कà¥à¤› दिनों से देखा जा रहा है की देश में धरà¥à¤® के आधार पर बड़ी चरà¥à¤šà¤¾ चल रही है l चाहे कशà¥à¤®à¥€à¤° के मà¥à¤¦à¥à¤¦à¥‡ पर हो या फिर बाबरी मसà¥à¤œà¤¿à¤¦ से राम मंदिर तक के सफर की चाहे मथà¥à¤°à¤¾ की शाही ईदगाह का मà¥à¤¦à¥à¤¦à¤¾ हो या काशी विशà¥à¤µà¤¨à¤¾à¤¥ और कथित जà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤µà¤¾à¤ªà¥€ मसà¥à¤œà¤¿à¤¦ सà¤à¥€ मà¥à¤¦à¥à¤¦à¥‡ धरà¥à¤® की à¤à¤• अलग ही दिशा तय करने और देश को à¤à¤• अलग दिशा में ले जा रहे है।
अब सवाल ये उठता है की आखिर सही किसे कहा जाये ? तो देश के सà¤à¥€ नेता, सà¤à¥€ मौलाना, सà¤à¥€ साधॠसंत और सà¤à¥€ नागरिक अपनी अपनी बात रख रहे है। दफà¥à¤¤à¤° हो या चाय की दà¥à¤•ान, गली मोहलà¥à¤²à¤¾ हो या नेताओं की राजनितिक सà¤à¤¾à¤à¤‚ सà¤à¥€ जगह लोग अपनी अपनी जानकारी के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° बात कर रहे है। लेकिन आम जनता आखिर किसे सही माने किसे गलत, ये सवाल बड़ा है। आज हम इनà¥à¤¹à¥€ कà¥à¤› मà¥à¤¦à¥à¤¦à¥‹à¤‚ में से à¤à¤• पर रौशनी डालने की कोशिश करेंगे।
हाल ही में à¤à¤• मà¥à¤¦à¥à¤¦à¤¾ जो चरà¥à¤šà¤¾ में जोरों पर है, वह है जà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤µà¤¾à¤ªà¥€ मसà¥à¤œà¤¿à¤¦ जो की काशी विशà¥à¤µà¤¨à¤¾à¤¥ मंदिर से सटा हà¥à¤† या ये कहा जो सकता है की मंदिर की सीमा में ही सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ है। सैंकड़ो सालों से मà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤® समाज वह इबादत करता आ रहा है। इस मसà¥à¤œà¤¿à¤¦ पर हिनà¥à¤¦à¥‚ समाज ने ये दावा किया है की ये मंदिर को तोड़कर मसà¥à¤œà¤¿à¤¦ का रूप दिया गया है तथा इस जगह को मंदिर मानकर हिनà¥à¤¦à¥‚ समठको सौंपा जाना चाहिà¤à¥¤ इसके लिठहिनà¥à¤¦à¥‚ समाज ने सालों से अदालत में याचिकाà¤à¤‚ लगाई पर कà¤à¥€ इस मà¥à¤¦à¥à¤¦à¥‡ पर कोई खास पà¥à¤°à¤—ति नहीं हà¥à¤ˆ कà¥à¤¯à¥‹à¤•ि देश में सदा मà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤® समाज के पकà¥à¤· में कड़ी कांगà¥à¤°à¥‡à¤¸ सरकार का राज रहा। यही कारन है देश में कà¤à¥€ à¤à¥€ जनता को à¤à¤¸à¥‡ मामलों की सही जानकारी नहीं मिल पाई। कांगà¥à¤°à¥‡à¤¸ ने सदैव देश को गलत इतिहास को पढ़ने समà¤à¤¨à¥‡ पर मजबूर किया।
आज मोदी – योगी की सरकार आने से ये मà¥à¤®à¤•िन हो पाया की देश की जनता को इतिहास के उन काले पनà¥à¤¨à¥‹ को पढ़ने और समà¤à¤¨à¥‡ का अवसर मिला है और अपने ऊपर हà¥à¤ अतà¥à¤¯à¤¾à¤šà¤¾à¤°à¥‹à¤‚ के खिलाफ उठखड़े होने और अपने अधिकारों के लिठआवाज उठाने का मौका मिला है।
आज देश की अदालतों ने à¤à¥€ हिनà¥à¤¦à¥‚ समाज के दरà¥à¤¦ को समà¤à¤¨à¥‡ की कोशिश की तथा पहले बाबरी मसà¥à¤œà¤¿à¤¦ के सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर राम मंदिर बनाने का फैसला हो या अब जà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤µà¤¾à¤ªà¥€ मामले में सरà¥à¤µà¥‡ का फैसला हो। जबसे जà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤µà¤¾à¤ªà¥€ मसà¥à¤œà¤¿à¤¦ में सरà¥à¤µà¥‡ का फैसला अदालत ने लिया