बांकावती लिवाण के कछवाहा राजा आननà¥à¤¦à¤°à¤¾à¤¯ की पà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ थी। इसका विवाह किशनगढ़ के महाराजा राजसिंह के साथ हà¥à¤†à¥¤ बचपन से ही यह कावà¥à¤¯à¤¾à¤¨à¥à¤°à¤¾à¤—ी व कृषà¥à¤£à¤à¤•à¥à¤¤ थी। रानी बांकावती अपने आराधà¥à¤¯ की à¤à¤•à¥à¤¤à¤¿ à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ में सदा निमगà¥à¤¨ रहा करती थी। उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ बृजदासी रानी बांकावती तथा बृजकà¥à¤à¤µà¤¾à¤°à¥€ बांकावती के नाम से à¤à¥€ जाना जाता है। बांकावती ने शà¥à¤°à¥€à¤®à¤¦à¥à¤à¤¾à¤—वत का छनà¥à¤¦à¥‹à¤¬à¤¦à¥à¤§ अनà¥à¤µà¤¾à¤¦ राजसà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥€ à¤à¤¾à¤·à¤¾ में किया जो ‘बà¥à¤°à¤œà¤¦à¤¾à¤¸à¥€ à¤à¤¾à¤—वत’ के नाम से पà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¦à¥à¤§ है। à¤à¤¾à¤—वत का यह à¤à¤¾à¤·à¤¾à¤¨à¥à¤µà¤¾à¤¦ अतà¥à¤¯à¤¨à¥à¤¤ सरल व सहज रूप में पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤ किया गया है और आम पाठक के शीघà¥à¤° समठमें आने वाला है।
बà¥à¤°à¤œà¤¦à¤¾à¤¸à¥€ à¤à¤¾à¤—वत में पà¥à¤°à¤¾à¤°à¤®à¥à¤ के मंगलाचरण में विविध देवताओं और ऋषियों को नमन करने के पशà¥à¤šà¤¾à¤¤à¥ गà¥à¤°à¥ को वंदन इस पà¥à¤°à¤•ार किया गया है –
शà¥à¤°à¥€ गà¥à¤°à¥à¤ªà¤¦ बंदन करू, पà¥à¤°à¤¥à¤®à¤¹à¤¿ करू उछाह।
दमà¥à¤ªà¤¤à¤¿ गà¥à¤°à¥ तिहà¥à¤‚ की कृपा, करो सकल मो चाह।
बार बार बंदन करौं, शà¥à¤°à¥€ वृषà¤à¤¾à¤¨ कà¥à¤®à¤¾à¤°à¤¿à¥¤
जय जय शà¥à¤°à¥€ गोपाल जू, कीजै कृपा मà¥à¤°à¤¾à¤°à¤¿à¥¥
मंगलाचरण के वंदन के पशà¥à¤šà¤¾à¤¤à¥ à¤à¤¾à¤—वत के संपूरà¥à¤£ कथा पà¥à¤°à¤¸à¤‚गों को à¤à¥€ चौपाई और दोहा छनà¥à¤¦ के माधà¥à¤¯à¤® से अनूदित किया है। à¤à¤•à¥à¤¤à¤¿ के सरल मारà¥à¤— का अनà¥à¤¸à¤°à¤£ करते हà¥à¤ लोग इस तà¥à¤°à¤¿à¤µà¤¿à¤§ संतापों से मà¥à¤•à¥à¤¤à¤¿ पा सकते हैं। बहà¥à¤¤ ही सरल उदाहरणों दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ यह बात बà¥à¤°à¤œà¤¦à¤¾à¤¸à¥€ à¤à¤¾à¤—वत में समà¤à¤¾à¤¯à¥€ हà¥à¤ˆ है।
परम पà¥à¤°à¥‡à¤® परमेशà¥à¤µà¤° सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€,
हम तिय धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ धरत हिय ठामी।
यहै तà¥à¤°à¤¿à¤µà¤¿à¤§ à¤à¥‚ठौ संसारा,
à¤à¤¾à¤‚ति à¤à¤¾à¤‚ति बहà¥à¤µà¤¿à¤§à¤¿ निरधारा॥
अरॠसांचे सो देत दिखाई,
सो सतिता पà¥à¤°à¤à¥ ही की छाई।
जैसे रेत चमक मृग देखें,
जल को à¤à¥à¤°à¤® मन मांहि सपेखें ||
जल à¤à¥à¤°à¤® à¤à¥‚ठरेत ही सतà¥à¤¯à¤¾,
à¤à¥à¤°à¤® सों दीस परत जल छतà¥à¤¯à¤¾à¥¤
जल à¤à¥à¤°à¤® कांच मांहि जà¥à¤¯à¥‹à¤‚ होता,
सो à¤à¥‚ठो सति कांच उदौता ||
उनके दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ रचित रचनाà¤à¤, कावà¥à¤¯ व दोहे काफी पà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¦à¥à¤§ हà¥à¤ और उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ काफी पà¥à¤¾ गया। जिनमे कà¥à¤› दोहे ये है –
- असॠगज à¤à¥‚षण
- औरहॠकà¥à¤‚वरि कà¥à¤Ÿà¤‚व
- बार बार बंदन करौं
- बार बार वंदन करौं
- चंद वदन पंकज
- गावत मंगल गीत
- हों गंधी दरबार कौ
- जीवन मोर सà¥à¤œà¤¾à¤‚न
- नमो नमो à¤à¤—वान रहे
- पाय नेग आनंद लहि
- पà¥à¤°à¥‡à¤® विरह को बà¥à¤¤ हैं
- रह गये इकटक पिय
- शà¥à¤°à¥€ गà¥à¤°à¥ पद वंदन करूं
- वंदौं नारद वà¥à¤¯à¤¾à¤¸ शà¥à¤•
- यों कहते दà¥à¤°à¤— अरà¥à¤¨
जगतॠकी नशà¥à¤µà¤°à¤¤à¤¾ और माया के à¤à¥à¤°à¤® से बचने का संदेश जो यहां के मनीषियों ने दिया, उसे हृदयंगम करने तथा लोक-कलà¥à¤¯à¤¾à¤£ की à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ से पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤°à¤¿à¤¤ करने में à¤à¥€ राजपूत नारियां पीछे नहीं रहीं।
I am Gagan Singh Shekhawat, a renowned online marketer with extensive experience and expertise in internet marketing. Beyond my professional career, I have always carried a deep desire to unfold the majestic and mystical glory of India and share it with the world. From this vision, the foundation of ‘Our Society’ was born-an initiative that is truly my brainchild.
Through Our Society, I strive to cover every aspect of India’s identity-be it social, cultural, political, or historical-leaving no stone unturned. I firmly believe in the power of blogging to inspire and create impact, and with this belief, I introduced the unique concept of Our Society to help people discover and experience the magnificent heritage and essence of India.
