वाकपà¥à¤·à¥à¤Ÿà¤¾ काशà¥à¤®à¥€à¤° के पà¥à¤°à¤¤à¤¾à¤ªà¥€ राजा तà¥à¤œà¥€à¤¨ की रानी थी। राजा तà¥à¤œà¥€à¤¨ ने पà¥à¤°à¤œà¤¾ के हित में बहà¥à¤¤ से कारà¥à¤¯ किये । रानी वाकपà¥à¤·à¥à¤Ÿà¤¾ à¤à¥€ बड़ी दयालॠऔर परोपकारिणी थी। पà¥à¤°à¤œà¤¾ को वह सनà¥à¤¤à¤¾à¤¨à¤µà¤¤à¥ समà¤à¤¤à¥€ थी और उसके दà¥à¤– निवारण को सदा ततà¥à¤ªà¤° रहती थी।
à¤à¤• बार सरà¥à¤¦à¥€ की ऋतॠमें अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• बरà¥à¤« गिरने से सारी फसलें नषà¥à¤Ÿ हो गयीं और काशà¥à¤®à¥€à¤° में à¤à¤¯à¤‚कर अकाल पड़ गया । लोग दाने-दाने को तरसने लगे । à¤à¥‚ख से तड़फ-तड़फ कर काल-कवलित होने लगे। चारों ओर काल की à¤à¤¯à¤‚कर विà¤à¥€à¤·à¤¿à¤•ा के कारण हाहाकार मच गया। राजा तà¥à¤œà¥€à¤¨ और रानी वाकपà¥à¤·à¥à¤Ÿà¤¾ ने अपनी पà¥à¤°à¤œà¤¾ का आरà¥à¤¤à¤¨à¤¾à¤¦ सà¥à¤¨à¤¾ और यह हाल देखा तो उनका हृदय विदीरà¥à¤£ हो गया। पà¥à¤°à¤œà¤¾ की सहायता के लिठराजकोष खाली कर दिया और राजà¥à¤¯ की समà¥à¤ªà¥‚रà¥à¤£ समà¥à¤ªà¤¤à¥à¤¤à¤¿ अकाल पीडित जनता के लिठखरà¥à¤š कर दी। इतना ही नहीं राजा और रानी खà¥à¤¦ गांव-गांव घूम-घूम कर पीड़ितों को अतà¥à¤° बांटने व à¤à¥‚खों को à¤à¥‹à¤œà¤¨ कराने के कारà¥à¤¯ में जà¥à¤Ÿ गये।
खजाना खाली हो गया। अनà¥à¤¨ के à¤à¤£à¥à¤¡à¤¾à¤° समापà¥à¤¤ हो गये और अब पà¥à¤°à¤œà¤¾ का à¤à¥‚ख से तड़फ-तड़फ कर मरने के सिवा और कोई चारा नहीं रहा । यह पीड़ाजनक दृशà¥à¤¯ देखकर राजा तà¥à¤œà¥€à¤¨ का धैरà¥à¤¯ टूट गया । उसने अपनी रानी से कहा- “मेरे सामने मेरी पà¥à¤°à¤œà¤¾ à¤à¥‚ख और पà¥à¤¯à¤¾à¤¸ से तड़फ-तड़फ कर मर रही है, खजाना व अनà¥à¤¨ के à¤à¤£à¥à¤¡à¤¾à¤° खाली हैं, à¤à¤¸à¥€ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में मैं जीवित नहीं रहना चाहता।” रानी वाकपà¥à¤·à¥à¤Ÿà¤¾ ने राजा की वà¥à¤¯à¤¥à¤¾ को समà¤à¤¤à¥‡ हà¥à¤ और धैरà¥à¤¯ बंधाते हà¥à¤ कहा-“सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ ! आतà¥à¤®à¤¹à¤¤à¥à¤¯à¤¾ करना वीर पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ को शोà¤à¤¾ नहीं देता । पà¥à¤°à¤œà¤¾-पालन करना हमारा धरà¥à¤® है और जब हम सà¥à¤µà¤¯à¤‚ अपने को समापà¥à¤¤ कर देंगे तो पà¥à¤°à¤œà¤¾ का पालन और उसकी रकà¥à¤·à¤¾ का पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ कौन करेगा।” इस पà¥à¤°à¤•ार आतà¥à¤®à¤¹à¤¤à¥à¤¯à¤¾ के लिठउदà¥à¤¯à¤¤ अपने पति को रानी वाकपà¥à¤·à¥à¤Ÿà¤¾ ने रोका । ईशà¥à¤µà¤°-कृपा से अकाल का पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ समापà¥à¤¤ हà¥à¤†à¥¤ वह कषà¥à¤Ÿà¤•ारी समय बीत गया पर उस काल में रानी वाकपà¥à¤·à¥à¤Ÿà¤¾ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ किये गये ये दया और पà¥à¤£à¥à¤¯ के कारà¥à¤¯ सदियों बाद à¤à¥€ याद किये जाते हैं।
