विदरà¥à¤à¤°à¤¾à¤œ की कनà¥à¤¯à¤¾ लोपामà¥à¤¦à¥à¤°à¤¾ का जनà¥à¤® राजकà¥à¤² में हà¥à¤† था। लोपामà¥à¤¦à¥à¤°à¤¾ महरà¥à¤·à¤¿ अगसà¥à¤¤à¥à¤¯ की सहधरà¥à¤®à¤¿à¤£à¥€ बनी। बालà¥à¤¯à¤•ाल से ही जो सà¥à¤– à¤à¥‹à¤—ों में पली और राजकीय वैà¤à¤µ में जिसका अब तक का जीवन वà¥à¤¯à¤¤à¥€à¤¤ हà¥à¤†, अपने पति की आजà¥à¤žà¤¾ पाते ही कà¥à¤·à¤£ à¤à¤° में बहà¥à¤®à¥‚लà¥à¤¯ वसà¥à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚, आà¤à¥‚षणों और समसà¥à¤¤ वैà¤à¤µ पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨ की वसà¥à¤¤à¥à¤“ं का परितà¥à¤¯à¤¾à¤— कर दिया। राज महिषी अब तपसà¥à¤µà¤¿à¤¨à¥€ बन चà¥à¤•ी थी। अपने पति के समान ही वà¥à¤°à¤¤ à¤à¤µà¤® नियमों का पालन करती हà¥à¤ˆ लोपामà¥à¤¦à¥à¤°à¤¾ तन-मन से पति की अनà¥à¤—ामिनी बन गई। अपने आचरण और वà¥à¤¯à¤µà¥à¤¹à¤¾à¤° के कारण लोपामà¥à¤¦à¥à¤°à¤¾ की गणना अरà¥à¤¨à¥à¤§à¤¤à¥€, सावितà¥à¤°à¥€, अनसूया, सà¥à¤¨à¥€à¤¤à¤¿ आदि पà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¦à¥à¤§ पतिवà¥à¤°à¤¤à¤¾ नारियों में होती है।
लोपामà¥à¤¦à¥à¤°à¤¾ के आचरण के समà¥à¤¬à¤¨à¥à¤§ में देवताओं के गà¥à¤°à¥ महरà¥à¤·à¤¿ वृहसà¥à¤ªà¤¤à¤¿ ने अगसà¥à¤¤à¥à¤¯ ऋषि के समà¥à¤®à¥à¤– जो उदà¥à¤—ार पà¥à¤°à¤•ट किये वे पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ नारी के लिठधà¥à¤¯à¤¾à¤¨ देने योगà¥à¤¯ है और à¤à¤• कà¥à¤·à¤¤à¥à¤°à¤¿à¤¯ नारी की समसà¥à¤¤ गरिमा को उजागर करने वाले है —
महरà¥à¤·à¤¿ वृहसà¥à¤ªà¤¤à¤¿ ने कहा –“हे मà¥à¤¨à¤¿à¤µà¤° ! आपकी सहधरà¥à¤®à¤¿à¤£à¥€ लोपामà¥à¤¦à¥à¤°à¤¾ बड़ी पतिवà¥à¤°à¤¤à¤¾ है। यह कलà¥à¤¯à¤¾à¤£à¥€ शरीर की छाया की à¤à¤¾à¤‚ति सदैव आपका अनà¥à¤¸à¤°à¤£ करती है। इसकी चरà¥à¤šà¤¾ पूणà¥à¤¯ देने वाली है। आपके à¤à¥‹à¤œà¤¨ कर लेने के उपरानà¥à¤¤ अनà¥à¤¨ गà¥à¤°à¤¹à¤£ करती है, आपके सोने के पशà¥à¤šà¤¾à¤¤ सोती है और आपके जागने से पहले जग जाती है। आपकी अनà¥à¤ªà¤¸à¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में आà¤à¥‚षणों को छूती तक नहीं है। आपकी आयॠबढ़े, इसके लिठयह कà¤à¥€ आपका नाम अपनी जबान पर नहीं लाती। सतीतà¥à¤µ रकà¥à¤·à¤¾ के लिये पर-पà¥à¤°à¥à¤· का सà¥à¤®à¤°à¤£ तक नहीं करती। आपकी कठोर बात को à¤à¥€ शानà¥à¤¤à¤¿ से सहन कर लेती है, उसका बà¥à¤°à¤¾ नहीं मानती। सदैव आपकी मनोकामना को पूरà¥à¤£ करने हेतॠसेवाà¤à¤¾à¤µ से ततà¥à¤ªà¤° रहती है। आपको पà¥à¤°à¤¸à¤¨à¥à¤¨ करने की हमेशा कोशिश करती है। यह कà¤à¥€ घर के दà¥à¤µà¤¾à¤° पर बहà¥à¤¤ देर तक खड़ी नहीं होती। दरवाजे पर कà¤à¥€ नहीं बैठा करती और आपकी आजà¥à¤žà¤¾ के बिना किसी को कोई वसà¥à¤¤à¥ नहीं दिया करती ।
“कà¥à¤¤à¤°à¥à¤• करने वाली, दà¥à¤°à¤¾à¤šà¤¾à¤°à¤¿à¤£à¥€, करà¥à¤•शा, पति से दà¥à¤µà¥‡à¤· रखने वाली इतà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¿ दà¥à¤°à¥à¤—à¥à¤£à¥‹à¤‚ से यà¥à¤•à¥à¤¤ असंसà¥à¤•ारित सà¥à¤¤à¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ से न कà¤à¥€ बात करती है और न ही इनसे मैतà¥à¤°à¥€ सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¿à¤¤ करती है, अकेली कहीं नहीं जाती है। ओखली, मà¥à¤¸à¤², à¤à¤¾à¤¡à¤¼à¥‚, सिल, देहली इतà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¿ पर नहीं बैठा करती है। किसी की निंदा नहीं करती, कलह नहीं करती । आपके हरà¥à¤·, विषाद की सहà¤à¤¾à¤—िनी है तथा आपको ही परमेशà¥à¤µà¤° का रूप मानकर सदा सेवारत रहती है।”
सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ अपने पति की सचà¥à¤šà¥‡ मन से सेवा करे, पति की आजà¥à¤žà¤¾ का उलà¥à¤²à¤‚घन न करे यही उसका सबसे बढ़ा वà¥à¤°à¤¤ है, परम धरà¥à¤® है और इससे बढ़कर उसके लिठऔर कोई देवपूजा नहीं हो सकती। अपने पति की हर सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में सहायक हो, उसका कà¤à¥€ परितà¥à¤¯à¤¾à¤— न करे चाहे वो कैसा à¤à¥€ हो कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि पति ही उसके लिठदेवता, पति ही धरà¥à¤®, पति ही तीरà¥à¤¥ और सबसे बड़ा व पà¥à¤£à¥à¤¯à¤¦à¤¾à¤¯à¥€ वà¥à¤°à¤¤ है। जिस तरह छाया शारीर का, चांदनी चनà¥à¤¦à¥à¤°à¤®à¤¾ का तथा बिजली मेघ का अनà¥à¤¸à¤°à¤£ करती है उसी à¤à¤¾à¤‚ति सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ सदा अपने पति का अनà¥à¤¸à¤°à¤£ करती रहे, पति के जीवन और मरण में उसकी सहचरी बनी रहे। इस तरह की कई बातें पतिवà¥à¤°à¤¤à¤¾ नारी की विशेषता के रूप में हमारे धरà¥à¤®à¤¶à¤¾à¤¸à¥à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ में दरà¥à¤¶à¤¾à¤¯à¥€ गई है। à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ नारी के जो सदियों से आदरà¥à¤¶ रहे है उनकी साकà¥à¤·à¤¾à¤¤à¥ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤®à¥‚रà¥à¤¤à¤¿ है –लोपामà¥à¤¦à¥à¤°à¤¾à¥¤ वासà¥à¤¤à¤µ में गृहसà¥à¤¥ वही है जिसके घर में पतिवà¥à¤°à¤¤à¤¾ सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ है।
आज हमारे देश में पà¥à¤°à¤¾à¤¯: सà¤à¥€ समाज की नारियों में घर-घर में अपने रूप और लावणà¥à¤¯ पर गरà¥à¤µ करने वाली सà¥à¤¤à¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ की संखà¥à¤¯à¤¾ दिनों-दिन बढती जा रही है। आधà¥à¤¨à¤¿à¤•ता के नाम पर वे जो कà¥à¤› सà¥à¤µà¥€à¤•ार कर रही है उसकी उपादेयता से वे संà¤à¤µà¤¤: अनà¤à¤¿à¤œà¥à¤ž है। à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ संसà¥à¤•ृति में नारी की महतà¥à¤¤à¤¾ का विशेष सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ रहा है। उन पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ संसà¥à¤•ारों को वà¥à¤¯à¤µà¤¹à¤¾à¤° में लाने की आवशà¥à¤¯à¤•ता है और उनकी उपयोगिता को समà¤à¤¾ जाना चाहिà¤; केवल पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨à¤¤à¤¾ के नाम पर उसका परितà¥à¤¯à¤¾à¤— करना समà¤à¤¦à¤¾à¤°à¥€ नहीं है। कà¥à¤·à¤¤à¥à¤°à¤¿à¤¯ समाज में आज à¤à¥€ à¤à¤¸à¥€ नारियां सà¤à¤µà¤¤: अनà¥à¤¯ समाजों से अधिक संखà¥à¤¯à¤¾ में मिलेगी जिनके आचरण में लोपामà¥à¤¦à¥à¤°à¤¾ के संसà¥à¤•ारों की छाप सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ à¤à¤²à¤•ती है। à¤à¤¸à¥€ लोपामà¥à¤¦à¥à¤°à¤¾ अधिक संखà¥à¤¯à¤¾ में नहीं मिलती, à¤à¤—वान की असीम कृपा से मिला करती है। नारी का यहाठसमà¥à¤šà¤¿à¤¤ समà¥à¤®à¤¾à¤¨ होता है। राजपूत समाज में आज à¤à¥€ नारी को जो समà¥à¤®à¤¾à¤¨ दिया जाता है वह अनà¥à¤•रणीय है। पति à¤à¥€ अपनी पतà¥à¤¨à¥€ को आदर सूचक जातीय विशेषण से पà¥à¤•ारते है।
By: [googleplusauthor]
I am Gagan Singh Shekhawat, a renowned online marketer with extensive experience and expertise in internet marketing. Beyond my professional career, I have always carried a deep desire to unfold the majestic and mystical glory of India and share it with the world. From this vision, the foundation of ‘Our Society’ was born-an initiative that is truly my brainchild.
Through Our Society, I strive to cover every aspect of India’s identity-be it social, cultural, political, or historical-leaving no stone unturned. I firmly believe in the power of blogging to inspire and create impact, and with this belief, I introduced the unique concept of Our Society to help people discover and experience the magnificent heritage and essence of India.
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