देश में मà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤® समाज के ठेकेदारों या ये कहलें मà¥à¤—लिया खून में à¤à¤• अलग ही उबाल देखने को मिला। सवाल ये है की अगर मसà¥à¤œà¤¿à¤¦ है तो सरà¥à¤µà¥‡ करने में कà¥à¤¯à¤¾ परेशानी हो सकती है? आखिर मसà¥à¤œà¤¿à¤¦ में सरà¥à¤µà¥‡ किया जायेगा तो इसà¥à¤²à¤¾à¤® से जà¥à¤¡à¤¼à¥‡ निशान और वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ मिलेगी, इसà¥à¤²à¤¾à¤®à¥€ धरà¥à¤® से जà¥à¤¡à¥€ à¤à¤µà¤¨ शैली मिलेगी। जब यही सब मिलना है तो फिर सरà¥à¤µà¥‡ के खिलाफ मà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤® समाज की ये खलबली समठसे परे है।
पर असल में ये खलबली इसलिठहै कà¥à¤¯à¥‹à¤•ि सरà¥à¤µà¥‡ हो गया है और जो चीजें मसà¥à¤œà¤¿à¤¦ परिसर से निकल कर आई है , जो फोटोज में और वीडियो में आया है वह शायद मà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤® समाज के लिठचोर की दाढ़ी में तिनके वाली सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ पैदा कर रहा है। चाहे मसà¥à¤œà¤¿à¤¦ के वजूखाने में निकले शिवलिंग की सचà¥à¤šà¤¾à¤ˆ हो ये मसà¥à¤œà¤¿à¤¦ के गà¥à¤®à¥à¤¬à¤œ के निचे आज à¤à¥€ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ मंदिर के गà¥à¤®à¥à¤¬à¤œ की आकृति का होना हो, या फिर जगह जगह सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¤à¤¿à¤•, कमल, तà¥à¤°à¤¿à¤¶à¥‚ल या संसà¥à¤•ृत में लिखे शà¥à¤²à¥‹à¤‚को का मसà¥à¤œà¤¿à¤¦ की दीवारों पर आज à¤à¥€ होना हो। मà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤® समाज इन सà¤à¥€ बातों को देशवासियों के सामने आ जाने के डर से घबराया हà¥à¤† है। मà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤® समाज ये नहीं चाहता की सरà¥à¤µà¥‡ की रिपोरà¥à¤Ÿ को बहार आने दिया जाये। इसी बात को लेकर राजनितिक रोटी सेक रहे पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨ परसà¥à¤¤ औवेसी हो या पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨ की जिहादी मानसिकता फैला रहे मौलाना हो वà¥à¤¯à¤¾à¤•à¥à¤² हो कर देश में अनरà¥à¤—ल बयानबाजी कर मà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤® समाज को à¤à¤¡à¤¼à¤•ा कर देश में आग लगाने का काम कर रहे है। उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ डर है जिन मà¥à¤—़लों के किये अपराधों को ये लोग आज तक छिपा रहे थे वह देश की जनता के सामने आ जाने से न सिरà¥à¤« हिनà¥à¤¦à¥‚ समाज जाग जायेगा अपितॠजिन मà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤®à¥‹à¤‚ को ये लोग आज तक ये बेवकूफ बनाते आये है वह à¤à¥€ इनसे विमà¥à¤•à¥à¤¤ हो जायेंगे।
