बà¥à¤°à¤¹à¥à¤®à¤¾à¤µà¤°à¥à¤¤ देश के अधिपति महाराज सà¥à¤µà¤¾à¤¯à¤®à¥à¤à¥à¤µ मनॠकी लावणà¥à¤¯à¤®à¤¯à¥€ पà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ देवहूति बड़ी गà¥à¤£à¤¶à¥€à¤²à¤¾ थी । देवहूति की माता का नाम शतरूपा था । à¤à¤¾à¤°à¤¤à¤µà¤°à¥à¤· के समà¥à¤°à¤¾à¤Ÿ महाराज मनॠकी पà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ देवहूति का बचपन राजवैà¤à¤µ और à¤à¤¶à¥à¤µà¤°à¥à¤¯ के वातावरण में बीता । फिर à¤à¥€ राजकà¥à¤®à¤¾à¤°à¥€ देवहूति इसके पà¥à¤°à¤¤à¤¿ आसकà¥à¤¤ नहीं थी । देवहूति को तà¥à¤¯à¤¾à¤—, तपसà¥à¤¯à¤¾ और सादगीपूरà¥à¤£ जीवन बहà¥à¤¤ पà¥à¤°à¤¿à¤¯ था । धरà¥à¤®à¤œà¥à¤ž मनॠकी पà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ का धरà¥à¤® के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ अनà¥à¤°à¤¾à¤— होना सà¥à¤µà¤¾à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤• ही था । महाराजा मनॠके सातà¥à¤µà¤¿à¤• और धारà¥à¤®à¤¿à¤• विचारों का संà¤à¤µà¤¤: देवहूति पर बहà¥à¤¤ अधिक पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ पड़ा और इसी के परिणाम सà¥à¤µà¤°à¥à¤ª सांसारिक सà¥à¤–ों के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ वह आकृषà¥à¤Ÿ नहीं हà¥à¤ˆ । उसने आतà¥à¤® कलà¥à¤¯à¤¾à¤£ का मारà¥à¤— अपनाया ।
à¤à¤• समà¥à¤°à¤¾à¤Ÿ की राजकà¥à¤®à¤¾à¤°à¥€ के लिठकिसी पà¥à¤°à¤•ार का कोई अà¤à¤¾à¤µ न था । उसकी हर इचà¥à¤›à¤¾ की पूरà¥à¤¤à¤¿ ततà¥à¤•ाल हो जाती थी, केवल इचà¥à¤›à¤¾ जाहिर करने की देर थी । वह चाहती तो अपने लिठयोगà¥à¤¯ और à¤à¤¶à¥à¤µà¤°à¥à¤¯à¤¶à¤¾à¤²à¥€ पति के साथ विवाह कर सà¥à¤– से अपना जीवन बिता सकती थी । मनà¥à¤·à¥à¤¯ तो कà¥à¤¯à¤¾ कई गंधरà¥à¤µ, नाग, यकà¥à¤· और देवता à¤à¥€ उस अपà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤® रूपवान राजकà¥à¤®à¤¾à¤°à¥€ से विवाह करने को लालायित थे परनà¥à¤¤à¥ देवहूति ने अपने लिठकिसी देवता या पराकà¥à¤°à¤®à¥€ राजा की बजाय तपसà¥à¤µà¥€ को पति चà¥à¤¨à¤¾ ।
जीवन के शासà¥à¤µà¤¤ सतà¥à¤¯ की पहचान देवहूति को हो चà¥à¤•ी थी । देवहà¥à¤¤à¤¿ का मानना था कि — “यह मनà¥à¤·à¥à¤¯ जीवन à¤à¥‹à¤— विलास के लिठनहीं मिला है । मानव-à¤à¥‹à¤—ों से सà¥à¤µà¤°à¥à¤— का à¤à¥‹à¤— उतà¥à¤•ृषà¥à¤Ÿ माना गया है किनà¥à¤¤à¥ वह à¤à¥€ चिरसà¥à¤¥à¤¾à¤¯à¥€ नहीं है, अनà¥à¤¤ में दà¥à¤ƒà¤– देने वाला है । मोकà¥à¤·-साधक à¤à¤• शारीर को विशयà¤à¥‹à¤—ों में लगाकर जरà¥à¤œà¤° बनाना à¤à¤¾à¤°à¥€ à¤à¥‚ल है । सांसारिक à¤à¤¶à¥à¤µà¤°à¥à¤¯ चिर सà¥à¤–दायी नहीं हà¥à¤† करता । मनà¥à¤·à¥à¤¯ को चिर सà¥à¤– पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤à¤¿ का पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ करना चाहिठऔर यह चिर-सà¥à¤– à¤à¤—वद पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤à¤¿ से ही संà¤à¤µ है । यही देहधारियों की शाशà¥à¤µà¤¤ सिदà¥à¤§à¤¿ है जिससे ममता, मोह, आसकà¥à¤¤à¤¿, और जनà¥à¤®-मरण के बनà¥à¤§à¤¨à¥‹à¤‚ से जीव मà¥à¤•à¥à¤¤ हो जाता है । आतà¥à¤® कलà¥à¤¯à¤¾à¤£ ही जीवन का चिर उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ है”।
