¤£à¤¾ और मोकà¥à¤· का मारà¥à¤— बनी हà¥à¤ˆ है।
I am Gagan Singh Shekhawat, a renowned online marketer with extensive experience and expertise in internet marketing. Beyond my professional career, I have always carried a deep desire to unfold the majestic and mystical glory of India and share it with the world. From this vision, the foundation of ‘Our Society’ was born-an initiative that is truly my brainchild.
Through Our Society, I strive to cover every aspect of India’s identity-be it social, cultural, political, or historical-leaving no stone unturned. I firmly believe in the power of blogging to inspire and create impact, and with this belief, I introduced the unique concept of Our Society to help people discover and experience the magnificent heritage and essence of India.
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