खजाना खाली हो गया। अनà¥à¤¨ के à¤à¤£à¥à¤¡à¤¾à¤° समापà¥à¤¤ हो गये और अब पà¥à¤°à¤œà¤¾ का à¤à¥‚ख से तड़फ-तड़फ कर मरने के सिवा और कोई चारा नहीं रहा । यह पीड़ाजनक दृशà¥à¤¯ देखकर राजा तà¥à¤œà¥€à¤¨ का धैरà¥à¤¯ टूट गया । उसने अपनी रानी से कहा- “मेरे सामने मेरी पà¥à¤°à¤œà¤¾ à¤à¥‚ख और पà¥à¤¯à¤¾à¤¸ से तड़फ-तड़फ कर मर रही है, खजाना व अनà¥à¤¨ के à¤à¤£à¥à¤¡à¤¾à¤° खाली हैं, à¤à¤¸à¥€ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में मैं जीवित नहीं रहना चाहता।” रानी वाकपà¥à¤·à¥à¤Ÿà¤¾ ने राजा की वà¥à¤¯à¤¥à¤¾ को समà¤à¤¤à¥‡ हà¥à¤ और धैरà¥à¤¯ बंधाते हà¥à¤ कहा-“सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ ! आतà¥à¤®à¤¹à¤¤à¥à¤¯à¤¾ करना वीर पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ को शोà¤à¤¾ नहीं देता । पà¥à¤°à¤œà¤¾-पालन करना हमारा धरà¥à¤® है और जब हम सà¥à¤µà¤¯à¤‚ अपने को समापà¥à¤¤ कर देंगे तो पà¥à¤°à¤œà¤¾ का पालन और उसकी रकà¥à¤·à¤¾ का पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ कौन करेगा।” इस पà¥à¤°à¤•ार आतà¥à¤®à¤¹à¤¤à¥à¤¯à¤¾ के लिठउदà¥à¤¯à¤¤ अपने पति को रानी वाकपà¥à¤·à¥à¤Ÿà¤¾ ने रोका । ईशà¥à¤µà¤°-कृपा से अकाल का पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ समापà¥à¤¤ हà¥à¤†à¥¤ वह कषà¥à¤Ÿà¤•ारी समय बीत गया पर उस काल में रानी वाकपà¥à¤·à¥à¤Ÿà¤¾ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ किये गये ये दया और पà¥à¤£à¥à¤¯ के कारà¥à¤¯ सदियों बाद à¤à¥€ याद किये जाते हैं।
Note: पà¥à¤°à¤•ाशित चितà¥à¤° पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤•ातà¥à¤®à¤• है
Mr. Gagan Singh Shekhawat is a renowned online marketer with an exceptional caliber. With extensive experience in internet marketing, Mr. Singh always wanted to unfold the majestic and mystical glory of India and share it with others across the world. And, here the foundation of ‘Our Society’ took place. Our society is the brain child of Mr. Gagan Singh Shekhawat. Whether it is social, cultural, political, and historical or anything else, we’ve not left any stone unturned. I strongly believe that blogging can do wonder and therefore, i came up with unique concept of ‘Our Society’ to help you unveiling the magnificent glory of India.
