History of Rathore Rajputs
राठौड़ गोतà¥à¤° उतà¥à¤¤à¤° à¤à¤¾à¤°à¤¤ में निवास करने वाले à¤à¤• राजपूत गोतà¥à¤° हैं और राठौड़ राजपूतों की उतà¥à¤ªà¤¤à¥à¤¤à¤¿ सूरà¥à¤¯à¤µà¤‚शी राजा के राठ(रीढ़) से हà¥à¤ˆ है, और इसी कारण उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ “राठोड़” कहा जाता है। वे अपने को à¤à¤—वान राम के कनिषà¥à¤ पà¥à¤¤à¥à¤° कà¥à¤¶ के वंशज के रूप में पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤ करते हैं, इस वजह से उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ सूरà¥à¤¯à¤µà¤‚शी कà¥à¤² से ही माना जाता है। इस वंश की करà¥à¤¨à¤¾à¤Ÿ और कनà¥à¤¨à¥Œà¤œ राजधानियाठमानी जाती है। संसà¥à¤•ृत लेखों और गà¥à¤°à¤‚थों के आधार पर, राठौड़ों को “राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤•ूट” à¤à¥€ लिखा गया है। कहीं-कहीं इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ “रटà¥à¤Ÿ” या “राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤¡” à¤à¥€ कहा गया है। राठौड़ शबà¥à¤¦ का पà¥à¤°à¤¾à¤•ृतिक रूप “राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤•ूट” था, जो किसी सरकारी पद का नाम था। इनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ काल से राजसà¥à¤¥à¤¾à¤¨ के उतà¥à¤¤à¤°-पशà¥à¤šà¤¿à¤®à¥€ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में मारवाड़ में शासन किया और उनका पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ निवास सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ कनà¥à¤¨à¥Œà¤œ में था। जब वे लगà¤à¤— 1243 ईसा पूरà¥à¤µ में मारवाड़ आà¤, तो उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने यहां अपने शासन की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ की।
राठौड़ों के मूल सेतराग जी के पà¥à¤¤à¥à¤° राव सीहा जी थे, और मारवाड़ के राठौड़ उनके वंशज हैं। राव सीहा जी ने लगà¤à¤— 700 वरà¥à¤· पूरà¥à¤µ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¿à¤•ा यातà¥à¤°à¤¾ के दौरान मारवाड़ में आकर राठौड़ वंश की नींव रखी। वे राठौड़ गोतà¥à¤° के पà¥à¤°à¤®à¥à¤– पà¥à¤°à¥à¤· थे और राजपूत इतिहास में उनका विशेष महतà¥à¤µ है। राजसà¥à¤¥à¤¾à¤¨ के सà¤à¥€ राठौड़ गोतà¥à¤° के मूल पà¥à¤°à¥à¤· के रूप में राव सीहा जी को माना जाता है, जिनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने पाली से राज की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ की और उनके बाद उनकी छतरी पाली जिले के बिटॠगांव में बनाई गई है।
राव सीहा के वंशज चूणà¥à¤¡à¤¾ ने पहले मणà¥à¤¡à¥‹à¤° पर शासन किया और उनके पौतà¥à¤° जोधा ने जोधपà¥à¤° की सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¨à¤¾ की, तथा जोधपà¥à¤° को अपनी राजधानी बनाया। मà¥à¤—़ल समà¥à¤°à¤¾à¤Ÿà¥‹à¤‚ ने अपने यà¥à¤¦à¥à¤§à¥‹à¤‚ में आदि विजयों को “लाख तलवार राठोडान” कहा, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि उनकी तरफ से यà¥à¤¦à¥à¤§ के लिठपचास हजार की संखà¥à¤¯à¤¾ में तो सीहाजी के वंशज ही à¤à¤•तà¥à¤° हो जाते थे। यà¥à¤¦à¥à¤§ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में राठौड़ वंश के शासकों के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ दà¥à¤¶à¥à¤®à¤¨à¥‹ का वीरता और पराकà¥à¤°à¤® के साथ सामना करने की वजह से ही उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ रणबंका राठौड़ à¤à¥€ कहा जाता है। à¤à¤¾à¤°à¤¤ में आजादी से पूरà¥à¤µ जब रियासतों का विलय नहीं हà¥à¤† था तब अकेले राठौड़ो की रियासतों की संखà¥à¤¯à¤¾ दस से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ थी साथ ही कई सौ ताजमी ठिकाने à¤à¥€ थे जिनमे पà¥à¤°à¤®à¥à¤– जोधपà¥à¤°, मारवाड़, किशनगढ़, बीकानेर, ईडर, कà¥à¤¶à¤²à¤—ढ़, à¤à¤¾à¤¬à¥à¤†, सैलाना, सीतामउ, रतलाम, मांडा, अलीराजपà¥à¤° तथा पूरà¥à¤µ रियासतो में मेड़ता, मारोठऔर गोड़वाड़ घाणेराव आदि थे।
दारॠमीठी दाख री, सूरां मीठी शिकार।
सेजां मीठी कामिणी, तो रण मीठी तलवार।।
वà¥à¤°à¤œà¤¦à¥‡à¤¶à¤¾ चनà¥à¤¦à¤¨ वना, मेरà¥à¤ªà¤¹à¤¾à¤¡à¤¾ मोड़ !
गरà¥à¤¡à¤¼ खंगा लंका गढा, राजकà¥à¤² राठौड़ !!
दारॠपीवो रण चढो, राता राखो नैण।
बैरी थारा जल मरे, सà¥à¤– पावे ला सैण॥
राठौड़ वंश से जà¥à¤¡à¥€ कà¥à¤› अनà¥à¤¯ जानकारियां:
वेद – यजà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦
शाखा – दानेसरा
गोतà¥à¤° – कशà¥à¤¯à¤ª
गà¥à¤°à¥ – शà¥à¤°à¥€ शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤šà¤¾à¤°à¥à¤¯
देवी – नागà¥à¤¨à¥‡à¤šà¤¿à¤¯à¤¾ माता
परà¥à¤µà¤¤ – मरà¥à¤ªà¤¾à¤¤
नगारा – विरद रंणबंका
हाथी – मà¥à¤•ना
घोड़ा – पिला (सावकरà¥à¤£/शà¥à¤¯à¤¾à¤®à¤•रà¥à¤£)
घटा – तोप तमà¥à¤¬à¥‚
à¤à¤‚डा – गगनचà¥à¤®à¥à¤¬à¥€
साडी – नीम की
तलवार – रण कà¤à¤—ण
इषà¥à¤Ÿà¤¦à¥‡à¤µ – à¤à¤—वान शिव
तोप – दà¥à¤¨à¥à¤•ालà¥
धनà¥à¤· – वानà¥à¤¸à¤°à¥€
निकाश – शोणितपà¥à¤° (दानापà¥à¤°)
राठौड़ कà¥à¤² की कà¥à¤²à¤¦à¥‡à¤µà¥€ नागणेचिया माता:
कà¥à¤²à¤¦à¥‡à¤µà¥€ के रूप में राठौड़ कà¥à¤² में माता नागणेचिया जी को पूजा जाता है। सà¤à¥€ कारà¥à¤¯à¥‹à¤‚ में कà¥à¤²à¤¦à¥‡à¤µà¥€ माता नागणेचिया जी की आराधना आवशà¥à¤¯à¤• है। कà¥à¤²à¤¦à¥‡à¤µà¥€ माता नागणेचिया जी को चकà¥à¤°à¥‡à¤¶à¥à¤µà¤°à¥€, राठेशà¥à¤µà¤°à¥€ या नागणेची नाम से à¤à¥€ पूजा जाता है। राजसà¥à¤¥à¤¾à¤¨ के जोधपà¥à¤° जिले से करीब ९८ किलोमीटर दूर पचपदरा तहसील के नागाना गाà¤à¤µ में माता नागणेचिया जी का पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ मंदिर सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ है। तथा दूसरा मंदिर जोधपà¥à¤° के मेहरानगॠकिले की जननी डà¥à¤¯à¥‹à¥à¥€ में है। à¤à¤¤à¤¿à¤¹à¤¾à¤¸à¤¿à¤• गà¥à¤°à¤‚थों व पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ खà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥‹à¤‚ में वरà¥à¤£à¤¿à¤¤ है कि मारवाड़ के राठौड़ राजà¥à¤¯ के संसà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤• राव सिनà¥à¤¹à¤¾ के पौतà¥à¤° राव धूहड़ ने शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ में नागाना गाà¤à¤µ में इस मंदिर में माता कि मूरà¥à¤¤à¤¿ कि सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¨à¤¾ कि थी। राव धूहड़ का शासन काल विकà¥à¤°à¤® संवत १३४९ से १३६६ माना जाता है। राठौड़ कà¥à¤² के राजपूतों के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ नीम के वृकà¥à¤· को काटा या जलाया नहीं जाता है जिसकी वजह गांवों में नागणेचिया जी माता का सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ नीम के वृकà¥à¤· के निचे होना होता है।
राठौड़ों का पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ इतिहास :
अयोधà¥à¤¯à¤¾ में राजा सà¥à¤®à¤¿à¤¤à¥à¤° को शà¥à¤°à¥€ राम के पà¥à¤¤à¥à¤° कà¥à¤¶ के कà¥à¤² का अंतिम राजा माना जाता है। उसके बाद अयोधà¥à¤¯à¤¾ राजà¥à¤¯ को मगध सामà¥à¤°à¤¾à¤œà¥à¤¯ में महापदà¥à¤®à¤¨à¤‚द ने मिला लिया जो कि नंदवंश के राजा थे। बडà¥à¤µà¥‹à¤‚ के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ हसà¥à¤¤à¤²à¤¿à¤–ित बहियों तथा à¤à¤¤à¤¿à¤¹à¤¾à¤¸à¤¿à¤• साहितà¥à¤¯à¤¿à¤• सà¥à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤¤à¥‹à¤‚ से जो जानकारी मिलती है उसके अनà¥à¤¸à¤¾à¤° सà¥à¤®à¤¿à¤¤à¥à¤° के उपरांत इस कà¥à¤² में यशोविगà¥à¤°à¤¹ तक के पà¥à¤°à¤®à¥à¤– शासकों के नाम कि ही लिखित जानकारी है। इन जानकारियों के आधार पर यहाठमाना जाता है कि सà¥à¤®à¤¿à¤¤à¥à¤° के दो वशजों कूरà¥à¤® व विशà¥à¤µà¤°à¤¾à¤œ में कूरà¥à¤® के वंशज बिहार के रोहितास से निषिध, गà¥à¤µà¤¾à¤²à¤¿à¤¯à¤° तथा नरवर होते हà¥à¤ राजसà¥à¤¥à¤¾à¤¨ के आमेर में आये व यहाठकछवाहा राजपूत वंश के रूप में राज किया। वहीठदूसरी ओर विशà¥à¤µà¤°à¤¾à¤œ के वंशज मà¥à¤²à¤°à¤¾à¤¯ व राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤µà¤° के नाम से जाने गठव इनके कà¥à¤² के वंशज राठौड़ कहलाये।
इस पà¥à¤°à¤•ार राठौड़ वंश की बेल तरह खांपों के रूप में आगे बà¥à¥€, जिसकी जानकारी (सूरजवंश पà¥à¤°à¤•ाश-करणीदान पृ. 84 से 194) में मिलती है।
1. दानेशà¥à¤µà¤°à¤¾:
इस वंश में धरà¥à¤®à¤µà¤¿à¤®à¥à¤¬ नामक à¤à¤• दानी वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ हà¥à¤à¥¤ उनकी दानशीलता के कारन इनके वंशज दानेशà¥à¤µà¤°à¤¾ राठौड़ कहलाये। इनको कमधज नाम से à¤à¥€ जाना जाता था।
2. कà¥à¤°à¤¹à¤¾:
इस वंश में पà¥à¤‚ज के पà¥à¤¤à¥à¤° अमरविजय ने परमारों से यà¥à¤¦à¥à¤§ कर उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ हराकर कà¥à¤°à¤¹à¤—ढ़ को जीता। संà¤à¤µà¤¤à¤ƒ कà¥à¤°à¤¹ सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ के नाम से ही यहाठचली वंश वेल को कà¥à¤°à¤¹à¤¾ राठौड़ कहा गया।
3. अà¤à¥ˆà¤ªà¥à¤°à¤¾:
इसी वंश में पà¥à¤‚ज के दूसरे पà¥à¤¤à¥à¤° à¤à¤¾à¤¨à¥à¤¦à¥€à¤ª कांगड़ा (हिमाचल पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶) के शासक थे। देवी जà¥à¤µà¤¾à¤²à¤¾à¤®à¤¾à¤¤à¤¾ के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ अकाल के à¤à¤¯ से मà¥à¤•à¥à¤¤à¤¿ के वरदान के कारण उनकी वंशज अà¤à¥ˆà¤ªà¥à¤°à¤¾ राठौड़ कहलाये।
4. कपालिया:
इसी वंश में पà¥à¤‚ज के तीसरे पà¥à¤¤à¥à¤° वीरचंद हà¥à¤à¥¤ वीरचंद ने à¤à¤—वान शिव को अपना कपाल चढ़ा दिया था। इसी वजह से इनके वंशजों को कपालिया राठौड़ कहा गया।
5. जलखेड़ा:
तंवरों को परासà¥à¤¤ कर जलंधर की सहायता से जल पà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¹ में बहा देने के कारण पà¥à¤‚ज के पà¥à¤¤à¥à¤° सजनविनोद के वंशज जलखेड़ा राठौड़ कहलाये।
6. बà¥à¤—लाणा:
बà¥à¤—लाणा सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर शासन करने के कारण पà¥à¤‚ज के पà¥à¤¤à¥à¤° पदम वंशज बà¥à¤—लाणा राठौड़ कहाये गà¤à¥¤
7. अहर:
पà¥à¤‚ज के पà¥à¤¤à¥à¤° अहर के वंशज ‘बंगाल की तरफ चले गठजो कि अहर’ राठौड़ कहलाये।
8. पारकरा:
पà¥à¤‚ज के पà¥à¤¤à¥à¤° वासà¥à¤¦à¥‡à¤µ ने कनà¥à¤¨à¥Œà¤œ के नजदीक पारकरा नामक नगर बसाया व शासन किया इसलिठवहाठसे उसके वंशज पारकरा राठौड़ कहलाये।
9. चंदेल:
दकà¥à¤·à¤¿à¤£ à¤à¤¾à¤°à¤¤ में पà¥à¤‚ज के पà¥à¤¤à¥à¤° उगà¥à¤°à¤ªà¥à¤°à¤ ने चंदी व चंदावर नगर बसाये इसलिठचंदी सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ के नाम से उगà¥à¤°à¤ªà¥à¤°à¤ के वंशज चंदेल कहलाये। (ये चंदेल-चंदà¥à¤°à¤µà¤‚शी नहीं हैं।)
10. वीर:
इस वंश में सà¥à¤¬à¥à¤¦à¥à¤§à¤¿ नामक à¤à¤• बलवान शासक हà¥à¤† जो मà¥à¤•à¥à¤¤à¤¾à¤®à¤¾à¤¨ के नाम से à¤à¥€ जाना जाता है। वह बड़ा वीर था इसलिठइसे वीर की उपाधि दी गई। इसी वजह से इनके वंशज वीर राठौड़ कहलाये।
11. दरियावरा:
इस वंश के à¤à¤°à¤¤ नामक शासक ने बरियावर सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर राजà¥à¤¯ किया। उस सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ के नाम से à¤à¤°à¤¤ के वंशज बरियावर राठौड़ कहलाये।
12. खरोदिया:
कृपासिंधॠ(अनलकà¥à¤²) खरोदा सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर जाकर बसे इस वंश के वंशजों को सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ के नाम से खरोदिया राठौड़ कहा गया।
13. जयवंशी:
इस कà¥à¤› के शासक चंदà¥à¤° व इसके वंशज यà¥à¤¦à¥à¤§à¥‹à¤‚ में जय पाने के कारण जयवंशी कहलाये।
राजसà¥à¤¥à¤¾à¤¨ में राठौड़ों की खांपें और उनके ठिकाने