इन सवालों के जवाब जानने के लिठअगर इसके à¤à¤¤à¤¿à¤¹à¤¾à¤¸à¤¿à¤• पकà¥à¤· को हम देखें तो सà¥à¤•ंद पà¥à¤°à¤¾à¤£ के काशी खंड में पूरà¥à¤µà¤¾à¤°à¥à¤§ में कथानक राजा मालकेतू और उनकी रानी कलावती का आता है। इस कथानक के माधà¥à¤¯à¤® से यह बताया गया है कि जà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤µà¤¾à¤ªà¥€ शिव का पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¤•à¥à¤· रूप होता है, यह जà¥à¤žà¤¾à¤¨ को पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करने वाला सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ है। पà¥à¤°à¤¾à¤£à¥‹à¤‚ में शिव के जिन 8 रूपों की चरà¥à¤šà¤¾ की गई है, जà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤µà¤¾à¤ªà¥€ à¤à¥€ उनके सà¥à¤µà¤°à¥‚प के रूप में आता है।जà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤µà¤¾à¤ªà¥€ का सà¥à¤µà¤°à¥‚प जल का रूप होता है, जिसे जà¥à¤žà¤¾à¤¨ वरà¥à¤§à¤¨ करने वाला सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ कहा गया है।
जब राजा माल केतू और कलावती यहां आते थे, तो à¤à¤—वान शिव सà¥à¤µà¤¯à¤‚ उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ उपदेश देते थे। जà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤µà¤¾à¤ªà¥€ की पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨à¤¤à¤¾ अरà¥à¤²à¥€ मीडियम पीरियड तक जाती है। कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि सà¥à¤•ंद पà¥à¤°à¤¾à¤£ की रचना लगà¤à¤— आठवीं शताबà¥à¤¦à¥€ मानी जाती है। जà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤µà¤¾à¤ªà¥€ के इतिहास के बारे में बताया गया है कि जà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤µà¤¾à¤ªà¥€ शिव का जल सà¥à¤µà¤°à¥‚प है। वह जà¥à¤žà¤¾à¤¨ को वरà¥à¤§à¤¨ करने वाली जगह है। जहां पर शिव ने सà¥à¤µà¤¯à¤‚ राजा माल केतॠऔर उनकी रानी कलावती को उपदेश दिया था। सà¥à¤•ंद पà¥à¤°à¤¾à¤£ की बात की जाठतो अविमà¥à¤•à¥à¤¤à¥‡à¤¶à¥à¤µà¤° के आधार पर यह कहा जा सकता है कि काशी में वह गà¥à¤ªà¥à¤¤à¤•ाल से शैव संपà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¯ की पूजा होती है। तà¤à¥€ मंदिर का à¤à¥€ निरà¥à¤®à¤¾à¤£ किया गया था।
जà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤µà¤¾à¤ªà¥€ मतलब जà¥à¤žà¤¾à¤¨ का कà¥à¤‚ड होता है। इस कà¥à¤‚ड को बनाने का शà¥à¤°à¥‡à¤¯ सीधे à¤à¤—वान शिव को जाता है। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने ही अपने तà¥à¤°à¤¿à¤¶à¥‚ल के माधà¥à¤¯à¤® से उसे जमीन से सà¥à¤ªà¤°à¥à¤¶ कराकर वहां पर पानी निरà¥à¤§à¤¾à¤°à¤¿à¤¤ किया था। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने यहां पर अविमà¥à¤•à¥à¤¤à¥‡à¤¶à¥à¤µà¤° को सà¥à¤¨à¤¾à¤¨ करवाया था, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कहा था कि अविमà¥à¤•à¥à¤¤à¥‡à¤¶à¥à¤µà¤° उनका अंश है,वह उनके साथ लंबे समय तक रहेगा। जà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤µà¤¾à¤ªà¥€ का उलà¥à¤²à¥‡à¤– जल पà¥à¤°à¤¾à¤£à¥‹à¤‚ में जà¥à¤žà¤¾à¤¨à¥‹à¤¦à¤¯ तीरà¥à¤¥ के रूप में है. पà¥à¤°à¤¾à¤£à¥‹à¤‚ में à¤à¤¸à¤¾ कहा गया है कि जो मरणासनà¥à¤¨ पà¥à¤°à¤¾à¤£à¥€ है वापी के पास बैठकर समीप बैठकर अपनी गोद में उसके सिर को रखकर तारक मंतà¥à¤° का जाप कराता है, जिससे उसका पà¥à¤¨à¤°à¥à¤œà¤¨à¥à¤® न हो. कहा जाता है कि है काशी जनà¥à¤® लेने वाला मà¥à¤•à¥à¤¤ हो जाता है.
