मेवाड़ के महाराणा समरसिंह की पà¥à¤°à¤¥à¤® रानी पृथा अपने पति के साथ सती हो गयी। दूसरी रानी करà¥à¤®à¤¦à¥‡à¤µà¥€ (करà¥à¤£à¤¾à¤µà¤¤à¥€) थी जो महाराणा समरसिंह के नाबालिग पà¥à¤¤à¥à¤° की संरकà¥à¤·à¤¿à¤•ा बनी। रानी करà¥à¤®à¤¦à¥‡à¤µà¥€ बहà¥à¤¤ ही वीर और साहसी नारी थी। पति की मृतà¥à¤¯à¥ के उपरानà¥à¤¤ पतà¥à¤¨à¥€ का जीवन कषà¥à¤Ÿ का परà¥à¤¯à¤¾à¤¯ कहा जाता है फिर à¤à¥€ समय का तकाजा देखते हà¥à¤ करà¥à¤®à¤¦à¥‡à¤µà¥€ ने इस कषà¥à¤Ÿà¤¦à¤¾à¤¯à¤• जीवन को सहरà¥à¤· सà¥à¤µà¥€à¤•ार किया, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि इसी में उसके पà¥à¤¤à¥à¤° करà¥à¤£ का हित था। पà¥à¤¤à¥à¤° के हित हेतॠमाठसे बढ़कर तà¥à¤¯à¤¾à¤— करने वाला संसार में दूसरा कोई नहीं होता है।
राजमाता करà¥à¤®à¤¦à¥‡à¤µà¥€ मेवाड़ के सारे राजà¥à¤¯-कारà¥à¤¯ को à¤à¤²à¥€ पà¥à¤°à¤•ार संà¤à¤¾à¤² रही थी। महाराणा समरसिंह की मृतà¥à¤¯à¥ के पशà¥à¤šà¤¾à¤¤à¥ मेवाड़ की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ को कमजोर समठकर राजà¥à¤¯-विसà¥à¤¤à¤¾à¤° के उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ से मोहमà¥à¤®à¤¦ गौरी के सेनापति कà¥à¤¤à¥à¤¬à¥à¤¦à¥à¤¦à¥€à¤¨ ने विशाल सेना के साथ आकà¥à¤°à¤®à¤£ कर दिया। मेवाड़ की राजà¥à¤¯ गदà¥à¤¦à¥€ पर नाबालिग महाराणा करà¥à¤£ की छोटी अवसà¥à¤¥à¤¾ को देखकर सà¤à¥€ राजपूत वीर चिनà¥à¤¤à¤¿à¤¤ थे।
‘मेवाड़ की रकà¥à¤·à¤¾ कैसे होगी’ मेवाड़ के सिपाहियों में वà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ इस चिनà¥à¤¤à¤¾ से सेनापति ने जब राजमाता करà¥à¤®à¤¦à¥‡à¤µà¥€ को अवगत कराया तो वह सिंहनी की à¤à¤¾à¤‚ति गरज उठी — “वीर-पà¥à¤°à¤¸à¤µà¤¿à¤¨à¥€ मेवाड़ à¤à¥‚मि के रकà¥à¤·à¤•ों में यह आशंका कैसे पैदा हो गयी सेनापतिजी ! मातृ-à¤à¥‚मि की रकà¥à¤·à¤¾à¤°à¥à¤¥ यहां के वीर हà¤à¤¸à¤¤à¥‡-हà¤à¤¸à¤¤à¥‡ अपने पà¥à¤°à¤¾à¤£à¥‹à¤‚ की बलि देने में गौरव समà¤à¤¤à¥‡ हैं, उसकी रकà¥à¤·à¤¾ के लिठचिनà¥à¤¤à¤¿à¤¤ होने की कोई आवशà¥à¤¯à¤•ता नहीं। करà¥à¤£ अà¤à¥€ छोटा है तो कà¥à¤¯à¤¾ हà¥à¤†, महाराणा साहब आज हमारे बीच में नहीं है तो कà¥à¤¯à¤¾ हà¥à¤†, उनकी वीर पतà¥à¤¨à¥€, मैं, तो अà¤à¥€ जीवित हूà¤à¥¤ आप जाइये और यà¥à¤¦à¥à¤§ की तैयारी कीजिये, मैं सà¥à¤µà¤¯à¤‚ शतà¥à¤°à¥à¤¦à¤² से लोहा लूंगी। करà¥à¤®à¤¦à¥‡à¤µà¥€ के होते मेवाड़ को कोई कमजोर न समà¤à¥‡à¥¤”
करà¥à¤®à¤¦à¥‡à¤µà¥€ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ सैनà¥à¤¯-संचालन से मेवाड़ी वीरों में अदमà¥à¤¯ साहस और उतà¥à¤¸à¤¾à¤¹ à¤à¤° गया। रणरंग में उनà¥à¤®à¤¤à¥à¤¤ राजपूत वीरों के समà¥à¤®à¥à¤– आकà¥à¤°à¤®à¤£à¤•ारी अधिक समय तक टिक नहीं सके। वीरांगना करà¥à¤®à¤¦à¥‡à¤µà¥€ ने मेवाड़ को रकà¥à¤·à¤¾ कर उसकी आन पर आंच नहीं आने दी।
डा.विकà¥à¤°à¤®à¤¸à¤¿à¤‚ह राठौड़,गà¥à¤¨à¥à¤¦à¥‹à¤œ
राजसà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥€ शोध संसà¥à¤¥à¤¾à¤¨, चोपासनी, जोधपà¥à¤°
यदि आप à¤à¤¸à¥€ गà¥à¤£à¤µà¤¤à¥€ व पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤à¤¾à¤µà¤¾à¤¨ कनà¥à¤¯à¤¾ के लिठसà¥à¤¯à¥‹à¤—à¥à¤¯ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤à¤¾à¤¶à¤¾à¤²à¥€ वर की तलाश में है तो आज ही राजशाही विवाह – Rajput Matrimonial Website पर अपना पंजीयन निशà¥à¤²à¥à¤• करवायें।
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पनà¥à¤¨à¤¾ धाय खींची चौहान वीर राजपूत कनà¥à¤¯à¤¾ थी। मेवाड़ के महाराणा संगà¥à¤°à¤¾à¤®à¤¸à¤¿à¤‚ह की मृतà¥à¤¯à¥ के…
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