राठौड़ वंश कि तेरह खांपों में से दानेशà¥à¤µà¤°à¤¾ खांप के सीहाजी राठौड़ इस वंश को राजसà¥à¤¥à¤¾à¤¨ लाये अतः यहाठके राठौड़ इसी खांप से जाने जाते है। इस वंश में आगे चलकर जो शाखाà¤à¤ वंश बेल को आगे लेकर चली वे इस पà¥à¤°à¤•ार हैं –
1. ईडरिया राठौड़:
सीहाजी के पà¥à¤¤à¥à¤° सोगन ने ईडर पर अधिकार कर शासन किय। अतः सोगन के वंशज ईड़रिया राठौड़ ईडर के नाम से जाने गà¤à¥¤
2. हटà¥à¤£à¥à¤¡à¤¿à¤¯à¤¾ राठौड़:
सीहाजी के पà¥à¤¤à¥à¤° सोगन के वंशज हसà¥à¤¤à¤¿à¤•à¥à¤£à¥à¤¡à¥€ (हटूंडी) में रहे। वे हटà¥à¤£à¥à¤¡à¤¿à¤¯à¤¾ राठौड़ कहलाये। जोधपà¥à¤° इतिहास में ओà¤à¤¾ लिखते है कि सीहाजी से पहले हसà¥à¤¤à¤¿à¤•à¥à¤£à¥à¤¡à¥€ (हटकà¥à¤£à¥à¤¡à¥€) में राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤•ूट बालापà¥à¤°à¤¸à¤¾à¤¦ राज करता था। उसके वंशज हटà¥à¤£à¥à¤¡à¤¿à¤¯à¤¾ राठौड़ है।
3. बाढेल (बाढेर) राठौड़:
सीहाजी के छोटे पà¥à¤¤à¥à¤° अजाजी के दो पà¥à¤¤à¥à¤° बेरावली और बिजाजी ने दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤•ा के चावड़ों को बाढ़ कर (काट कर) दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤•ा (ओखा मणà¥à¤¡à¤²) पर अपना राजà¥à¤¯ कायम किया।इस कारण बेरावलजी के वंशज बाढेल राठौड़ हà¥à¤à¥¤ आजकल ये बाढेर राठौड़ कहलाते है। गà¥à¤œà¤°à¤¾à¤¤ में पोसीतरा, आरमंडा, बेट दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤•ा बाढेर राठौड़ो के ठिकाने थे।
4. बाजी राठौड़:
बेरावलजी के à¤à¤¾à¤ˆ बीजाजी के वंशज बाजी राठौड़ कहलाते है। गà¥à¤œà¤°à¤¾à¤¤ में महà¥à¤†, वडाना आदि इनके ठिकाने थे। बाजी राठौड़ आज à¤à¥€ गà¥à¤œà¤°à¤¾à¤¤ में ही बसते है।
5. खेड़ेचा राठौड़:
सीहा के पà¥à¤¤à¥à¤° आसà¥à¤¥à¤¾à¤¨ ने गà¥à¤¹à¤¿à¤²à¥‹à¤‚ से खेड़ जीता। खेड़ नाम से आसà¥à¤¥à¤¾à¤¨ के वंशज खेड़ेचा राठौड़ कहलाते है।
6. धà¥à¤¹à¤¡à¤¼à¤¿à¤¯à¤¾ राठौड़:
आसà¥à¤¥à¤¾à¤¨ के पà¥à¤¤à¥à¤° धà¥à¤¹à¤¡à¤¼ के वंशज धà¥à¤¹à¤¡à¤¼à¤¿à¤¯à¤¾ राठौड़ कहलाते है।
7. धांधल राठौड़:
आसà¥à¤¥à¤¾à¤¨ के पà¥à¤¤à¥à¤° धांधल के वंशज धांधल राठौड़ कहलाये। पाबूजी राठौड़ इसी खांप के थे। इनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने चारणी को दिये गये वचनानà¥à¤¸à¤¾à¤° पाणिगà¥à¤°à¤¹à¤£ संसà¥à¤•ार को बीच में छोड़ चारणी की गायों को बचाने के पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ में शतà¥à¤°à¥ से लड़ते हà¥à¤ वीर गति पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ की। यही पाबूजी लोक देवता के रूप में पूजे जाते हैं।
8. चाचक राठौड़:
आसà¥à¤¥à¤¾à¤¨ के पà¥à¤¤à¥à¤° चाचक के वंशज चाचक राठौड़ कहलाये।
9. हरखावत राठौड़:
आसà¥à¤¥à¤¾à¤¨ के पà¥à¤¤à¥à¤° हरखा के वंशज हरखावत राठौड़ कहलाये।
10. जोलू राठौड़:
आसà¥à¤¥à¤¾à¤¨ के पà¥à¤¤à¥à¤° जोपसा के पà¥à¤¤à¥à¤° जोलू के वंशज जोलू राठौड़ कहलाये।
11. सिंघल राठौड़:
जोपसा के पà¥à¤¤à¥à¤° सिंघल के वंशज सिंघल राठौड़ कहलाये। ये बड़े पराकà¥à¤°à¤®à¥€ हà¥à¤à¥¤ इनका जैतारण पर अधिकार था। जोधा के पà¥à¤¤à¥à¤° सूजा ने बड़ी मà¥à¤¶à¥à¤•िल से उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ वहां से हटाया।
12. ऊहड़ राठौड़:
जोपसा के पà¥à¤¤à¥à¤° ऊहड़ के वंशज ऊहड़ राठौड़ कहलाये।
13. मूलू राठौड़:
जोपसा के पà¥à¤¤à¥à¤° मूलू के वंशज मूलू राठौड़ कहलाये।
14. बरजोर राठौड़:
जोपसा के पà¥à¤¤à¥à¤° बरजोर के वंशज बरजोर राठौड़ कहलाये।
15. जोरावत राठौड़:
जोपसा के वंशज जोरावत राठौड़ कहलाये।
16. रैकवाल राठौड़:
जोपसा के पà¥à¤¤à¥à¤° राकाजी के वंशज है। ये मलà¥à¤²à¤¾à¤°à¤ªà¥à¤°, बाराबकी, रामनगर, बडनापà¥à¤°, बैहराइच (जि. रामपà¥à¤°) तथा सीतापà¥à¤° व अवध जिले (उ.पà¥à¤°.) में हैं। बोडी, रहका, मलà¥à¤²à¤¾à¤ªà¥à¤°, गोलिया कला, पलवारी, रामनगर, घसेड़ी, रायपà¥à¤° आदि गांव (उ.पà¥à¤°.) में थे।
17. बागड़िया राठौड़:
आसà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¤œà¥€ के पà¥à¤¤à¥à¤° जोपसा के पà¥à¤¤à¥à¤° रैका से रैकवाल हà¥à¤à¥¤ नौगासा बांसवाड़ा के à¤à¤• सà¥à¤¤à¤®à¥à¤ लेख बैशाख वदि 1361 में मालूम होता है कि रामा पà¥à¤¤à¥à¤° वीरम सà¥à¤µà¤°à¥à¤— सिधारा। ओà¤à¤¾à¤œà¥€ ने इसी वीरम के वंशजों को बागड़िया राठौड़ माना जाता है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि बांसवाड़ा का कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° बागड़ कहलाता था।
18. छपà¥à¤ªà¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ राठौड़:
मेवाड़ से सटा हà¥à¤† मारवाड़ की सीमा पर छपà¥à¤ªà¤¨ गांवों का कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° छपà¥à¤ªà¤¨ का कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° है। यहाठके राठौड़ छपà¥à¤ªà¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ राठौड़ कहलाये। यह खांप बागड़िया राठौड़ों से ही निकली है। उदयपà¥à¤° रियासत के कणतोड़ गांव की जागीर थी।
19. आसल राठौड़:
आसà¥à¤¥à¤¾à¤¨ के पà¥à¤¤à¥à¤° आसल के वंशज आसल राठौड़ कहलाये।
20. खोपसा राठौड़:
आसà¥à¤¥à¤¾à¤¨ के पà¥à¤¤à¥à¤° जोपसा के पà¥à¤¤à¥à¤° खीमसी के वंशज खोपसा राठौड़ कहलाये।
21. सिरवी राठौड़:
आसà¥à¤¥à¤¾à¤¨ के पà¥à¤¤à¥à¤° धà¥à¤¹à¤¡à¤¼ के पà¥à¤¤à¥à¤° शिवपाल के वंशज सिरवी राठौड़ कहलाये।
22. पीथड़ राठौड़:
आसà¥à¤¥à¤¾à¤¨ के पà¥à¤¤à¥à¤° धà¥à¤¹à¤¡à¤¼ के पà¥à¤¤à¥à¤° पीथड़ के वंशज पीथड़ राठौड़ कहलाये।
23. कोटेचा राठौड़:
आसà¥à¤¥à¤¾à¤¨ के पà¥à¤¤à¥à¤° धà¥à¤¹à¤¡à¤¼ के पà¥à¤¤à¥à¤° रायपाल हà¥à¤à¥¤ रायपाल के पà¥à¤¤à¥à¤° केलण के पà¥à¤¤à¥à¤° कोटा के वंशज कोटेचा हà¥à¤à¥¤ बीकानेर जिले में करणाचणà¥à¤¡à¥€à¤µà¤¾à¤², हरियाणा में नाथूसरी व à¤à¥‚चामणà¥à¤¡à¥€, पंजाब में रामसरा आदि इनके गांव है।
24. बहड़ राठौड़:
धà¥à¤¹à¤¡à¤¼ के पà¥à¤¤à¥à¤° बहड़ के वंशज बहड़ राठौड़ कहलाये।
25. ऊनड़ राठौड़:
धà¥à¤¹à¤¡à¤¼ के पà¥à¤¤à¥à¤° ऊनड़ के वंशज ऊनड़ राठौड़ कहलाये।
26. फिटक राठौड़:
रायपाल के पà¥à¤¤à¥à¤° केलण के पà¥à¤¤à¥à¤° थांथी के पà¥à¤¤à¥à¤° फिटक के वंशज फिटक राठौड़ हà¥à¤à¥¤
27. सà¥à¤£à¥à¤¡à¤¾ राठौड़:
रायपाल के पà¥à¤¤à¥à¤° सà¥à¤£à¥à¤¡à¤¾ के वंशज सà¥à¤£à¥à¤¡à¤¾ राठौड़ कहलाये।
28. महीपालोत राठौड़:
रायपाल के पà¥à¤¤à¥à¤° महिपाल के वंशज महीपालोत राठौड़ कहलाये।
29. शिवराजोत राठौड़:
रायपाल के पà¥à¤¤à¥à¤° शिवराज के वंशज शिवराजोत राठौड़ कहलाये।
30. डांगी:
रायपाल के पà¥à¤¤à¥à¤° डांगी के वंशज डांगी कहलाये। ढोलिन से शादी की अतः इनके वंशज डांगी ढोली हà¥à¤à¥¤
31. मोहणोत:
रायपाल के पà¥à¤¤à¥à¤° मोहण ने à¤à¤• महाजन की पà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ से शादी की। इस कारण मोहण के वंशज मà¥à¤¹à¤£à¥‹à¤¤ वैशà¥à¤¯ कहलाये। मà¥à¤¹à¤£à¥‹à¤¤ नैणसी इसी खांप से थे।
32. मापावत राठौड़:
रायपाल के वंशज मापा के वंशज मापावत राठौड़ कहलाये।
33. लूका राठौड़:
रायपाल के वंशज लूका के वंशज लूका राठौड़ कहलाये।
34. राजक राठौड़:
रायपाल के वंशज राजक के वंशज राजक राठौड़ कहलाये।
35. विकà¥à¤°à¤®à¤¾à¤¯à¤¤ राठौड़:
रायपाल के पà¥à¤¤à¥à¤° विकà¥à¤°à¤® के वंशज विकà¥à¤°à¤®à¤¾à¤¯à¤¤ राठौड़ कहलाये। (राजपूत वंशावली -ईशà¥à¤µà¤°à¤¸à¤¿à¤‚ह मढाढ ने रादां, मूपा और बूला à¤à¥€ रायपाल के पà¥à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ से निकली हà¥à¤ˆ खांपें मानी जाती है। )
36. à¤à¥‹à¤µà¥‹à¤¤ राठौड़:
रायपाल के पà¥à¤¤à¥à¤° à¤à¥‹à¤µà¤£ के वंशज à¤à¥‹à¤µà¥‹à¤¤ राठौड़ कहलाये।
37. बांदर राठौड़:
रायपाल के पà¥à¤¤à¥à¤° कानपाल हà¥à¤à¥¤ कानपाल के जालण और जालण के पà¥à¤¤à¥à¤° छाड़ा के पà¥à¤¤à¥à¤° बांदर के वंशज बांदर राठौड़ कहलाये। घड़सीसर (बीकानेर राजà¥à¤¯) में बताये जाते है।
38. ऊना राठौड़:
रायपाल के पà¥à¤¤à¥à¤° ऊना के वंशज ऊना राठौड़ कहलाये।
39. खोखर राठौड़:
छाड़ा के पà¥à¤¤à¥à¤° खोखर के वंशज खोखर राठौड़ कहलाये। खोखर ने साकड़ा, सनावड़ा आदि गांवों पर अधिकार किया और खोखर गांव (बाड़मेर) बसाया। अलाउदà¥à¤¦à¥€à¤¨ खिलजी ने सांतल दे के समय सिवाना पर चढ़ाई की तब खोखर जी सांतल दे के पकà¥à¤· में वीरता के साथ लड़े और यà¥à¤¦à¥à¤§ में काम आये।
40. सिंहमकलोत राठौड़:
छाड़ा के पà¥à¤¤à¥à¤° सिंहल के वंशज सिंहमकलोत राठौड़ कहलाये।
41. बीठवासा उदावत राठौड़:
रावल तीड़ा के पà¥à¤¤à¥à¤° कानड़दे के पà¥à¤¤à¥à¤° रावल के पà¥à¤¤à¥à¤° तà¥à¤°à¤¿à¤à¤µà¤¨ के पà¥à¤¤à¥à¤° उदा के ‘बीठवास’ जागीर था। अतः उदा के वंशज बीठवासिया उदावत कहलाये। उदाजी के पà¥à¤¤à¥à¤° बीरमजी बीकानेर रियासत के साहà¥à¤µà¥‡ गांव से आये। जोधाजी ने उनको बीठवासिया गांव की जागीर दी। इस गांव के अतिरिकà¥à¤¤ वेगडियो व धà¥à¤¨à¤¾à¤¡à¤¿à¤¯à¤¾ गांव à¤à¥€ इनकी जागीर में थे।
42. सलखावत राठौड़:
छांडा के पà¥à¤¤à¥à¤° तीड़ा के पà¥à¤¤à¥à¤° सलखा के वंशज सलखाखत राठौड़ कहलाये।
43. जैतमालोत राठौड़:
सलखा के पà¥à¤¤à¥à¤° जैतमाल के वंशज जैतमालोत राठौड़ कहलाये। ये बीकानेर रियासत में à¤à¥€ कहीं 2 निवास करते है।
44. जà¥à¤œà¤¾à¤£à¤¿à¤¯à¤¾ राठौड़:
जैतमाल सलखावत के पà¥à¤¤à¥à¤° खेतसी के वंशज है। गांव थापणा इनकी जागीर में था।
45. राड़धडा राठौड़:
जैतमाल के पà¥à¤¤à¥à¤° खींवा ने राड़धडा पर अधिकार किया। अतः उनके वंशज राड़धडा सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ के नाम से राड़धडा राठौड़ कहलाये।
46. महेचा राठौड़:
सलखा राठौड़ के पà¥à¤¤à¥à¤° मलà¥à¤²à¥€à¤¨à¤¾à¤¥ बड़े पà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¦à¥à¤§ हà¥à¤à¥¤ बाढ़मेर का महेवा कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° सलखा के पिता तीड़ा के अधिकार में था। वि. सं. १४१४ में मà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤® सेना का आकà¥à¤°à¤®à¤£ हà¥à¤†à¥¤ सलखा को कैद कर लिया गया। कैद से छà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ के बाद वि. सं. १४२२ में अपने शà¥à¤µà¤¸à¥à¤° राणा रूपसी पड़िहार की सहायता से महेवा को वापिस जीत लिया। वि. सं. १४३० में मà¥à¤¸à¤²à¤®à¤¾à¤¨à¥‹à¤‚ का फिर आकà¥à¤°à¤®à¤£ हà¥à¤†à¥¤ सलखा ने वीर गति पाई। सलखा के सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर माला (मलà¥à¤²à¤¿à¤¨à¤¾à¤¥ ) राजà¥à¤¯ हà¥à¤†à¥¤ इनà¥à¤¹à¥‹à¤¨à¥‡à¤‚ मà¥à¤¸à¤²à¤®à¤¾à¤¨à¥‹à¤‚ से सिवाना का किला जीता और अपने à¤à¤¾à¤ˆ जैतमाल को दे दिया व छोटे à¤à¤¾à¤ˆ वीरम को खेड़ की जागीर दी। नगर व à¤à¤¿à¤°à¤¡à¤¼à¤—ढ़ के किले à¤à¥€ मलà¥à¤²à¤¿à¤¨à¤¾à¤¥ ने अधिकार में किये। मलà¥à¤²à¤¿à¤¨à¤¾à¤¥ शकà¥à¤¤à¤¿ संचय कर राठौड़ राजà¥à¤¯ का विसà¥à¤¤à¤¾à¤° करने और हिनà¥à¤¦à¥‚ संसà¥à¤•ृति की रकà¥à¤·à¤¾ करने पर तà¥à¤²à¥‡ रहे। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने मà¥à¤¸à¤²à¤®à¤¾à¤¨ आकà¥à¤°à¤®à¤£à¥‹à¤‚ को विफल कर दिया। मलà¥à¤²à¤¿à¤¨à¤¾à¤¥ और उसकी रानी रूपादे, नाथ समà¥à¤ªà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¯ में दीकà¥à¤·à¤¿à¤¤ हà¥à¤ और ये दोनों सिदà¥à¤§ माने गà¤à¥¤ मलà¥à¤²à¤¿à¤¨à¤¾à¤¥ के जीवनकाल में ही उनके पà¥à¤¤à¥à¤° जगमाल को गदà¥à¤¦à¥€ मिल गई। जगमाल à¤à¥€ बड़े वीर थे। गà¥à¤œà¤°à¤¾à¤¤ का सà¥à¤²à¤¤à¤¾à¤¨ तीज पर इकटà¥à¤ ी हà¥à¤ˆ लड़कियों को हर ले गया तब जगमाल अपने योदà¥à¤§à¤¾à¤“ं के साथ गà¥à¤œà¤°à¤¾à¤¤ गया और गà¥à¤œà¤°à¤¾à¤¤ सà¥à¤²à¤¤à¤¾à¤¨ की पà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ गींदोली का हरण कर लिया। तब राठौड़ों और मà¥à¤¸à¤²à¤®à¤¾à¤¨à¥‹à¤‚ में यà¥à¤¦à¥à¤§ हà¥à¤†à¥¤ इस यà¥à¤¦à¥à¤§ में जगमाल ने बड़ी वीरता दिखाई। कहा जाता है कि सà¥à¤²à¤¤à¤¾à¤¨ की बीवी को तो यà¥à¤¦à¥à¤§ में जगह जगह जगमाल ही दिखाई देता था।
