रानी चेनà¥à¤¨à¤®à¥à¤®à¤¾ का जनà¥à¤® 23 अकà¥à¤Ÿà¥‚बर 1778 को à¤à¤¾à¤°à¤¤ के करà¥à¤¨à¤¾à¤Ÿà¤• राजà¥à¤¯ के कितà¥à¤¤à¥‚र नामक सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर हà¥à¤† था। वह à¤à¤• पà¥à¤°à¤®à¥à¤– à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ सà¥à¤µà¤¤à¤‚तà¥à¤°à¤¤à¤¾ संगà¥à¤°à¤¾à¤® सैनानी और महिला सामà¥à¤°à¤¾à¤œà¥à¤žà¥€ थीं, जिनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने अपने दृढ़ संकलà¥à¤ª और बहादà¥à¤°à¥€ के साथ बà¥à¤°à¤¿à¤Ÿà¤¿à¤¶ सामà¥à¤°à¤¾à¤œà¥à¤¯ के खिलाफ संघरà¥à¤· किया।
रानी चेनà¥à¤¨à¤®à¥à¤®à¤¾ का परिवार à¤à¤• पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ और माननीय राजवंश से संबंधित था। उनका जनà¥à¤® हà¥à¤† तो उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ à¤à¤• बलिदानी सà¥à¤µà¤°à¥à¤ªà¤¿à¤£à¥€ बनने का मौका मिला। १५ साल की उमà¥à¤° में उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कितà¥à¤¤à¥‚र के राजा मलà¥à¤²à¤¸à¤°à¥à¤œà¤¾ देसाई से विवाह किया। जब १८१६ में पति मलà¥à¤²à¤¸à¤°à¥à¤œà¤¾ व १८२४ में पà¥à¤¤à¥à¤° का देहांत हà¥à¤† तो, उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कितà¥à¤¤à¥‚र की सिंघनी बनकर संगà¥à¤°à¤¾à¤® का नेतृतà¥à¤µ किया। तब रानी चेनà¥à¤¨à¤®à¥à¤®à¤¾ के सामने à¤à¤• कठिन चà¥à¤¨à¥Œà¤¤à¥€ थी। उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ या तो राजवंश को जारी रखने के लिठà¤à¤• उतà¥à¤¤à¤°à¤¾à¤§à¤¿à¤•ारी को गोद लेना था, या फिर बà¥à¤°à¤¿à¤Ÿà¤¿à¤¶ कंपनी के सामने हार माननी पड़ती। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने पहले विकलà¥à¤ª को चà¥à¤¨à¤¾à¥¤ 1824 में, उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने à¤à¤• छोटे से लड़के को गोद लिया, जिसका नाम शिवलिंगपà¥à¤ªà¤¾ था, लेकिन इससे इंडिया कंपनी को उनके खिलाफ गà¥à¤¸à¥à¤¸à¤¾ आ गया।
रानी चेनà¥à¤¨à¤®à¥à¤®à¤¾ का बà¥à¤°à¤¿à¤Ÿà¤¿à¤¶ सामà¥à¤°à¤¾à¤œà¥à¤¯ के खिलाफ संघरà¥à¤· 1824 में आरंठहà¥à¤†, जब उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने बà¥à¤°à¤¿à¤Ÿà¤¿à¤¶ कंपनी के आकà¥à¤°à¤®à¤£ का सामना किया। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने अपने सैनà¥à¤¯ के साथ संघरà¥à¤· किया और बà¥à¤°à¤¿à¤Ÿà¤¿à¤¶ कंपनी के लिठबड़ी चà¥à¤¨à¥Œà¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का सामना किया।
रानी चेनà¥à¤¨à¤®à¥à¤®à¤¾ के महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ कारà¥à¤¯à¥‹à¤‚ में से à¤à¤• उनकी महाराषà¥à¤Ÿà¥à¤° के पेशवा बाजीराव पेशवा के साथ मिलकर किया गया संघरà¥à¤· था। इस संघरà¥à¤· में वे बà¥à¤°à¤¿à¤Ÿà¤¿à¤¶ कंपनी के खिलाफ संगà¥à¤°à¤¾à¤® का नेतृतà¥à¤µ करती रहीं और कितà¥à¤¤à¥‚र के लिठसà¥à¤µà¤¤à¤‚तà¥à¤°à¤¤à¤¾ की लड़ाई जारी रखीं।
कितà¥à¤¤à¥‚र के राजà¥à¤¯ को à¤à¤• रियासत के रूप में न खोने की इचà¥à¤›à¤¾ से, उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने बà¥à¤°à¤¿à¤Ÿà¤¿à¤¶ कंपनी के खिलाफ चà¥à¤¨à¥Œà¤¤à¥€ दी। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने 21 अकà¥à¤Ÿà¥‚बर 1824 को à¤à¤• हमले का सामना किया, जिसमें उनके पास 20,000 सैनिक और 400 बंदूकें थीं। वे à¤à¤• बार में उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ संà¤à¤¾à¤² लिया, लेकिन उनका दूसरा पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ असफल रहा, और उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ बैलहोंगल किले में जीवनकाल के लिठकैद कर लिया गया।
कितà¥à¤¤à¥‚र की रानी चेनà¥à¤¨à¤®à¥à¤®à¤¾ ने बà¥à¤°à¤¿à¤Ÿà¤¿à¤¶ कंपनी के खिलाफ अपनी आतà¥à¤®à¤¾ की आजादी के लिठलड़ते हà¥à¤ 1829 में अपनी शौरà¥à¤¯à¤—ाथा का अंत किया। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने बà¥à¤°à¤¿à¤Ÿà¤¿à¤¶ कंपनी के साथ हà¥à¤ विदà¥à¤°à¥‹à¤¹ में अपनी जान दी।
रानी चेनà¥à¤¨à¤®à¥à¤®à¤¾ का योगदान सà¥à¤µà¤¤à¤‚तà¥à¤°à¤¤à¤¾ संगà¥à¤°à¤¾à¤® के इतिहास में महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ है, और उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ सà¥à¤µà¤¤à¤‚तà¥à¤°à¤¤à¤¾ संगà¥à¤°à¤¾à¤® की à¤à¤• महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ योदà¥à¤§à¤¾ के रूप में याद किया जाता है। उनकी वीरता, साहस और आतà¥à¤®à¤¾ की पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤ ा आज à¤à¥€ हमारे देश के इतिहास में दीपà¥à¤¤à¤¿ बिखेरती हैं।
I am Gagan Singh Shekhawat, a renowned online marketer with extensive experience and expertise in internet marketing. Beyond my professional career, I have always carried a deep desire to unfold the majestic and mystical glory of India and share it with the world. From this vision, the foundation of ‘Our Society’ was born-an initiative that is truly my brainchild.
Through Our Society, I strive to cover every aspect of India’s identity-be it social, cultural, political, or historical-leaving no stone unturned. I firmly believe in the power of blogging to inspire and create impact, and with this belief, I introduced the unique concept of Our Society to help people discover and experience the magnificent heritage and essence of India.
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