३१ मई १à¥à¥¨à¥« में जनà¥à¤®à¥€ अहिलà¥à¤¯à¤¾à¤¬à¤¾à¤ˆ आननà¥à¤¦à¤°à¤¾à¤µ सिंधिया (मनकोजी) की होनहार पà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ थी। नीति निपà¥à¤£, धरà¥à¤®à¤œà¥à¤ž व नà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤ªà¥à¤°à¤¿à¤¯ तथा शीलवती अहलà¥à¤¯à¤¾à¤¬à¤¾à¤ˆ विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ गà¥à¤£à¥‹à¤‚ से समà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ थी । इसका विवाह मलà¥à¤¹à¤¾à¤°à¤°à¤¾à¤µ होलà¥à¤•र के पतà¥à¤° खांडेराव के साथ हà¥à¤† । खांडेराव इनà¥à¤¦à¥Œà¤° का शासक था और अहिलà¥à¤¯à¤¾à¤¬à¤¾à¤ˆ इनà¥à¤¦à¥Œà¤° की महारानी बनी। गà¥à¤£à¤¸à¤®à¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨à¤¾ अहिलà¥à¤¯à¤¾à¤¬à¤¾à¤ˆ अपने नितà¥à¤¯à¤•ारà¥à¤¯ के अतिरिकà¥à¤¤ राजà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤¬à¤¨à¥à¤§ के कारà¥à¤¯à¥‹à¤‚ में à¤à¥€ अपने पति को पूरà¥à¤£ सहयोग पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करती थी। अà¤à¥€ उसके दामà¥à¤ªà¤¤à¥à¤¯ जीवन के केवल नौ वरà¥à¤· ही बीते थे कि खांडेराव का सà¥à¤µà¤°à¥à¤—वास हो गया। उसने पति के साथ सती होना चाहा पर सास शà¥à¤µà¤¸à¥à¤° ने अपने दो छोटे बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ (à¤à¤• पà¥à¤¤à¥à¤° व à¤à¤• पà¥à¤¤à¥à¤°à¥€) के पालन हेतॠउसे à¤à¤¸à¤¾ करने से रोका। विधवा होने के समय अहिलà¥à¤¯à¤¾à¤¬à¤¾à¤ˆ की अवसà¥à¤¥à¤¾ केवल बीस या बाईस वरà¥à¤· की ही थी पर इसकी वीरता और कारà¥à¤¯ दकà¥à¤·à¤¤à¤¾ पर उसके शà¥à¤µà¤¸à¥à¤° मलà¥à¤¹à¤¾à¤°à¤°à¤¾à¤µ होलà¥à¤•र को पूरा à¤à¤°à¥‹à¤¸à¤¾ था । सनॠ1761 में पानीपत के यà¥à¤¦à¥à¤§ के पशà¥à¤šà¤¾à¤¤à¥ मलà¥à¤¹à¤¾à¤°à¤°à¤¾à¤µ ने इनà¥à¤¦à¥Œà¤° का राजà¥à¤¯-पà¥à¤°à¤¬à¤¨à¥à¤§ पूरी तरह अपनी पà¥à¤¤à¥à¤°à¤µà¤§à¥‚ अहिलà¥à¤¯à¤¾à¤¬à¤¾à¤ˆ को ही सौंप दिया ।
मलà¥à¤¹à¤¾à¤°à¤°à¤¾à¤µ की मृतà¥à¤¯à¥ के पशà¥à¤šà¤¾à¤¤à¥ अहिलà¥à¤¯à¤¾à¤¬à¤¾à¤ˆ का पà¥à¤¤à¥à¤° मालेराव इनà¥à¤¦à¥Œà¤° का शासक हà¥à¤† और अहिलà¥à¤¯à¤¾à¤¬à¤¾à¤ˆ राजमहिषी । मालेराव राजमहिषी अहिलà¥à¤¯à¤¾à¤¬à¤¾à¤ˆ की शालीनता और सदà¥à¤µà¥à¤¯à¤µà¤¹à¤¾à¤° के बिलकà¥à¤² विपरीत सà¥à¤µà¤à¤¾à¤µ का था । मालेराव अधिक समय तक जीवित नहीं रहा, उसके पशà¥à¤šà¤¾à¤¤à¥ अहिलà¥à¤¯à¤¾à¤¬à¤¾à¤ˆ ने ही इनà¥à¤¦à¥Œà¤° राजà¥à¤¯ का शासन पà¥à¤°à¤¬à¤‚ध अपने हाथ में लिया । अहिलà¥à¤¯à¤¾à¤¬à¤¾à¤ˆ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ शासन की बागडोर हाथ में लिये जाने का सबसे अधिक विरोध मलà¥à¤¹à¤¾à¤°à¤°à¤¾à¤µ के मà¥à¤–à¥à¤¯à¤®à¤¨à¥à¤¤à¥à¤°à¥€ गंगाधर यशवनà¥à¤¤ ने किया । गंगाधर यशवनà¥à¤¤ का कहना था कि विधवा अहिलà¥à¤¯à¤¾à¤¬à¤¾à¤ˆ के सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर कà¥à¤² में से किसी को गोद लेकर राजà¥à¤¯à¤—दà¥à¤¦à¥€ पर बिठाया जाय। अहिलà¥à¤¯à¤¾à¤¬à¤¾à¤ˆ ने गंगाधर यशवंत के उस पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¤¾à¤µ को यह कहकर अमानà¥à¤¯ कर दिया कि ‘मैं राजà¥à¤¯à¤—दà¥à¤¦à¥€ के दो अधिकारियों की रिशà¥à¤¤à¥‡à¤¦à¤¾à¤° हूठ– à¤à¤• की पतà¥à¤¨à¥€ और दूसरे की माता । मà¥à¤à¥‡ राजà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤¬à¤¨à¥à¤§ का अनà¥à¤à¤µ है, मà¥à¤à¥‡ किसी को गोद लेने की आवशà¥à¤¯à¤•ता नहीं, मैं सà¥à¤µà¤¯à¤‚ राजà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤¬à¤‚ध करूगी।”