इस समà¥à¤¬à¤¨à¥à¤§ में à¤à¤• दोहा पà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¦à¥à¤§ है –
“पग पग नेजा पाडियां , पग पग पाड़ी ढाल।
बीबी पूछे खान नै , जंग किता जगमाल।।â€
इसी जगमाल का महेवा पर अधिकार था। इस कारण इनके वंशज महेचा कहलाते है। महेवा राठौड़ों की खांपें इस पà¥à¤°à¤•ार है:
पातावत महेचा:
जगमाल के पà¥à¤¤à¥à¤° रावल मणà¥à¤¡à¤²à¥€à¤• बाद कà¥à¤°à¤®à¤¶à¤ƒ à¤à¥‹à¤œà¤°à¤¾à¤œ, बीदा, नीसल, हापा, मेघराज व पताजी हà¥à¤à¥¤ इनà¥à¤¹à¥€à¤‚ पता के वंशज पातावत महेचा हैं।
कालावत महेचा:
मेघराज के पà¥à¤¤à¥à¤° कलà¥à¤²à¤¾ के वंशज कालावत महेचा हैं।
दूतावत महेचा:
मेघराज के पà¥à¤¤à¥à¤° दूदा के वंशज दूतावत महेचा हैं।
उगा महेचा:
वरसिंह के पà¥à¤¤à¥à¤° उगा के वंशज उगा महेचा हैं।
47. बाढ़मेरा राठौड़:
मलà¥à¤²à¥€à¤¨à¤¾à¤¥ के छोटे पà¥à¤¤à¥à¤° अरड़कमल ने बाड़मेर इलाके नाम से इनके वंशज बाढ़मेरा राठौड़ कहलाये।
48. पोकरण राठौड़:
मलà¥à¤²à¥€à¤¨à¤¾à¤¥ के पà¥à¤¤à¥à¤° जगमाल के जिन वंशजों का पोकरण इलाके में निवास हà¥à¤†à¥¤ वे पोकरण राठौड़ कहलाये।
49. खाबड़िया राठौड़:
मलà¥à¤²à¥€à¤¨à¤¾à¤¥ के पà¥à¤¤à¥à¤° जगमाल के पà¥à¤¤à¥à¤° à¤à¤¾à¤°à¤®à¤² हà¥à¤à¥¤ à¤à¤¾à¤°à¤®à¤² के पà¥à¤¤à¥à¤° खीमूं के पà¥à¤¤à¥à¤° नोधक के वंशज जामनगर के दीवान रहे इनके वंशज कचà¥à¤› में है। à¤à¤¾à¤°à¤®à¤² के दूसरे पà¥à¤¤à¥à¤° मांढण के वंशज माडवी (कचà¥à¤›) में रहते है वंशज, खाबड़ (गà¥à¤œà¤°à¤¾à¤¤) इलाके के नाम से खाबड़िया राठौड़ कहलाये।
50. कोटड़िया राठौड़:
जगमाल के पà¥à¤¤à¥à¤° कà¥à¤‚पा ने कोटड़ा पर अधिकार किया अतः कà¥à¤‚पा के वंशज कोटड़िया राठौड़ कहलाये। जगमाल के पà¥à¤¤à¥à¤° खींवसी के वंशज à¤à¥€ कोटडिया राठौड़ कहलाये।
51. गोगादे राठौड़:
सलखा के पà¥à¤¤à¥à¤° विराम के पà¥à¤¤à¥à¤° गोगा के वंशज गोगादे राठौड़ कहलाते है। केतॠ(चार गांव) सेखला (15 गांव) खिराज आदि इनके ठिकाने थे।
52. देवराजोत राठौड़:
बीरम के पà¥à¤¤à¥à¤° देवराज के वंशज देवराजोत राठौड़ कहलाये। सेतरावों इनका मà¥à¤–à¥à¤¯ ठिकाना था। सà¥à¤µà¤¾à¤²à¤¿à¤¯à¤¾ आदि à¤à¥€ इनके ठिकाने थे।
53. चाड़देवोत राठौड़:
वीरम के पौतà¥à¤° व देवराज के पà¥à¤¤à¥à¤° चाड़दे के वंशज चाड़देवोत राठौड़ हà¥à¤à¥¤ जोधपà¥à¤° परगने का देछॠइनका मà¥à¤–à¥à¤¯ ठिकाना था। गीलाकोर में à¤à¥€ इनकी जागीर थी।
54. जैसिधंदे राठौड़:
वीरम के पà¥à¤¤à¥à¤° जैतसिंह के वंशज जैसिधंदे राठौड़ हà¥à¤à¥¤
55. सतावत राठौड़:
चà¥à¤£à¥à¤¡à¤¾ वीरमदेवोत के पà¥à¤¤à¥à¤° सतà¥à¤¤à¤¾ के वंशज सतावत राठौड़ हà¥à¤à¥¤
56. à¤à¥€à¤‚वोत राठौड़:
चà¥à¤£à¥à¤¡à¤¾ के पà¥à¤¤à¥à¤° à¤à¥€à¤‚व के वंशज à¤à¥€à¤‚वोत राठौड़ कहलाये। खाराबेरा (जोधपà¥à¤°) इनका ठिकाना था।
57. अरड़कमलोत राठौड़:
चà¥à¤£à¥à¤¡à¤¾ के पà¥à¤¤à¥à¤° अरड़कमल वीर थे। राठौड़ो और à¤à¤¾à¤Ÿà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के शतà¥à¤°à¥à¤¤à¤¾ के कारण शारà¥à¤¦à¥‚ल à¤à¤¾à¤Ÿà¥€ जब कोडमदे मोहिल से शादी कर लौट रहा था, तब अरड़कमल ने रासà¥à¤¤à¥‡ में यà¥à¤¦à¥à¤§ के लिठललकारा और यà¥à¤¦à¥à¤§ में दोनों ही वीरता से लड़े। शारà¥à¤¦à¥‚ल à¤à¤¾à¤Ÿà¥€ ने वीरगति पाई और कोडमदे सती हà¥à¤ˆà¥¤ अरड़कमल à¤à¥€ उन घावों से कà¥à¤› दिनों बाद मर गà¤à¥¤ इस अरड़कमल के वंशज अरड़कमलोत राठौड़ कहलाये।
58. रणधीरोत राठौड़:
चà¥à¤£à¥à¤¡à¤¾ के पà¥à¤¤à¥à¤° रणधीर के वंशज रणधीरोत राठौड़ है। फेफाना इनकी जागीर थी।
59. अरà¥à¤œà¥à¤¨à¥‹à¤¤ राठौड़:
राव चà¥à¤£à¥à¤¡à¤¾ के पà¥à¤¤à¥à¤° अरà¥à¤œà¥à¤¨ वंशज अरà¥à¤œà¥à¤¨à¥‹à¤¤ राठौड़ कहलाये।
60. कानावत राठौड़:
चà¥à¤£à¥à¤¡à¤¾ के पà¥à¤¤à¥à¤° कानà¥à¤¹à¤¾ वंशज कानावत राठौड़ कहलाये।
61. पूनावत राठौड़:
चà¥à¤£à¥à¤¡à¤¾ के पà¥à¤¤à¥à¤° पूनपाल के वंशज पूनावत राठौड़ है। गांव खà¥à¤¦à¥€à¤¯à¤¾à¤¸ इनकी जागीर में था।
62. जैतावत राठौड़:
राव रणमलजी के जयेषà¥à¤ पà¥à¤¤à¥à¤° अखैराज थे। इनके दो पà¥à¤¤à¥à¤° पंचायण व महाराज हà¥à¤à¥¤ पंचायण के पà¥à¤¤à¥à¤° जैतावत के नाम पर इनके वंशज जैतावत राठौड़ कहलाते है।
१.) पिरथीराजोत जैतावत:
जैताजी के पà¥à¤¤à¥à¤° पृथà¥à¤µà¥€à¤°à¤¾à¤œ के वंशज पिरथीराजोत जैतावत कहलाते हैं। बगड़ी (मारवाड़) व सोजत खोखरों, बाली आदि इनके ठिकाने थे।
२.) आसकरनोत जैतावत:
जैताजी के पौतà¥à¤° आसकरण देइदानोत के वंशज आसकरनोत जैतावत है। मारवाड़ में थावला, आलासण, रायरो बड़ों, सदामणी, लाबोड़ी मà¥à¤°à¤¢à¤¾à¤µà¥‹à¤‚ आदि इनके ठिकाने थे।
३.) à¤à¥‹à¤ªà¤¤à¥‹à¤¤ जैतावत:
जैताजी के पà¥à¤¤à¥à¤° देइदानजी à¤à¥‹à¤ªà¤¤ के वंशज à¤à¥‹à¤ªà¤¤à¥‹à¤¤ जैतावत कहलाते हैं। मारवाड़ में खांडों देवल, रामसिंह को गà¥à¤¡à¥‹ आदि इनके ठिकाने थे।
63. कलावत राठौड़:
राव रिड़मल के पà¥à¤¤à¥à¤° अखैराज, इनके पà¥à¤¤à¥à¤° पंचारण के पà¥à¤¤à¥à¤° कला के वंशज कलावत राठौड़ कहलाते हैं। कलावत राठौड़ों के मारवाड़ में हूण व जाढ़ण दो गांवों के ठिकाने थे।
64. à¤à¤¦à¤¾à¤µà¤¤ राठौड़:
राव रणमल के पà¥à¤¤à¥à¤° अखैराज के बाद कà¥à¤°à¤®à¤¶à¤ƒ पंचायत व à¤à¤¦à¤¾ हà¥à¤à¥¤ इनà¥à¤¹à¥€à¤‚ à¤à¤¦à¤¾ के वंशज à¤à¤¦à¤¾à¤µà¤¤ राठौड़ कहलाये। देछॠ(जालौर) के पास तथा खाबल व गà¥à¤¡à¤¾ (सोजत के पास) इनके मà¥à¤–à¥à¤¯ ठिकाने थे।
65. कूà¤à¤ªà¤¾à¤µà¤¤ राठौड़:
मणà¥à¤¡à¥Œà¤° के रणमलजी के पà¥à¤¤à¥à¤° अखैराज के दो पà¥à¤¤à¥à¤° पंचायत व महाराज हà¥à¤à¥¤ महाराज के पà¥à¤¤à¥à¤° कूंपा के वंशज कूà¤à¤ªà¤¾à¤µà¤¤ राठौड़ कहलाये। मारवाड़ का राजà¥à¤¯ जमाने में कूंपा व पंचायण के पà¥à¤¤à¥à¤° जैता का महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ योगदान रहा था। चितà¥à¤¤à¥Œà¤¡à¤¼ से बनवीर को हटाने में à¤à¥€ कूंपा की महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ à¤à¥‚मिका थी। मालदेव ने वीरम को जब मेड़ता से हटाना चाहा, कूंपा ने मालदेव का पूरà¥à¤£ साथ देकर इनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने अपना पूरà¥à¤£ योगदान दिया। मालदेव ने वीरम से डीडवाना छीना तो कूंपा को डीडवाना मिला। मालदेव की १५९८ वि. में बीकानेर विजय करने में कूंपा की महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ à¤à¥‚मिका थी। शेरशाह ने जब मालदेव पर आकà¥à¤°à¤®à¤£ किया और मालदेव को अपने सरदारों पर अविशà¥à¤µà¤¾à¤¸ हà¥à¤† तो उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने साथियों सहित यà¥à¤¦à¥à¤§à¤à¥‚मि छोड़ दी परनà¥à¤¤à¥ जैता व कूंपा कहा धरती हमारे बाप दादाओं के शौरà¥à¤¯ से पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ हà¥à¤ˆ हैं हम जीवित रहते उसे जाने न देंगे। दोनों वीरों ने शेरशाह की सेना से टकà¥à¤•र ली और अदà¥à¤à¥à¤¤ शौरà¥à¤¯ दिखाते हà¥à¤ मातृà¤à¥‚मि की रकà¥à¤·à¤¾à¤°à¥à¤¥ बलिदान हो गà¤à¥¤ उनकी बहादà¥à¤°à¥€ से पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ होकर शेरशाह के मà¥à¤– से ये शबà¥à¤¦ निकल पड़े “मैंने मà¥à¤Ÿà¥à¤ ी à¤à¤° बाजरे के लिठदिलà¥à¤²à¥€ सलà¥à¤¤à¤¨à¤¤ खो दी होती।†इस पà¥à¤°à¤•ार अनेक यà¥à¤¦à¥à¤§à¥‹à¤‚ में आसोप के कूà¤à¤ªà¤¾à¤µà¤¤à¥‹à¤‚ ने वीरता दिखाई। कूà¤à¤ªà¤¾à¤µà¤¤ राठौड़ों की खांपें इस पà¥à¤°à¤•ार है:
महेशदासोत कूà¤à¤ªà¤¾à¤µà¤¤:
वि. सं. १६४१ में बादशाह अकबर ने सिरोही के राजा सà¥à¤°à¤¤à¤¾à¤¨ को दणà¥à¤¡ देने मोटे राजा उदयसिंह को à¤à¥‡à¤œà¤¾à¥¤ इस यà¥à¤¦à¥à¤§ में महेशदास के पà¥à¤¤à¥à¤° शारà¥à¤¦à¥‚लसिंह ने अदà¥à¤à¥à¤¤ पराकà¥à¤°à¤® दिखाया और वही रणखेत रहे। अतः उनके वंशज à¤à¤¾à¤µà¤¸à¤¿à¤‚ह को १à¥à¥¦à¥¨ वि. में कटवालिया के अलावा सिरयारी बड़ी à¤à¥€ उनका ठिकाना था। à¤à¤• à¤à¤• गांव के à¤à¥€ इनके काफी ठिकाने थे।
ईशà¥à¤µà¤°à¤¦à¤¾à¤¸à¥‹à¤¤ कूà¤à¤ªà¤¾à¤µà¤¤:
कूंपा के पà¥à¤¤à¥à¤° ईशà¥à¤µà¤°à¤¦à¤¾à¤¸ के वंशज ईशà¥à¤µà¤°à¤¦à¤¾à¤¸à¥‹à¤¤ कूà¤à¤ªà¤¾à¤µà¤¤ कहलाये। इनका मà¥à¤–à¥à¤¯ ठिकाना चणà¥à¤¡à¤¾à¤µà¤² था।
माणà¥à¤¡à¤£à¥‹à¤¤ कूà¤à¤ªà¤¾à¤µà¤¤:
कूà¤à¤ªà¤¾à¤œà¥€ के बड़े पà¥à¤¤à¥à¤° मांडण के वंशज माणà¥à¤¡à¤£à¥‹à¤¤ कूà¤à¤ªà¤¾à¤µà¤¤ कहे जाते है। इनका मà¥à¤–à¥à¤¯ ठिकाना चनà¥à¤¦à¥‡à¤²à¤¾à¤µ था।
जोधसिंहोत कूà¤à¤ªà¤¾à¤µà¤¤:
कूà¤à¤ªà¤¾à¤œà¥€ के बाद कà¥à¤°à¤®à¤¶à¤ƒ मांडण,खीवकण,किशनसिंह,मà¥à¤•नà¥à¤¦à¤¸à¤¿à¤‚ह,जैतसिंह,रामसिंह व सरदारसिंह हà¥à¤à¥¤ सरदारसिंह के पà¥à¤¤à¥à¤° जोधसिंह ने महाराजा अà¤à¤¯à¤¸à¤¿à¤‚ह जोधपà¥à¤° की तरफ से अहमदाबाद के यà¥à¤¦à¥à¤§ में अचà¥à¤›à¥€ वीरता दिखाई। महाराजा ने जोधसिंह को गारासांण खेड़ा,à¤à¤¬à¤°à¤•à¥à¤¯à¤¾ और कà¥à¤®à¥à¤à¤¾à¤°à¤¾ इनायत किया। इनके वंशज जोधासिंहोत कूà¤à¤ªà¤¾à¤µà¤¤ कहलाते हैं।
उदयसिंहोत कूà¤à¤ªà¤¾à¤µà¤¤:
कूà¤à¤ªà¤¾à¤œà¥€ के चौथे पà¥à¤¤à¥à¤° उदयसिंह के वंशज उदयसिंहोत कूà¤à¤ªà¤¾à¤µà¤¤ कहलाते हैं। उदयसिंह के वंशज छतà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤‚ह को वि. १८३१ में बूसी का ठिकाना (परगना गोड़वाड़) मिला। वि. सं. १à¥à¥§à¥« के धरमत के यà¥à¤¦à¥à¤§ में उदयसिंह के वंशज कलà¥à¤¯à¤¾à¤£à¤¸à¤¿à¤‚ह घोड़ा आगे बढ़ाकर तलवारों की रीढ़ के ऊपर घà¥à¤¸à¥‡ और वीरता दिखाते हà¥à¤ काम आये। यह कà¥à¤°à¤¬ बापसाहब का ठिकाना था। चेलावास,मलसा,बावड़ी,हापत,सीहास,रढावाल,मोड़ी आदि छोटे ठिकाने थे।
तिलोकसिंहोत कूà¤à¤ªà¤¾à¤µà¤¤:
कूंपा के सबसे छोटे पà¥à¤¤à¥à¤° तिलोकसिंह के वंशज तिलोकसिंहोत कूà¤à¤ªà¤¾à¤µà¤¤ कहलाते हैं। तिलोकसिंह ने सूरसिंहजी जोधपà¥à¤° की तरफ से किशनगढ़ के यà¥à¤¦à¥à¤§ में वीरगति पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ की। इस कारण तिलोकसिंह के पà¥à¤¤à¥à¤° à¤à¥€à¤®à¤¸à¤¿à¤‚ह को घलणा का ठिकाना सूरसिंह जोधपà¥à¤° ने वि. १६५४ में इनायत किया।
66. जोधा राठौड़:
राव रिड़मल के पà¥à¤¤à¥à¤° जोधा के वंशज जोधा राठौड़ कहलाये। राव जोधा जी का जनà¥à¤® २८ मारà¥à¤š, १४१६, तदनà¥à¤¸à¤¾à¤° à¤à¤¾à¤¦à¤µà¤¾ बदी ८ सं. १४à¥à¥¨ में हà¥à¤† था। इनके पिता राव रणमल मारवाड़ के शासक थे। इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ जोधपà¥à¤° शहर की सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¨à¤¾ के लिठजाना जाता है। इनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने ही जोधपà¥à¤° का मेहरानगढ़ दà¥à¤°à¥à¤— बनवाया था।
67. उदावत राठौड़:
जोधपà¥à¤° नरेश सूजाजी के à¤à¤• पà¥à¤¤à¥à¤° उदाजी थे। इनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने १५३९ वि. में सींधल खीवा से जैतारण विजय किया। इनके वंशज उदावत राठौड़ कहलाते हैं। राव उदा जी ने १५३९ विकà¥à¤°à¤®à¥€ में सिंधल खीवा से जेतारण विजय किया। राव उदा के छः पà¥à¤¤à¥à¤° थे –
राव मालमसिंह जी : मालमसिंह के वंशजों के लोटती, गलगिया आदि ठिकाने थे ।
राव डूंगरसिंह जी : डूंगर सिंह हरमाड़े सà¥à¤¥à¤² पर राणा उदयसिंह व हाजीखां के बीच यà¥à¤¦à¥à¤§ में हाजी खां के पकà¥à¤· में लड़ते हà¥à¤ काम आये ।
राव नेतसी जी : तीसरे पà¥à¤¤à¥à¤° नेतसी के वंशजों के अधिकार में बाछीमाड़ा, रायपà¥à¤° आदि ठिकाने थे ।
राव जैतसी जी : चौथे पà¥à¤¤à¥à¤° जेतसी के वंशज छीपिया नाबेड़ा में है
राव खेतसी जी : पांचवे पà¥à¤¤à¥à¤° खेतसी के वंशज बोयल गाà¤à¤µ के अधिकारी थे ।
खींवकरण जी : छठे पà¥à¤¤à¥à¤° खींवकरण थे। इनके पà¥à¤¤à¥à¤° रतनसिंह, मालसिंह ( जेतारण ) गोद चले गठ। खिंवकरण बड़े वीर थे सà¥à¤®à¥‡à¤² के यà¥à¤¦à¥à¤§ में शेरशाह के विरà¥à¤¦à¥à¤§ लड़ते हà¥à¤ काम आये ।
उदावत राठौड़ो के पà¥à¤°à¤®à¥à¤– ठिकाने:
उदावत राठौड़ों के बड़े ठिकानों में 01 – ठिकाना रायपà¥à¤° (21 गाà¤à¤µ) 02 – नीमाज (9 गाà¤à¤µ) 03 – रास (14 गाà¤à¤µ) 04 – लाबिया (6 गाà¤à¤µ) 07 – गà¥à¤¦à¤µà¤š (6 गाà¤à¤µ) पà¥à¤°à¤®à¥à¤– थे।
