गà¥à¤œà¤°à¤¾à¤¤ का à¤à¤• राजà¥à¤¯ करà¥à¤£à¤¾à¤µà¤¤à¥€ जिसे आज आप अहमदाबाद के नाम से जानते है जिसके राजा राणा वीर सिंह वाघेला (सोलंकी) थे। १५वीं शताबà¥à¤¦à¥€ में इस राजà¥à¤¯ ने तà¥à¤°à¥à¤• हमलावर आकà¥à¤°à¤¾à¤‚ताओं के कई हमलों का सामना किया किनà¥à¤¤à¥ सफलता किसी à¤à¥€ आकà¥à¤°à¤¾à¤‚ता को ना मिल पाई। यहाठतक कि सनॠ१४९ॠमें तà¥à¤°à¥à¤• सà¥à¤²à¥à¤¤à¤¾à¤¨ बेघारा ने पाटन राजà¥à¤¯ पर ४००००० से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ सैनिकों की फौज हमला किया किनà¥à¤¤à¥ राणा वीर सिंह वाघेला के शौरà¥à¤¯ व पराकà¥à¤°à¤® के आगे तà¥à¤°à¥à¤• सà¥à¤‚लà¥à¤¤à¤¾à¤¨ की वह फौज २ घंटे से अधिक टिक ना सकी और सà¥à¤²à¥à¤¤à¤¾à¤¨ बेघारा को अपनी जान बचाकर à¤à¤¾à¤—ना पड़ा। करà¥à¤£à¤¾à¤µà¤¤à¥€ और पाटन दोनों ही राजà¥à¤¯ छोटे होने की वजह से राणा वीर सिंह वाघेला की सेना की संखà¥à¤¯à¤¾ छबà¥à¤¬à¥€à¤¸ सौ से अठà¥à¤ ाइस सौ से अधिक नहीं थी। कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ अधिक सेना की आवशà¥à¤¯à¤•ता नहीं होती थी। फिर à¤à¥€ राणा जी के यà¥à¤¦à¥à¤§ कौशल ने जिहादी आतंकियों की लाखों की फौज को खदेड़ दिया।
वाघेला राजपूत राजा की à¤à¤• बहà¥à¤¤ सà¥à¤¨à¥à¤¦à¤° रानी थी जिनका नाम था रà¥à¤¦à¤¾à¤¬à¤¾à¤ˆ (उरà¥à¤«à¤¼ रूपबा)। इनकी सà¥à¤‚दरता के चरà¥à¤šà¥‡ चारों ओर फैले हà¥à¤ थे। जितनी ही रूप वान थी उतनी ही दृढ़ संकलà¥à¤ª और साहसी महिला।
तà¥à¤°à¥à¤• सà¥à¤²à¥à¤¤à¤¾à¤¨ बेघारा à¤à¥€ अनà¥à¤¯ तà¥à¤°à¥à¤• तथा मà¥à¥šà¤² आकà¥à¤°à¤¾à¤‚ताओं के सामान ही गलत नियत से हमला करने आया था। उस तà¥à¤°à¥à¤• की गलत नजर रानी रà¥à¤¦à¤¾à¤¬à¤¾à¤ˆ पर थी जो की अतà¥à¤¯à¤‚त ही खूबसूरत थी। वह रानी को यà¥à¤¦à¥à¤§ में जीतकर अपने हरम में रखने का खà¥à¤µà¤¾à¤¬ देख रहा था। इसकी इचà¥à¤›à¤¾ के चलते उस तà¥à¤°à¥à¤• आकà¥à¤°à¤¾à¤‚ता ने फिर से कà¥à¤› समय पशà¥à¤šà¤¾à¤¤à¥ हमला बोला।
इस बार तà¥à¤°à¥à¤• सà¥à¤²à¥à¤¤à¤¾à¤¨ ने तà¥à¤°à¥à¤• व मà¥à¥šà¤²à¥‹à¤‚ की आदतन छल – कपट वाली निती को अपनाया और राणा जी के साथ रहने वाले निकटवरà¥à¤¤à¥€ मितà¥à¤° धनà¥à¤¨à¥‚ साहूकार को अपनी और मिला लिया। उस धोकेबाज साहूकार ने राजà¥à¤¯ की सà¤à¥€ गà¥à¤ªà¥à¤¤ सूचनाà¤à¤‚ सà¥à¤²à¥à¤¤à¤¾à¤¨ को दे दी। जिसकी वजह से सà¥à¤²à¥à¤¤à¤¾à¤¨ ने कपट से राणा वीर सिंह को यà¥à¤¦à¥à¤§ में हरा दिया। इस यà¥à¤¦à¥à¤§ में जब राणा वीर सिंह यà¥à¤¦à¥à¤§ में सà¥à¤²à¥à¤¤à¤¾à¤¨ की ओर बॠरहे थे तà¤à¥€ उनका विशà¥à¤µà¤¾à¤¸à¤ªà¤¾à¤¤à¥à¤° मितà¥à¤° धनà¥à¤¨à¥‚ साहूकार ने धोके से पीछे से वार किया जिसके कारन राणा जी यà¥à¤¦à¥à¤§ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में ही वीरगति को पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ हà¥à¤à¥¤ ।
यà¥à¤¦à¥à¤§ जीतकर सà¥à¤²à¥à¤¤à¤¾à¤¨ अपनी वासना व हवस को पूरा करने के लिठरानी रà¥à¤¦à¤¾à¤¬à¤¾à¤ˆ के पास राणा जी के महल में १० हजार सैनिकों के लशà¥à¤•र को लेकर पंहà¥à¤šà¤¾ और अपने दूत के हाथों रानी रà¥à¤¦à¤¾à¤¬à¤¾à¤ˆ के पास निकाह का पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¤¾à¤µ à¤à¤¿à¤œà¤µà¤¾à¤¯à¤¾à¥¤
