माहिषà¥à¤®à¤¤à¥€ के राजा नीलधà¥à¤µà¤œ की महारानी जना वीर पà¥à¤°à¤µà¥€à¤° की जननी थी। पà¥à¤°à¤µà¥€à¤° ने चकà¥à¤°à¤µà¤°à¥à¤¤à¥€ यà¥à¤§à¤¿à¤·à¥à¤ िर के अशà¥à¤µà¥’ के माहिषà¥à¤ªà¤¤à¥€ नगरी की सीमा में पà¥à¤°à¤µà¥‡à¤¶ करते ही पकड़ लिया । अशà¥à¤µ पकड़ने का समाचार पाकर नीलधà¥à¤µà¤œ ने अपने पà¥à¤¤à¥à¤° पà¥à¤°à¤µà¥€à¤° को बà¥à¤²à¤¾ कर डांटते हà¥à¤ कहा–“पà¥à¤°à¤µà¥€à¤° ! तà¥à¤®à¤¨à¥‡ अजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¤à¤¾à¤µà¤¦à¤¾ जिस अशà¥à¤µ को पकड़ा है उसे छोड़ दो । वह अशà¥à¤µ यà¥à¤§à¤¿à¤·à¥à¤ िर का है जो चकà¥à¤°à¤µà¤°à¥à¤¤à¥€ महाराजा हैं, अरà¥à¤œà¥à¤¨ जैसे उनके à¤à¤¾à¤ˆ हैं, जिनसे तू यà¥à¤¦à¥à¤§ करने का दà¥à¤¸à¥à¤¸à¤¾à¤¹à¤¸Â नहीं कर सकता । तà¥à¤®à¤¨à¥‡ यदि अशà¥à¤µ को नहीं छोड़ा तो तà¥à¤® मेरी तथा समसà¥à¤¤ शूरों की मृतà¥à¤¯à¥ का कारण बनोगे। सारा राजà¥à¤¯ नषà¥à¤Ÿ हो जायेगा। अतः अब à¤à¥€ समय है, मेरी सलाह मानो और अपनी मूरà¥à¤–ता छोड़ो ।â€
अपने पिता की बात सà¥à¤¨à¤•र पà¥à¤°à¤µà¥€à¤° दà¥à¤–ी हà¥à¤† असमंजस में पड़ गया कि मैं अब कà¥à¤¯à¤¾ करू । अशà¥à¤µ यदि नहीं पकड़ा होता तो और बात थी पर अब पकड़कर उसे छोड़ना कायरता का परिचय देना है । उसने अपनी मन:सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ माता जना को बतायी । उस तेजोमयी कà¥à¤·à¤¤à¥à¤°à¤¾à¤£à¥€ ने अपने पà¥à¤¤à¥à¤° को दà¥à¤µà¤¿à¤§à¤¾ से उबारा । उसे अपने कतंवà¥à¤¯ पथ पर निःसंकोच बढ़ने हेतॠपà¥à¤°à¥‹à¤¤à¥à¤¸à¤¾à¤¹à¤¿à¤¤ करते हà¥à¤ कहा–
“बेटा ! तà¥à¤®à¤¨à¥‡ यह जो कà¥à¤·à¤¤à¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤šà¤¿à¤¤ कारà¥à¤¯ किया है, वह ठीक हैं। इसके लिठकिसी पà¥à¤°à¤•ार का पशà¥à¤šà¤¾à¤¤à¤¾à¤ª करने की आवशà¥à¤¯à¤•ता नहीं । कà¥à¤·à¤¤à¥à¤°à¤¿à¤¯ पà¥à¤¤à¥à¤° मृतà¥à¤¯à¥ से à¤à¤¯à¤à¥€à¤¤ नहीं हà¥à¤† करते । यà¥à¤¦à¥à¤§ में मरकर कà¥à¤·à¤¤à¥à¤°à¤¿à¤¯ वह गति पाता है. जो योगी को पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ होती है । चà¥à¤¨à¥Œà¤¤à¥€ पाकर कोई वीर à¤à¤²à¤¾ कैसे शानà¥à¤¤ रह सकता है । बेटे ! तूने आज मेरे दूध की लाज रख ली। में तà¥à¤-सा पà¥à¤¤à¥à¤° पाकर सचमà¥à¤š आज धनà¥à¤¯ हà¥à¤ˆ हूं । जा तू यà¥à¤¦à¥à¤§ के लिठतैयार हो, तेरे पिता ने जो कà¥à¤› कहा उसका बà¥à¤°à¤¾ मत मान, अपने करà¥à¤¤à¤µà¥à¤¯ का निरà¥à¤µà¤¾à¤¹ कर ।â€
महारानी जना ने इसके पशà¥à¤šà¤¾à¤¤à¥â€Œ अपने पति राजा नीलधà¥à¤µà¤œ को खरी-खरी सà¥à¤¨à¤¾à¤¤à¥‡ हà¥à¤ कहा–“महाराज ! लगता है, आपके रकà¥à¤¤ में कà¥à¤·à¤¤à¥à¤°à¤¿à¤¯ के योगà¥à¤¯ उषà¥à¤£à¤¤à¤¾ शेष नहीं बची । आप में यह à¤à¥€à¤°à¥à¤¤à¤¾ कैसे वà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ हो गयी । अरà¥à¤œà¥à¤¨ के नाम से आप इतने à¤à¤¯à¤à¥€à¤¤ कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ दो रहे हैं । पà¥à¤¤à¥à¤° ने जिस अशà¥à¤µ को पकड़ा है उसे अरà¥à¤œà¥à¤¨ को सौंपकर अपने पà¥à¤°à¤¾à¤£ बचाइये, अपना राजà¥à¤¯ बचाइये, इसी में आप अपनी पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤ ा मानते हैं तो अपनी पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤ ा की रकà¥à¤·à¤¾ कीजिये ।â€
अपनी रानी जना की वà¥à¤¯à¤‚गà¥à¤¯à¤ªà¥‚रà¥à¤£ बातें सà¥à¤¨à¤•र राजा नीलधà¥à¤µà¤œ ने बताया–‘मैं à¤à¥€à¤°à¥ नहीं हूà¤à¥¤ कà¥à¤·à¤¤à¥à¤°à¤¿à¤¯ का कà¥à¤¯à¤¾ करà¥à¤¤à¤µà¥à¤¯ होता है, वह मà¥à¤à¥‡ जà¥à¤žà¤¾à¤¤ है । अरà¥à¤œà¥à¤¨ यदि अकेला अशà¥à¤µ के साथ होता तो कोई बात नहीं पर मेरे आराधà¥à¤¯ शà¥à¤°à¥€à¤•ृषà¥à¤£ à¤à¥€ तो साथ हैं, उन पर शसà¥à¤¤à¥à¤° पà¥à¤°à¤¹à¤¾à¤° कैसे कर सकता हूठ।â€