68. बीका राठौड़:
बीका जोधपà¥à¤° के राव जोधा का पà¥à¤¤à¥à¤° था। जोधा का बड़ा पà¥à¤¤à¥à¤° नीबा जोधा की हाडी राणी जसमादे के पà¥à¤¤à¥à¤° थे। वे पिता को विदà¥à¤¯à¤®à¤¾à¤¨à¤¤à¤¾ में ही मर गठथे। जसमादे के दो पà¥à¤¤à¥à¤° सांतल व सà¥à¤œà¤¾ थे। बीका सांतल से बड़े थे। पितृ à¤à¤•à¥à¤¤à¤¿ के कारण उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने अपने चाचा कांधल के साथ होकर जांगल पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ पर अधिकार कर नया राजà¥à¤¯ सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¿à¤¤ कर लिया था और सांतल को जोधपà¥à¤° की गदà¥à¤¦à¥€ मिलने पर कोई à¤à¤¤à¤°à¤¾à¤œ नहीं किया। इनà¥à¤¹à¥€à¤‚ बीका के वंशज बीका राठौड़ कहलाते हैं।
69. बीदावत राठौड़:
बीदावत राठौड़ जोधपà¥à¤° के राठौड़ राव जोधा के पà¥à¤¤à¥à¤° बीदा के वंश हैं। राव बीदा ने à¤à¤¾à¤ˆ राव बीका और चाचा रावत कांधल की सहायता से मोहिलों को पराजित करके बीदावाटी पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ बसाया जहाठबीदा के वंशधर बीदावत राठौड़ कहलाये।
बीदा ने अपने जीवन काल में बड़े पà¥à¤¤à¥à¤° उदयकरण को दà¥à¤°à¥‹à¤£à¤ªà¥à¤° और संसारचनà¥à¤¦à¥à¤° को पड़िहार दिया । उदयकरण के पà¥à¤¤à¥à¤° कलà¥à¤¯à¤¾à¤£à¤¦à¤¾à¤¸ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ लूणकरण बीकानेर का विरोध करने के कारण दà¥à¤°à¥‹à¤£à¤ªà¥à¤° से कलà¥à¤¯à¤¾à¤£à¤¦à¤¾à¤¸ का अधिकार हट गया । बीदा की समà¥à¤ªà¥‚रà¥à¤£ à¤à¥‚मि पर संसारचनà¥à¤¦à¥à¤° के पà¥à¤¤à¥à¤° सांगा का अधिकार हो गया। सांगा के पà¥à¤¤à¥à¤° गोपालदास के पà¥à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ से बीदावतों की कई खांपों की उतà¥à¤ªà¤¤à¥à¤¤à¤¿ हà¥à¤ˆà¥¤
70. मेड़तिया राठौड़:
जोधपà¥à¤° के शासक जोधा के पà¥à¤¤à¥à¤° दूदाजी के वंशज मेड़ता नगर के नाम से मेड़तिया कहलाये। राव दूदा जी का जनà¥à¤® राव जोधा जी की सोनगरी राणी चामà¥à¤ªà¤¾ के गरà¥à¤ से १५ जूंन १४४० को हà¥à¤† । राव दूदा जी ने मेड़ता नगर बसाया । इसमें उनके à¤à¤¾à¤ˆ राव बरसिà¤à¤¹ जी का à¤à¥€ साथ था। राव बरसिà¤à¤¹ जी व राव दूदा जी ने सांखà¥à¤²à¥‹à¤‚ (परमार ) से चौकड़ी ,कोसाणा आदि जीते । राव बीकाजी जी दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ सारंगखां के विरà¥à¤¦à¥à¤§ किये गये यà¥à¤¦à¥à¤§ में राव दूदा जी ने अदà¥à¤à¥à¤¤ वीरता दिखाई । मलà¥à¤²à¥‚खां ( सांà¤à¤° का हाकिम ) ने जब मेड़ता पर अधिकार कर लिया था । राव दूदा जी, राव सांतल जी, राव सूजा जी, राव बरसिà¤à¤¹ जी, बीसलपà¥à¤° पहà¥à¤‚चे और मलà¥à¤²à¥‚खां को पराजित किया । मलà¥à¤²à¥‚खां ने राव बरसिà¤à¤¹ जी को अजमेर में जहर दे दिया जिससे राव बरसिà¤à¤¹ जी की मà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥ हो गयी उनका पà¥à¤¤à¥à¤° सीहा गदà¥à¤§à¥€ पर बेठऔर इसके बाद मेड़ता राव दूदा जी और सीहा में बंटकर आधा – आधा रह गया ।
राव दूदा जी के पांच पà¥à¤¤à¥à¤° थे – (01) वीरमदेव – मेड़ता (02) रायमल – खानवा के यà¥à¤¦à¥à¤§ में वीरगति पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ हà¥à¤ । (03) रायसल (04) रतनसिंह – कूड़की ठिकाने के सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€, खानवा के यà¥à¤¦à¥à¤§ में वीरगति पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ हà¥à¤ । (05) पंचायण मीराबाई रतन सिंह की पà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ थी । रतनसिंह कूड़की ठिकाने के सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ थे ।
राव दूदा जी के पà¥à¤¤à¥à¤° वीरमदेव ईसवी १५१५ में मेड़ता की गदà¥à¤§à¥€ पर बैठे । इनका जनà¥à¤® १९ नवमà¥à¤¬à¤° १४à¥à¥ को हà¥à¤† । १ॠमारà¥à¤š खानवा में बाबर वॠसांगा के बीच हà¥à¤ यà¥à¤¦à¥à¤§ में वीरमदेव ने राणा सांगा का साथ दिया । राणा सांगा की मूरà¥à¤›à¤¿à¤¤ अवसà¥à¤¥à¤¾ के समय वे à¤à¥€ घायल थे । इस यà¥à¤¦à¥à¤§ में उनके à¤à¤¾à¤ˆ रायमल वॠरतनसिंह à¤à¥€ मà¥à¤—ल सेना से लड़ते हà¥à¤ वीरगति पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ हà¥à¤ । जोधपà¥à¤° के राजा मालदेव मेड़ता पर अधिकार करना चाहते थे । वीरमदेव ने 1536 ईसà¥à¤µà¥€ में अजमेर पर à¤à¥€ अधिकार कर लिया था । मालदेव ने अजमेर लेना चाहा पर वीरमदेव ने नहीं दिया तब मालदेव ने मेड़ता पर आकà¥à¤°à¤®à¤£ कर दिया । मालदेव का मेड़ता पर अधिकार हो गया । कà¥à¤› समय बाद मालदेव का अजमेर पर à¤à¥€ अधिकार हो गया । तब वीरमदेव रायमल अमरसर के पास चलेगठ। वीरमदेव आपने राजà¥à¤¯ मेड़ता पर पà¥à¤¨à¤ƒ अधिकार करना चाहते थे अतः वीरमदेव रणथमà¥à¤à¥‹à¤° की नवाब की मदद से शेरशाह के पास पहà¥à¤à¤š गठ। और मालदेव पर आकà¥à¤°à¤®à¤£ करने के लिठशेरशाह को तेयार किया । बीकानेर के राव कलà¥à¤¯à¤¾à¤£à¤®à¤² à¤à¥€ मालदेव दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ बीकानेर छीन लेने के कारन मालदेव के विरà¥à¤¦à¥à¤§ थे । उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने à¤à¥€ शेरशाह का साथ दिया । शेरशाह को बड़ी सेना लेकर जोधपà¥à¤° की तरह बढ़ा और विकà¥à¤°à¤®à¥€ संवत १६०० ईसà¥à¤µà¥€ १५४४ में अजमेर के पास सà¥à¤®à¥‡à¤² सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर यà¥à¤¦à¥à¤§ हà¥à¤† । मालदेव पहले ही मैदान छोड़ चà¥à¤•ा था । जैता और कà¥à¤®à¥à¤ªà¤¾ शेरशाह के सामने डटे रहे परनà¥à¤¤à¥ मालदेव की सेना को पराजीत होना पड़ा । इस यà¥à¤¦à¥à¤§ के बाद वीरमदेव ने मेड़ता पर पà¥à¤¨à¤ƒ अधिकार कर लिया ।
वीरमदेव के 10 पà¥à¤¤à¥à¤° थे । (01) जयमल – बदनोर (चितोड़) (02) ईशरदास (03) करण (04) जगमाल (05) चांदा (06) बीका – बीका के पà¥à¤¤à¥à¤° बलू को बापरी सोजत चार गाà¤à¤µ मिला (07) पृथà¥à¤µà¥€à¤°à¤¾à¤œ – इनके वंशज मेड़ता में रहे (08) पà¥à¤°à¤¤à¤¾à¤ªà¤¸à¤¿à¤‚ह (09) सारंगदे (10) मांडण ।