à¤à¤¸à¥‡ उचà¥à¤š विचार रखने वाली कà¥à¤·à¤¤à¥à¤°à¤¿à¤¯ बाला देवहूति अनà¥à¤¯ राजकà¥à¤®à¤¾à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ से à¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¤à¥à¤µ रखती थी । वैरागà¥à¤¯ जà¥à¤žà¤¾à¤¨ की पिपासॠऔर आतà¥à¤®à¤œà¥à¤žà¤¾à¤¨ की उस साधिका ने महरà¥à¤·à¤¿ करà¥à¤¦à¤® को पति रूप में सà¥à¤µà¥€à¤•ारा । देवहूति के गरà¥à¤ से नौं कनà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ हà¥à¤ˆ जिनमे सती अनसूया (महरà¥à¤·à¤¿ अतà¥à¤°à¤¿ की पतà¥à¤¨à¥€ ) और सती अरà¥à¤¨à¥à¤§à¤¤à¥€ (महरà¥à¤·à¤¿ वशिषà¥à¤ की पतà¥à¤¨à¥€) à¤à¥€ शामिल है ।
देवहूति के गरà¥à¤ से à¤à¤—वान कपिल ने अवतार गà¥à¤°à¤¹à¤£ किया और अपने पिता करà¥à¤¦à¤® को उपदेश दिया । à¤à¤—वान कपिल दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ योग, जà¥à¤žà¤¾à¤¨, à¤à¤•à¥à¤¤à¤¿ और सांखà¥à¤¯à¤®à¤¤ माता देवहूति को बतलाया गया और इस मारà¥à¤— का अनà¥à¤¸à¤°à¤£ करते हà¥à¤ देवहूति ने परमाननà¥à¤¦ नितà¥à¤¯à¤®à¥à¤•à¥à¤¤ शà¥à¤°à¥€à¤à¤—वान को पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ कर अपने जीवन का चरम लकà¥à¤·à¥à¤¯ पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ किया ।
देवी देवहà¥à¤¤à¤¿ à¤à¤¾à¤°à¤¤à¤µà¤°à¥à¤· की महान विà¤à¥‚ति थी । उनके आतà¥à¤®à¤•लà¥à¤¯à¤¾à¤£ और वैरागà¥à¤¯à¤¯à¥à¤•à¥à¤¤ वचनों व विचारों ने सदियों तक यहाठके लोगों पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ किया । अनेक ऋषि-मà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ ने इन तथà¥à¤¯à¤ªà¤°à¤• बातों का आलोडन-विलोडन कर सà¥à¤®à¥ƒà¤¤à¤¿, पà¥à¤°à¤¾à¤£ इतà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¿ धरà¥à¤® गà¥à¤°à¤‚थों में आतà¥à¤®à¤•लà¥à¤¯à¤¾à¤£ के लिठजो उपदेश दिठउससे यहाठकी जनता लाà¤à¤¾à¤¨à¥à¤µà¤¿à¤¤ होती रही और आज à¤à¥€ वे उपदेश उपयोगी और हितकारी माने जाते है । देवहूति की à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤® जगत में तो महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ देन है ही, à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ संसà¥à¤•ृति के शासà¥à¤µà¤¤ ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ के निरà¥à¤®à¤¾à¤£ में जो उसकी महती à¤à¥‚मिका रही है वह à¤à¥€ अविसà¥à¤®à¤°à¤¨à¥€à¤¯ है ।
By: [googleplusauthor]
I am Gagan Singh Shekhawat, a renowned online marketer with extensive experience and expertise in internet marketing. Beyond my professional career, I have always carried a deep desire to unfold the majestic and mystical glory of India and share it with the world. From this vision, the foundation of ‘Our Society’ was born-an initiative that is truly my brainchild.
Through Our Society, I strive to cover every aspect of India’s identity-be it social, cultural, political, or historical-leaving no stone unturned. I firmly believe in the power of blogging to inspire and create impact, and with this belief, I introduced the unique concept of Our Society to help people discover and experience the magnificent heritage and essence of India.
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