सà¥à¤•ंद पà¥à¤°à¤¾à¤£ के काशी खंड में अटà¥à¤ ासी हृदà¥à¤¯ 62 कà¥à¤‚डो का सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ उलà¥à¤²à¥‡à¤– है। शिव पà¥à¤°à¤¾à¤£ के अधà¥à¤¯à¤¾à¤¯ 21 पृषà¥à¤ संखà¥à¤¯à¤¾ 1093 में साफ लिखा है कि à¤à¤—वान शिव अपने शिवलिंग से यह कह रहे हैं कि मेरे अंश वाले जà¥à¤¯à¥‹à¤¤à¤¿à¤°à¥à¤²à¤¿à¤‚ग अविमà¥à¤•à¥à¤¤à¥‡à¤¶à¥à¤µà¤° तà¥à¤® किसी à¤à¥€ मूलà¥à¤¯ पर काशी को मत छोड़ना। डॉ पà¥à¤°à¤µà¥€à¤£ à¤à¤¾à¤°à¤¦à¥à¤µà¤¾à¤œ ने बताया कि काशी में 9 वापी थे। लेकिन लिंग पà¥à¤°à¤¾à¤£ के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤• सिरà¥à¤« 6 वापी का उलà¥à¤²à¥‡à¤– मिलता है। जिसमें से à¤à¤• काशीपà¥à¤°à¤¾ में मौजूद था.जेषà¥à¤ ा वापी अब लà¥à¤ªà¥à¤¤ हो गया है। इसके अलावा दूसरा वापी ककोरà¥à¤Ÿ वापी जो कि महाà¤à¤¾à¤·à¥à¤¯ की संरचना करने वाले पातंजलि जी के निवास सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर है, जिसे नाग कà¥à¤‚आ कहा जाता है।
बनारस अरà¥à¤¥à¤¾à¤¤ काशी मà¥à¤—़ल आकà¥à¤°à¤¾à¤‚ताओं के हमलों के लिठà¤à¤• टारगेट की à¤à¤¾à¤‚ति रहा है। पà¥à¤°à¤¥à¤® मà¥à¤—़ल आकà¥à¤°à¤®à¤£ मà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤® आकà¥à¤°à¤¾à¤‚ता अहमद नियलà¥à¤¤à¤—ीन ने १०३३ में किया था जिसे महमूद गजनी के बेटे मसूद ने à¤à¤¾à¤°à¤¤ का गवरà¥à¤¨à¤° नियà¥à¤•à¥à¤¤ किया था। अहमद नियलà¥à¤¤à¤—ीन की सेना ने आधे दिन में ही पà¥à¤°à¥‡ बनारस को लूट लिया था। इसके बाद à¤à¥€ मà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤® आकà¥à¤°à¤¾à¤‚ताओं की नजर बनारस पर रही। ११९४ में बनारस के राजा जयचंद को शिहाबà¥à¤¦à¥à¤¦à¥€à¤¨ गोरी उरà¥à¤«à¤¼ मोहमà¥à¤®à¤¦ गोरी जो की अफगान सेना का सेनापति था ने चंदवार के यà¥à¤¦à¥à¤§ में हरा दिया। इस के बाद à¤à¥€ मà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤® हमले जारी रहे। मोहमà¥à¤®à¤¦ गोरी के सेनापति कà¥à¤¤à¥à¤¬à¥à¤¦à¥à¤¦à¥€à¤¨ à¤à¤¬à¤• ने ना सिरà¥à¤« बनारस पर हमला किया बलà¥à¤•ि हजारों हिनà¥à¤¦à¥‚ मंदिरों को तोड़ दिया, जिसमे विशà¥à¤µà¥‡à¤¶à¥à¤µà¤° मंदिर à¤à¥€ शामिल था। कà¥à¤¤à¥à¤¬à¥à¤¦à¥à¤¦à¥€à¤¨ à¤à¤¬à¤• ने विशà¥à¤µà¥‡à¤¶à¥à¤µà¤° मंदिर को तोड़कर उसकी जगह रजिया सà¥à¤²à¥à¤¤à¤¾à¤¨à¤¾ नामक मसà¥à¤œà¤¿à¤¦ बनाई। बनारस को लूट कर १४०० ऊंटों पर लूट का माल ले जाया गया।
१५९१ से १५९६ का समय बनारस के लिठकà¥à¤› रहत लाया जिसमे अकबर से शासन में बनारस में कà¥à¤› मंदिरों का निरà¥à¤®à¤¾à¤£ किया गया। उसी समय आमेर के राजा मान सिंह ने विशà¥à¤µà¥‡à¤¶à¥à¤µà¤° मंदिर को समरà¥à¤ªà¤¿à¤¤ à¤à¤• मंदिर का निरà¥à¤®à¤¾à¤£ करवाया जिसे मान मंदिर का नाम दिया गया। यह मंदिर उसी रजिया सà¥à¤²à¥à¤¤à¤¾à¤¨à¤¾ मसà¥à¤œà¤¿à¤¦ के पास बनाया गया। १५८० में राजा टोडरमल ने जगदà¥à¤—à¥à¤°à¥ नारायण à¤à¤Ÿà¥à¤Ÿ के कहने पर विशà¥à¤µà¥‡à¤¶à¥à¤µà¤° मंदिर का फिर से निरà¥à¤®à¤¾à¤£ फिर से करवाया।