जना ने पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥à¤¤à¥à¤¤à¤° में कहा–“कà¥à¤·à¤¤à¥à¤°à¤¿à¤¯ के लिठà¤à¤—वानà¥â€Œ ने जो धरà¥à¤® निशà¥à¤šà¤¿à¤¤ कर दिया है उसका पालन ही अपने आराधà¥à¤¯ की सचà¥à¤šà¥€ आराधना है । कà¥à¤·à¤¾à¤¤à¥à¤°à¤§à¤°à¥à¤® का परितà¥à¤¯à¤¾à¤— कर यदि आप अपने आराधà¥à¤¯ को सनà¥à¤¤à¥à¤·à¥à¤Ÿ करने की आशया रखते हैं तो यह वà¥à¤¯à¤°à¥à¤¥ है । आपको अपने धरà¥à¤® पर अविचल देखकर सà¥à¤µà¤¯à¤‚ शà¥à¤°à¥€à¤•ृषà¥à¤£ पà¥à¤°à¤¸à¤¨à¥à¤¨ और सनà¥à¤¤à¥à¤·à¥à¤Ÿ होंगे । आज उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ अपने à¤à¤•à¥à¤¤ के बाण पà¥à¤·à¥à¤ªà¥‹à¤‚ से à¤à¥€ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ कोमल पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤¤ होंगे । आप संशय का तà¥à¤¯à¤¾à¤— कीजिये और आपके आराधà¥à¤¯ जो पूजा गà¥à¤°à¤¹à¤£ करने आ गये हैं, उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ उसी पूजा अरà¥à¤¥à¤¾à¤¤ यà¥à¤¦à¥à¤§ से सेवित कर कृत-कृतà¥à¤¯ होइये ।â€
अपनी रानी जना के पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤£à¤¾à¤¦à¤¾à¤¯à¥€ वचनों से राजा नीलधà¥à¤µà¤œ बड़े पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ हà¥à¤ । उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ अपनी पतà¥à¤¨à¥€ की बात सतà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤¤ हà¥à¤ˆ । अब उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने विचार बदल कर यà¥à¤¦à¥à¤§ की घोषणा कर दी । यà¥à¤µà¤°à¤¾à¤œ पà¥à¤°à¤µà¥€à¤° के नेतृतà¥à¤µ में माहिषà¥à¤®à¤¤à¥€ की सेना ने घनघोर यà¥à¤¦à¥à¤§ किया और यà¥à¤µà¤°à¤¾à¤œ पà¥à¤°à¤µà¥€à¤°Â अरà¥à¤œà¥à¤¨ से यà¥à¤¦à¥à¤§ करता हà¥à¤† वीरगति को पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ हà¥à¤† । अरà¥à¤œà¥à¤¨ ने यà¥à¤¦à¥à¤§ रोक दिया । राजा नीलधà¥à¤µà¤œ अरà¥à¤œà¥à¤¨ से जाकर मिलता है और अरà¥à¤œà¥à¤¨Â को अशà¥à¤µ उपहार रूप में à¤à¥‡à¤‚ट करता है । महारानी जना, जो कà¥à¤·à¤¤à¥à¤°à¤¿à¤¤à¥à¤µ की साकà¥à¤·à¤¾à¤¤à¥â€Œ मूति थी, इस अपमान को कैसे सहन कर सकती थी कि उसके पà¥à¤¤à¥à¤° का शव तो अà¤à¥€ रणà¤à¥‚ंमि में पड़ा है और उसके पिता उसका पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¥‹à¤§ लेने की बजाय शतà¥à¤°à¥ का सà¥à¤µà¤¾à¤—त कर रहे हैं, उपहार पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ कर रहे हैं । राजà¤à¤µà¤¨ से निकलकर वह सीधी गंगा के किनारे पहà¥à¤à¤šà¥€ और उसकी गोद में अपने आपको समरà¥à¤ªà¤¿à¤¤ कर अपनी हृदयागà¥à¤¨à¤¿ को शानà¥à¤¤ किया ।
I am Gagan Singh Shekhawat, a renowned online marketer with extensive experience and expertise in internet marketing. Beyond my professional career, I have always carried a deep desire to unfold the majestic and mystical glory of India and share it with the world. From this vision, the foundation of ‘Our Society’ was born-an initiative that is truly my brainchild.
Through Our Society, I strive to cover every aspect of India’s identity-be it social, cultural, political, or historical-leaving no stone unturned. I firmly believe in the power of blogging to inspire and create impact, and with this belief, I introduced the unique concept of Our Society to help people discover and experience the magnificent heritage and essence of India.
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