रानी रà¥à¤¦à¤¾à¤¬à¤¾à¤ˆ ने पहले से ही २५०० धनà¥à¤°à¥à¤§à¤¾à¤°à¥€ वीरांगनाओं के साथ राणा जी के महल के ऊपर पूरी छावनी बनाई हà¥à¤ˆ थी, वे सà¤à¥€ वीरांगनाà¤à¤‚ रानी रà¥à¤¦à¤¾à¤¬à¤¾à¤ˆ के à¤à¤• इशारे पर सà¥à¤²à¥à¤¤à¤¾à¤¨ के लशà¥à¤•र पर हमला करने को तैयार थी। लेकिन रानी रà¥à¤¦à¤¾à¤¬à¤¾à¤ˆ न केवल सौंदरà¥à¤¯ की धनी ही नहीं थी बलà¥à¤•ि शौरà¥à¤¯ और बà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿ की à¤à¥€ धनी थी पहले रानी ने सà¥à¤²à¥à¤¤à¤¾à¤¨ को महल के दà¥à¤µà¤¾à¤° के अंदर आये का नà¥à¤¯à¥Œà¤¤à¤¾ दिया।
सà¥à¤²à¥à¤¤à¤¾à¤¨ बेघारा हवस की आग में अà¤à¤§à¤¾ होकर दà¥à¤°à¥à¤— के दà¥à¤µà¤¾à¤° से अंदर आया और रानी रà¥à¤¦à¤¾à¤¬à¤¾à¤ˆ ने बिना समय गवाà¤à¤‚ सà¥à¤²à¥à¤¤à¤¾à¤¨ बेघारा के सीने में खंजर घोंप दिया। दूसरी और वीरांगनाओं ने शाह के लशà¥à¤•र पर छावनी से तीरों की वरà¥à¤·à¤¾ करदी जिसमे à¤à¤• à¤à¥€ सैनिक वापस बचकर नहीं जा पाया।
रानी रà¥à¤¦à¤¾à¤¬à¤¾à¤ˆ ने सà¥à¤²à¥à¤¤à¤¾à¤¨ बेघारा का सीना फाड़कर उसका कलेजा बहार निकाल लिया और करà¥à¤£à¤¾à¤µà¤¤à¥€ शहर के बीच उसे लटकवा दिया। तथा उसका सर धड़ से काटकर पाटन राजà¥à¤¯ के बीच टांग दिया। इसके साथ रानी रà¥à¤¦à¤¾à¤¬à¤¾à¤ˆ ने यह चेतावनी à¤à¥€ जारी की कि जो à¤à¥€ दà¥à¤·à¥à¤Ÿ आकà¥à¤°à¤¾à¤‚ता à¤à¤¾à¤°à¤¤à¤µà¤°à¥à¤· या à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ नारियों पर गलत दृषà¥à¤Ÿà¤¿ लेकर आà¤à¤—ा उसका इसी पà¥à¤°à¤•ार परिणाम होगा।
रानी रà¥à¤¦à¤¾à¤¬à¤¾à¤ˆ ने इस यà¥à¤¦à¥à¤§ के पशà¥à¤šà¤¾à¤¤à¥ राजकाज को सà¥à¤¯à¥‹à¤—à¥à¤¯ हांथों में देकर सà¥à¤µà¤¯à¤‚ को जल समाधी कर अपना अंत कर लिया जिससे à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯ में फिर कोई आकà¥à¤°à¤¾à¤‚ता उनकी और गलत नजर लेकर ना आये व वह पवितà¥à¤° ही रहे।
गà¥à¤œà¤°à¤¾à¤¤ के वासियों के साथ ही समसà¥à¤¤ देशवासी रानी रà¥à¤¦à¤¾à¤¬à¤¾à¤ˆ को नमन करते है।
I am Gagan Singh Shekhawat, a renowned online marketer with extensive experience and expertise in internet marketing. Beyond my professional career, I have always carried a deep desire to unfold the majestic and mystical glory of India and share it with the world. From this vision, the foundation of ‘Our Society’ was born-an initiative that is truly my brainchild.
Through Our Society, I strive to cover every aspect of India’s identity-be it social, cultural, political, or historical-leaving no stone unturned. I firmly believe in the power of blogging to inspire and create impact, and with this belief, I introduced the unique concept of Our Society to help people discover and experience the magnificent heritage and essence of India.
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