फिर आया मà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤® आकà¥à¤°à¤¾à¤‚ता व लà¥à¤Ÿà¥‡à¤°à¥‡ अलà¥à¤²à¤¾à¤‰à¤¦à¥à¤¦à¥€à¤¨ खिलज़ी का राज, उस के समय में वाराणसी के मंदिरों में पूजा पाठकरने वाले हिनà¥à¤¦à¥‚ पà¥à¤œà¤¾à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ पर मà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤® अधिकारीयों का अतà¥à¤¯à¤¾à¤šà¤¾à¤° शà¥à¤°à¥‚ हà¥à¤† उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने पà¥à¤œà¤¾à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ और पंडितों को परेशान करना व मंदिरों से à¤à¤¾à¤—ना शà¥à¤°à¥‚ किया। इस बात की जानकारी हिनà¥à¤¦à¥‚ पà¥à¤œà¤¾à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ ने अलà¥à¤²à¤¾à¤‰à¤¦à¥à¤¦à¥€à¤¨ खिलज़ी तक पहà¥à¤‚चाई जिस के बाद अलà¥à¤²à¤¾à¤‰à¤¦à¥à¤¦à¥€à¤¨ खिलज़ी ने २८ फरवरी १६५९ को à¤à¤• फरमान जारी किया कि हिनà¥à¤¦à¥‚ पà¥à¤°à¤¾à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को परेशान ना किया जाये। इसके साथ ही साथ उसने फरमान में ये à¤à¥€ आदेश दिया कि आगे से कोई नया हिनà¥à¤¦à¥‚ मंदिर नहीं बनाया जाये।
अलà¥à¤²à¤¾à¤‰à¤¦à¥à¤¦à¥€à¤¨ की यह महानता वाली नौटंकी जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ ना चल पाई और साल १६५९ के अंत में उसने ६ से à¥à¤µà¥€ शताबà¥à¤¦à¥€ पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥‡ कीरà¥à¤¤à¤¿ विशà¥à¤µà¥‡à¤¶à¥à¤µà¤° मंदिर को तोड़ कर गिरा दिया और उसके मलबे से उसी सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर आलमगीर मसà¥à¤œà¤¿à¤¦ का निरà¥à¤®à¤¾à¤£ करवाया। यह आलमगीर मसà¥à¤œà¤¿à¤¦ रतà¥à¤¨à¥‡à¤¶à¥à¤µà¤° मंदिर के बगल में बनवाई गई जहां आज à¤à¥€ निरà¥à¤®à¤¾à¤£ की तारीख की जगह अरबी à¤à¤¾à¤·à¤¾ में १६५९ अंकित है।
साल १९६९ की ९ अपà¥à¤°à¥ˆà¤² की तारीख, उस दिन अलà¥à¤²à¤¾à¤‰à¤¦à¥à¤¦à¥€à¤¨ खिलज़ी ने फिर से à¤à¤• नया फरमान जारी कर बनारस के फौजदार को यह आदेश दिया की बनारस के सà¤à¥€ मंदिर व शिकà¥à¤·à¤£ संसà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥‹à¤‚ को गिरा दिया जाये। इस फरमान के आदेश का पालन करते हà¥à¤ बनारस के फौजदार ने सैकड़ों मंदिर व शिकà¥à¤·à¤£ संसà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥‹à¤‚ को गिरा दिया जिनमे पà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¦à¥à¤¦ काशी विशà¥à¤µà¤¨à¤¾à¤¥ मंदिर व बिंदà¥à¤®à¤¾à¤§à¤µ मंदिर à¤à¥€ शामिल थे। विशà¥à¤µà¤¨à¤¾à¤¥ मंदिर के सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर à¤à¤• मसà¥à¤œà¤¿à¤¦ बनवाई गई जिसमे दो ऊà¤à¤šà¥€ मीनारें बनवाई गई। इसके उपरांत अलà¥à¤²à¤¾à¤‰à¤¦à¥à¤¦à¥€à¤¨ खिलज़ी ने बनारस के नाम को बदल कर मà¥à¤¹à¤®à¥à¤®à¤¦à¤¾à¤¬à¤¾à¤¦ कर दिया था। बाद में वह के सिकà¥à¤•ों पर à¤à¥€ यही नाम अंकित करवाया गया।