72. चाà¤à¤ªà¤¾à¤µà¤¤ राठौड़:
राव रिड़मल के पà¥à¤¤à¥à¤° चांपाजी थे। चांपाजी ने वि.सं. १५२२ में सà¥à¤²à¥à¤¤à¤¾à¤¨ महमूद खिलजी के साथ यà¥à¤¦à¥à¤§ किया था। वि.सं. १५३६ में मणियारी के पास सीधलों के साथ यà¥à¤¦à¥à¤§ हà¥à¤† जिसमें चांपा वीरगति को पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ हà¥à¤à¥¤
इनà¥à¤¹à¥€à¤‚ चांपा के वंशधर चांपावत राठौड़ कहलाये। इनके मारवाड़ में काफी ताजीमी ठिकाने थे। जयपà¥à¤° राजà¥à¤¯ में गीजगढ़, नायला, गौनेर और काणूता मेवाड़ ने कथरिया, मालोल व गोरडियो तथा कोटा में सारथल। गà¥à¤µà¤¾à¤²à¤¿à¤¯à¤° राजà¥à¤¯ में वागली तथा ईडर राजà¥à¤¯ में टिटोई चांदनी व मोई चामà¥à¤ªà¤¾à¤µà¤¤à¥‹à¤‚ के ठिकाने थे।
73. मणà¥à¤¡à¤²à¤¾à¤µà¤¤ राठौड़:
राव रिड़मल के पà¥à¤¤à¥à¤° मणà¥à¤¡à¤²à¤¾à¤œà¥€ ने वि. सं. १५२२ में सारूंडा (बीकानेर राजà¥à¤¯) पर अधिकार कर लिया था। यह इनका मà¥à¤–à¥à¤¯ ठिकाना था। इनà¥à¤¹à¥€à¤‚ मणà¥à¤¡à¤²à¤¾ के वंशज मणà¥à¤¡à¤²à¤¾à¤µà¤¤ राठौड़ है।
74. à¤à¤¾à¤–रोत राठौड़:
बाला राठौड़ – राव रिड़मल (रणमल) के पà¥à¤¤à¥à¤° à¤à¤¾à¤–रसी के वंशज à¤à¤¾à¤–रोत राठौड़ कहलाये। इनके पà¥à¤¤à¥à¤° बाला बड़े बहादà¥à¤° थे। इनà¥à¤¹à¥‹à¤¨à¥‡à¤‚ कई यà¥à¤¦à¥à¤§à¥‹à¤‚ में वीरता का परिचय दिया। चितà¥à¤¤à¥Œà¤¡à¤¼ के पास कपासण में राठौड़ों और शीशोदियों में यà¥à¤¦à¥à¤§ हà¥à¤†à¥¤ इस यà¥à¤¦à¥à¤§ में बाला घायल हà¥à¤à¥¤ सिंघलों से वि. सं. १५३६ में जोधपà¥à¤° का यà¥à¤¦à¥à¤§ मणियारी नामक सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ हà¥à¤†à¥¤ इस यà¥à¤¦à¥à¤§ में चांपाजी मारे गà¤à¥¤ बाला ने सिंघलो को à¤à¤—ाकर अपने काकाजी का बदला लिया। इनà¥à¤¹à¥€à¤‚ बाला के वंशज बाला राठौड़ कहलाये। मोकलसर (सिवाना) नीलवाणों (जालौर) माणà¥à¤¡à¤µà¤²à¤¾ (जालौर) इनके ताजमी ठिकाने थे। à¤à¤²à¤¾à¤£à¥‹à¤‚, ओडवाणों, सीवाज आदि इनके छोटे छोटे ठिकाने थे।
75. पाताजी राठौड़:
राव रिड़मल के पà¥à¤¤à¥à¤° पाता à¤à¥€ बड़े वीर थे। वि. सं. १४९५ में कपासण (चितà¥à¤¤à¥Œà¤¡à¤¼ के पास) सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर शीशोदियों व राठौड़ों में यà¥à¤¦à¥à¤§ हà¥à¤†à¥¤ इस यà¥à¤¦à¥à¤§ में पाताजी वीरगति को पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ हà¥à¤†à¥¤ इनके पातावत राठौड़ कहलाये। पातावतों के आऊ (फलौदी- ४ गांव) करण (जोधपà¥à¤°) पलोणा (फलौदी) ताजीम के ठिकाने थे। इनके अलावा अजाखर, आवलो, केरलो, केणसर, खारियों (मेड़ता) खारियों (फलौदी) घंटियाली, चिमाणी, चोटोलो, पलीणो, पीपासर à¤à¤—à¥à¤†à¤¨à¥‡ शà¥à¤°à¥€ बालाजी, मयाकोर, माडवालो, मिठà¥à¤ ियों à¤à¥‚ंडासर, बाड़ी, रणीसीसर, लाडियो, लूणो, लà¥à¤¬à¤¾à¤¸à¤°, सेवड़ी आदि छोटे छोटे ठिकाने जोधपà¥à¤° रियासत में थे।
76. रूपावत राठौड़:
राव रिड़मल के पà¥à¤¤à¥à¤° रूपा ने बीका का उस समय साथ दिया जब वे जांगल देश पर अधिकार रहे थे। इनà¥à¤¹à¥€à¤‚ रूपा के वंशज रूपावत राठौड़ हà¥à¤à¥¤ मारवाड़ में इनका चाखू à¤à¤• ताजीमी ठिकाना था। दूसरा ताजीमी ठिकाना à¤à¤¾à¤¦à¤²à¤¾ (बीकानेर राजà¥à¤¯) था। इनके अतिरिकà¥à¤¤ ऊदट (फलौदी) कलवाणी (नागौर) à¤à¥‡à¤¡à¤¼ (फलौदी) मूंजासर (फलौदी) मारवाड़ में तथा सोà¤à¤¾à¤£à¥‹, उदासर आदि बीकानेर राजà¥à¤¯ के छोटे छोटे ठिकाने थे।
77. करणोत राठौड़:
राव रिड़मल के पà¥à¤¤à¥à¤° करण के वंशज करणोत राठौड़ कहलाये। इसी वंश में दà¥à¤°à¥à¤—ादास (आसकरणोत) हà¥à¤à¥¤ जिन पर आज à¤à¥€ सारा राजसà¥à¤¥à¤¾à¤¨ गरà¥à¤µ करता है। अनेकों कषà¥à¤Ÿ सहकर इनà¥à¤¹à¥‹à¤¨à¥‡à¤‚ मातृà¤à¥‚मि की इजà¥à¤œà¤¤ रखी। अपनी सà¥à¤µà¤¾à¤®à¤¿à¤à¤•à¥à¤¤à¤¿ के लिठये इतिहास में पà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¦à¥à¤§ रहे है।
78. माणà¥à¤¡à¤£à¥‹à¤¤ राठौड़:
राव रिड़मल के पà¥à¤¤à¥à¤° मांडण के वंशज माणà¥à¤¡à¤£à¥‹à¤¤ राठौड़ कहलाते हैं। मारवाड़ में अलाय इनका ताजीमी ठिकाना था। इनके अतिरिकà¥à¤¤ गठीलासर, गडरियो, गोरनà¥à¤Ÿà¥‹, रोहिणी, हिंगवाणिया आदि इनके छोटे छोटे ठिकाने थे।
79. नाथोत राठौड़:
नाथा राव रिड़मल के पà¥à¤¤à¥à¤° थे। राव चूंडा नागौर के यà¥à¤¦à¥à¤§ में à¤à¤¾à¤Ÿà¥€ केलण के हाथों मारे गà¤à¥¤ नाथाजी ने अपने दादा का बेर केलण के पà¥à¤¤à¥à¤° अकà¥à¤•ा को मार कर लिया। इनà¥à¤¹à¥€à¤‚ नाथा के वंशज नाथोत राठौड़ कहलाते हैं। पहले चानी इनका ठिकाना था।नाथूसर गांव इनकी जागीर में था।
80. सांडावत राठौड़:
राव रिड़मल के पà¥à¤¤à¥à¤° सांडा के वंशज सांडावत राठौड़ कहलाते हैं।
81. बेरावत राठौड़:
राव रिड़मल के पà¥à¤¤à¥à¤° बेरा के वंशज बेरावत राठौड़ कहलाते हैं। दूधवड़ इनका गांव था।
82. अडवाल राठौड़:
राव रिड़मल के पà¥à¤¤à¥à¤° अडवाल के वंशज अडवाल राठौड़ कहलाते हैं। ये मेड़ता के गांव आछोजाई में रहे। राव रिड़मल के पà¥à¤¤à¥à¤° :
83. खेतसिंहोत राठौड़:
राव रिड़मल के पà¥à¤¤à¥à¤° जगमाल के पà¥à¤¤à¥à¤° खेतसी के वंशज खेतसिंहोत राठौड़ कहलाते हैं। इनको नेतड़ा गांव मिला था।
84. लखावत राठौड़:
राव रिड़मल के पà¥à¤¤à¥à¤° लखा के वंशज लखावत राठौड़ कहलाते हैं।
85. डूंगरोज राठौड़:
राव रिड़मल के पà¥à¤¤à¥à¤° डूंगरसी के वंशज डूंगरोज राठौड़ कहलाते हैं। डूंगरसी को à¤à¤¾à¤¦à¥à¤°à¤œà¥‚ण मिला था।
86. à¤à¥‹à¤œà¤¾à¤°à¤¾à¤œà¥‹à¤¤ राठौड़:
राव रिड़मल के पौतà¥à¤° à¤à¥‹à¤œà¤°à¤¾à¤œ जैतमालोत के वंशज à¤à¥‹à¤œà¤¾à¤°à¤¾à¤œà¥‹à¤¤ राठौड़ कहलाते हैं। इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ पलसणी गांव मिला था। (राव रिड़मल के पà¥à¤¤à¥à¤° हापा, सगता, गोयनà¥à¤¦, करà¥à¤®à¤šà¤‚द और उदा के वंशजों की जानकारी उपलबà¥à¤§ नहीं। उदा के वंशज बीकानेर के उदासर आदि गांव में सà¥à¤¨à¥‡ जाते हैं )
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