असनà¥à¤¤à¥à¤·à¥à¤Ÿ गंगाधर यशवंत ने पेशवा के सेनापति रघà¥à¤¨à¤¾à¤¥à¤°à¤¾à¤µ को à¤à¤¡à¤¼à¤•ाकर इनà¥à¤¦à¥Œà¤° से अहिलà¥à¤¯à¤¾à¤¬à¤¾à¤ˆ को निकालकर उसका राजà¥à¤¯ हड़पने की योजना बनाई। अहिलà¥à¤¯à¤¾à¤¬à¤¾à¤ˆ इससे à¤à¤¯à¤à¥€à¤¤ नहीं हà¥à¤ˆà¥¤ इनà¥à¤¦à¥Œà¤° की राजमहिषी ने गायकवाड़ और à¤à¥Œà¤¸à¤²à¥‡ की सहायता पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ कर पेशवा के सेनापति से यà¥à¤¦à¥à¤§ करने आ डटी। अहिलà¥à¤¯à¤¾à¤¬à¤¾à¤ˆ को अबला समà¤à¤•र रधà¥à¤¨à¤¾à¤¥à¤°à¤¾à¤µ ने इनà¥à¤¦à¥Œà¤° पर आकà¥à¤°à¤®à¤£ की योजना बनायी थी। जब उस वीरांगना को पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¥‹à¤§ के लिठउपसà¥à¤¥à¤¿à¤¤ देखा तो राजमहिषी अहिलà¥à¤¯à¤¾à¤¬à¤¾à¤ˆ को यह संदेश à¤à¥‡à¤œà¤•र लौट गया कि “मैं तो केवल यह देखना चाहता था कि शतà¥à¤°à¥ से तà¥à¤® अपनी रकà¥à¤·à¤¾ करने में सकà¥à¤·à¤® à¤à¥€ हो या नहीं।” अहिलà¥à¤¯à¤¾à¤¬à¤¾à¤ˆ इनà¥à¤¦à¥Œà¤° की शासिका बनी। उसने गंगाधर यशवंत को à¤à¥€ माफ कर अपनी कà¥à¤·à¤®à¤¾à¤¶à¥€à¤²à¤¤à¤¾ का परिचय दिया ।
सदà¥à¤—à¥à¤£ समà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ इस वीर नारी ने बहà¥à¤¤ ही योगà¥à¤¯à¤¤à¤¾ से लगà¤à¤— 30 वरà¥à¤· तक इनà¥à¤¦à¥Œà¤° राजà¥à¤¯ का संचालन किया। उसके राजà¥à¤¯ में चारों ओर अमन चैन था । राजà¥à¤¯ की आरà¥à¤¥à¤¿à¤• सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ à¤à¥€ सà¥à¤¦à¥ƒà¤¢ थी। खजाने में करोड़ों रà¥à¤ªà¤¯à¥‡ जमा थे और दान-धरà¥à¤® तथा पà¥à¤£à¥à¤¯ कारà¥à¤¯à¥‹à¤‚ में à¤à¥€ उसने बहà¥à¤¤-सी राशि खरà¥à¤š की । धरà¥à¤® में उसकी गहरी आसà¥à¤¥à¤¾ थी। हिनà¥à¤¦à¥à¤¸à¥à¤¤à¤¾à¤¨ के पà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¦à¥à¤§ तीरà¥à¤¥ सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥‹à¤‚ जैसे रामेशà¥à¤µà¤°à¤®à¥, केदारनाथ, काशी-विशà¥à¤µà¤¨à¤¾à¤¥, पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤—, जगनà¥à¤¨à¤¾à¤¥, दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤•ा आदि में मनà¥à¤¦à¤¿à¤° बनवाकर वहां सदावà¥à¤°à¤¤ बांटना पà¥à¤°à¤¾à¤°à¤®à¥à¤ करवाया । राजà¥à¤¯ की सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ की दृषà¥à¤Ÿà¤¿ से जहां उसने विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ गढ़ कोट इतà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¿ बनवाये वहीं सारà¥à¤µà¤œà¤¨à¤¿à¤• हित के लिठसड़कें, कà¥à¤à¤‚, बावड़ियां व धरà¥à¤®à¤¶à¤¾à¤²à¤¾à¤à¤ बनवायीं । à¥à¥¦ वरà¥à¤· की उमà¥à¤° में १३ अगसà¥à¤¤ १à¥à¥¯à¥« में उनका निधन इंदौर, मधà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ में हà¥à¤†à¥¤ विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ कषà¥à¤Ÿà¥‹à¤‚ का दृढ़ता से मà¥à¤•ाबला करते हà¥à¤ महारानी अहिलà¥à¤¯à¤¾à¤¬à¤¾à¤ˆ ने जनहित और देश-हित के अनेक कारà¥à¤¯ किये उसकी कीरà¥à¤¤à¤¿ आज à¤à¥€ अमर है।
डा.विकà¥à¤°à¤®à¤¸à¤¿à¤‚ह राठौड़,गà¥à¤¨à¥à¤¦à¥‹à¤œ
राजसà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥€ शोध संसà¥à¤¥à¤¾à¤¨, चोपासनी, जोधपà¥à¤°
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