यही विशà¥à¤µà¤¨à¤¾à¤¥ मंदिर के सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर बनी मसà¥à¤œà¤¿à¤¦ जà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤µà¤¾à¤ªà¥€ मसà¥à¤œà¤¿à¤¦ के नाम से जानी जाती है। इस पूरी जानकारी को बनारस के डिसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¿à¤• गजेटियर १९६५ में खà¥à¤¦ कांगà¥à¤°à¥‡à¤¸ सरकार ने पà¥à¤°à¤•ाशित करवाया था जो की सरकारी रूप से à¤à¤• पà¥à¤–à¥à¤¤à¤¾ सबूत है इस पà¥à¤°à¥‡ मामले में हिनà¥à¤¦à¥‚ पकà¥à¤· को सही साबित करने के लिà¤à¥¤
इस पà¥à¤°à¥‡ मà¥à¤¦à¥à¤¦à¥‡ पर अदालत का कà¥à¤¯à¤¾ रà¥à¤– रहता है और सरà¥à¤µà¥‡ रिपोरà¥à¤Ÿ आम आदमी को मिलने के बाद देश में कà¥à¤¯à¤¾ माहौल बनता है ये तो समय ही बताà¤à¤—ा।
I am Gagan Singh Shekhawat, a renowned online marketer with extensive experience and expertise in internet marketing. Beyond my professional career, I have always carried a deep desire to unfold the majestic and mystical glory of India and share it with the world. From this vision, the foundation of ‘Our Society’ was born-an initiative that is truly my brainchild.
Through Our Society, I strive to cover every aspect of India’s identity-be it social, cultural, political, or historical-leaving no stone unturned. I firmly believe in the power of blogging to inspire and create impact, and with this belief, I introduced the unique concept of Our Society to help people discover and experience the magnificent heritage and essence of India.
?????? ?? ??? ?? ?????? ?? ???? ??????? ?????? ?? ??? ???? ?? ???? ???…
हिंदू धरà¥à¤® में गंगा नदी को केवल जलधारा नहीं, बलà¥à¤•ि देवी सà¥à¤µà¤°à¥‚प 'मां गंगा' के…
जयपà¥à¤°, 3 अगसà¥à¤¤à¥¤ रविवार को होटल अमर पैलेस, अजमेर रोड, जयपà¥à¤° में पारंपरिक रंगों से…
पनà¥à¤¨à¤¾ धाय खींची चौहान वीर राजपूत कनà¥à¤¯à¤¾ थी। मेवाड़ के महाराणा संगà¥à¤°à¤¾à¤®à¤¸à¤¿à¤‚ह की मृतà¥à¤¯à¥ के…
बांकावती लिवाण के कछवाहा राजा आननà¥à¤¦à¤°à¤¾à¤¯ की पà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ थी। इसका विवाह किशनगढ़ के महाराजा राजसिंह…
महोबे के वीर शà¥à¤°à¥‡à¤·à¥à¤ यशोराज सिंह की पतà¥à¤¨à¥€ देवलदेवी सà¥à¤µà¤¯à¤‚ à¤à¤• वीरांगना थी। महोबे के…